Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद से कई ऐसी खबरें सामने आई हैं जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। कहीं एक मासूम की जिंदगी पतंग लूटने की चाहत और प्रशासन की अनदेखी की भेंट चढ़ गई, तो कहीं सरकारी मुलाजिम अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते नजर आए। इतना ही नहीं जिले की सड़कों पर बढ़ता खून और बिजली विभाग में फैला भ्रष्टाचार का अंधेरा आज की मुख्य सुर्खियां हैं। तो चलिए इस लेख में जानते है पिछले 24 घंटे में हुई उन वारदातों के बारें में जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
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लोनी में सुरक्षा की अनदेखी
गाजियाबाद से पहला मामला लोनी के अंकुर विहार थाना क्षेत्र से है जहां खुले तालाब और सुरक्षा की अनदेखी एक बार फिर एक मासूम की जान पर भारी पड़ी हैं। गाजियाबाद के लोनी में पतंग लूटने के चक्कर में तालाब में गिरे बच्चे की इस हृदयविदारक घटना ने स्थानीय प्रशासन के सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार रात से ही बचाव दल अंधेरे, कीचड़ और झाड़ियों के बीच मासूम की तलाश में जुटा है, लेकिन समय बीतने के साथ परिजनों की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना लोनी के अंकुर विहार थाना क्षेत्र की है। यहां बुध बाजार कॉलोनी का रहने वाला 6 वर्षीय मासूम आतिफ रविवार शाम करीब 5 बजे पतंग लूटने के दौरान डाबर तालाब श्मशान घाट के पास गहरे पानी में समा गया। जब आतिफ घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
सीसीटीवी फुटेज और तालाब के किनारे मिली मासूम की चप्पलों ने हादसे की पुष्टि कर दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए NDRF, स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की टीमें रात से ही रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। तालाब के आसपास की झाड़ियों और मिट्टी को हटाने के लिए जेसीबी मशीनों का सहारा लिया जा रहा है।
हालांकि, अंधेरे और कठिन रास्तों और झाड़ियों के कारण सर्च ऑपरेशन में बाधा आ रही है। एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि रेस्क्यू टीम लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन अब तक बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

आईएमटी राजनगर में जनगणना ड्यूटी से गायब कर्मचारी
वहीं, गाजियाबाद से ही दूसरी खबर प्रशासन की सख्ती को लेकर है, जहां जनगणना ड्यूटी से गायब रहने वाले कर्मचारियों पर गाज गिरी है। इस मामले ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को लेकर सरकारी कर्मचारी गंभीर नहीं हैं? गाजियाबाद के कविनगर जोन स्थित आईएमटी राजनगर में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के पहले ही दिन तब हड़कंप मच गया, जब निर्धारित बैच के 500 प्रगणकों में से 100 से अधिक कर्मचारी ड्यूटी से नदारद मिले।
इस अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन ने न केवल भारी नाराजगी जताई है, बल्कि अनुपस्थित रहने वाले सभी प्रगणकों का वेतन रोकने के कड़े निर्देश भी जारी कर दिए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जनगणना जैसे कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और बिना अनुमति गायब रहने वालों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

