Ghaziabad Panchsheel Primrose: क्या कोई अपने ही घर में खिड़कियां खोलने से डर सकता है? गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित पंचशील प्राइमरोज के निवासी आज इसी खौफ में जी रहे हैं। स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों की धज्जियां उड़ाती यह सोसायटी इन दिनों ‘नरक’ में तब्दील हो चुकी है। पिछले 15 दिनों से कूड़े का उठान न होने के कारण चारों तरफ सड़ते कचरे का अंबार लगा है। 11 टावरों के डक्ट एरिया कूड़े से पटे पड़े हैं और उनसे उठती असहनीय दुर्गंध ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि लोग अब संक्रामक बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं। नगर निगम की यह चुप्पी और प्रशासन की अनदेखी आखिर कब तक चलेगी?
स्थिति यह है कि सोसायटी के सभी 11 टावरों में बने कूड़ा डालने वाले डक्ट (ducts) अब पूरी तरह भर चुके हैं। लंबे समय से जमा कूड़ा अब सड़ने लगा है, जिसकी वजह से पूरे परिसर में ऐसी तेज बदबू फैल गई है कि सांस लेना दूभर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले नगर निगम की गाड़ियां नियमित रूप से कूड़ा उठाने आती थीं, लेकिन पिछले दो हफ्तों से एक भी वाहन यहाँ नहीं पहुँचा है। प्रशासन की इस अनदेखी के कारण अब लोग संक्रामक बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं। आखिर इस लापरवाही की जवाबदेही किसकी है?
इस वजह से सोसायटी में गंदगी का ढेर लग गया है और साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है, क्योंकि गंदगी के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
सोसायटी के निवासी प्रशांत चौधरी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले दो हफ्तों से कूड़ा नहीं उठाया गया है। स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि टावरों के डक्ट पूरी तरह भर गए हैं और उनसे निकलने वाली बदबू अब बेसमेंट तक पहुँच रही है, जिससे वहाँ जाना भी लगभग नामुमकिन हो गया है। निवासियों द्वारा कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई है।
वहीं एक अन्य निवासी निखिल नरूला का कहना है कि गंदगी की वजह से मच्छरों की संख्या भी तेजी से बढ़ गई है, जिससे डेंगू और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने नगर निगम से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने की मांग की है।
कुल मिलाकर सोसायटी के लोग स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के पोर्टल पर लगातार शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। निवासियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है, क्योंकि वे भारी मेंटेनेंस और टैक्स देने के बावजूद ऐसी नरकीय स्थिति में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन अब और देर न करते हुए इस समस्या पर तत्काल ध्यान देगा और युद्धस्तर पर सफाई अभियान चलाकर व्यवस्था को फिर से दुरुस्त करेगा।






