सुरक्षा और नियमों की अनदेखी
सुरक्षा और नियमों की अनदेखी का एक और मामला शिक्षा विभाग से जुड़ा है, जहाँ स्कूली वाहनों के सत्यापन को लेकर मंडल के कई स्कूल अब प्रशासन के रडार पर हैं। नौनिहालों की सुरक्षा से जुड़े नियमों को ठेंगे पर रखना अब स्कूल संचालकों को भारी पड़ सकता है।
गाजियाबाद मंडल में स्कूली वाहनों के ऑनलाइन सत्यापन के बाद शपथ पत्र (Affidavit) जमा करने में भारी आनाकानी देखने को मिल रही है। परिवहन विभाग की सख्ती के बावजूद नोएडा, हापुड़ और बुलंदशहर के स्कूल इस मामले में सबसे फिसड्डी साबित हो रहे हैं, जिस पर अब प्रशासन ने सख्त दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
परिवहन विभाग के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, सभी निजी और सरकारी स्कूलों को ‘UP-ISVMP’ पोर्टल पर अपने वाहनों का विवरण देना अनिवार्य है और जिन प्राइमरी स्कूलों के पास अपना कोई वाहन नहीं है, उन्हें भी इस आशय का शपथ पत्र अपलोड करना होगा।
हालांकि गाजियाबाद में लगभग 1,967 वाहनों का तकनीकी सत्यापन पूरा हो चुका है, लेकिन परिवहन आयुक्त और प्रमुख सचिव शिक्षा के आदेशों के बाद भी बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) स्तर पर शपथ पत्र अपलोड करने की प्रक्रिया रुकी हुई है, जिससे विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं और अब लापरवाह स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

क्यों नहीं थम रहे सड़क हादसे
चौथा मामला सड़क हादसों में वृद्धि से जुड़ा है जिससे ये सवाल खड़ा होता है कि क्या गाजियाबाद की सड़कें असुरक्षित होती जा रही हैं? प्रशासन द्वारा यातायात पुलिसकर्मियों की संख्या और निगरानी के संसाधन बढ़ाए जाने के बावजूद, हादसों में घायल होने वालों का आंकड़ा साल दर साल रिकॉर्ड तोड़ रहा है। साल 2022 में जहां घायलों की संख्या 638 थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 849 पहुंच गई है। संसाधनों में वृद्धि के बाद भी आखिर क्यों नहीं थम रहा सड़कों पर खून बहना, आज यह एक बड़ा सवाल है।
विस्तृत जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद में पिछले तीन वर्षों में घायलों का आंकड़ा करीब 33 प्रतिशत तक बढ़ गया है। मृतकों की संख्या भी अब 400 के करीब पहुँच रही है। प्रशासन ने लाल कुआं और मोहन नगर जैसे 20 प्रमुख जंक्शनों पर पुलिसकर्मियों की संख्या दोगुनी करते हुए 24 घंटे की ड्यूटी तैनात की है, फिर भी रॉन्ग-साइड ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग और दोपहिया वाहनों की लापरवाही जैसी चुनौतियां बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
इन हादसों पर लगाम लगाने के लिए जिले के 18 ब्लैक स्पॉट्स को चिह्नित किया गया है। साथ ही, अब प्रमुख सड़कों को गूगल मैप्स से जोड़कर डिजिटल स्पीड अलर्ट देने और गंभीर घायलों को ‘गोल्डन ऑवर’ में त्वरित इलाज दिलाने के लिए 10 निजी अस्पतालों को भी इस मुहिम से जोड़ा गया है।

बिजली विभाग के सिंडिकेट का भंडाफोड़
पांचवा मामला प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का बिजली विभाग से जुड़ा है, जहाँ सरकारी बिजली को निजी मुनाफे के लिए बेचने का एक बड़ा खेल पकड़ा गया है। बिजली चोरी रोकने का दावा करने वाला विभाग खुद ही बिजली बेचने के गोरखधंधे में लिप्त पाया गया है। गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित कनावनी क्षेत्र में पिछले 5-6 वर्षों से चल रहे एक ऐसे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जो हर महीने करीब 30 लाख रुपये की सरकारी बिजली अवैध रूप से बेचकर अपनी जेबें भर रहा था।
इस भ्रष्टाचार की आंच अब विभाग के बड़े अफसरों तक पहुँच गई है। बताया जा रहा है कि इस अवैध वसूली का हिस्सा संविदा कर्मियों और अधिकारियों के बीच बंदरबांट किया जाता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी मंत्री ने भी संज्ञान लिया है और मुख्यालय ने 5 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होते ही दोषी अधिकारियों और संविदा कर्मियों पर निलंबन और बर्खास्तगी की गाज गिर सकती है।





























