Sikhism in Baghdad: कहते है कि हर एक सिख के लिए वो स्थान जहां दसों गुरुओं में के चरण कमल पड़े, वो स्थान खुद में ही गुरुद्वारे जितना पवित्र हो गया। वो स्थान सिखो के लिए पूजनीय हो गया।, खासकर सिख धर्म की नींव रखने वाले पहले आदि गुरु गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की स्थापना के लिए लगातार 24 साल तक दुनियाभर में करीब 28 हजार किलोमीटर की यात्राएं की। जिन्हें सिख संगत उदासियां कहते है, हालांकि जैसे जैस समय बदला कई देश, कई स्थान ऐसे हुए जहां से गुरु साहिब की निशानियों को तबाह कर दिया गया।
लेकिन फिर भी वहां की हवाओं से गुरु साहिब की खुशबू को नहीं मिटा पाए, वहां न केवल उनके आगमन के सबूत है बल्कि वहां वो आज भी पूजे जाते है, गुरु साहिब और सिख धर्म की लौ को आज भी बरकरार रखने वाली एक राजधानी है बगदाद। जहां आज भले ही इस्लामिक कट्टरपंथियों ने अपना दबदबा कायम कर लिया हो, लेकिन वो सिख धर्म और गुरु साहिब की निशानियों को पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाए। अपने इस लेख में हम बगदाद में फैले सिख धर्म के बारे में जानेंगे, साथ कैसे गुरु साहिब ने बगदाद की धरती पर एक महान सूफी संत को अपने आगे नतमस्तक करवाया था। जानेंगे क्या है बगदाद में सिख धर्म के फलने फूलने की कहानी।
बगदाद के बारे में जानकारी – Sikhism in Bagdad
बगदाद (Sikhism in Baghdad) इस्लामिक देश इराक की राजधानी है जो कि मध्य इराक में टिगरिस नदी के किनारे बसा हुआ इराक का सबसे बड़ा शहर है। इस शहर को 30 जुलाई 762 ईस्वी में खलीफा अल-मंसूर ने बसाया था, जिसमें 9 जिले मौजूद है। बगदाद का क्षेत्रफल 673 वर्ग किलोमीटर है, वहीं इसकी आबादी साल 2024 के आकड़ो के अनुसार 7,837,463 के आसपास है, जो कि पूरे इराक का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा है। बगदाद को कभी शांति का शहर कहा जाता था, जहां विद्या और संस्कृति को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता था।
यहां आय का प्रमुख साधन तेल के कुओ से तेल निकालना, कालीन बनाना, चमड़ा और कपड़ा उद्योग है। बगदाद आज के इराक के लिए सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक केंद्र है, जहां से पूरे इराक पर नजर रखी जाती है। बगदाद में होने वाली गतिविधियों का पूरा इराक पर असर पड़ता है। यहां की बहुल आबादी शिया सुन्नी मुसलमान है, इसके अलावा इसाई, यहूदी धर्म के लोग भी रहते है.. इसके अलावा यहां सिख धर्म के कभी फलने फूलने के भी संकेत मिलते है।
बगदाद में सिख धर्म की कहानी – Sikhism in Baghdad
जब सिखों के पहले गुरू नानक देव जी की उदासियों का विवरण देखेंगे कि पायेंगे कि हर उदासी उन्होंने अलग अलग दिशाओं में की है.. इसी तरह से1517 में जब वो चौथी उदासी के लिए निकले थे तो वो भारत से पश्चिम दिशा की तरफ गए थे, जिसमें वो मक्का मदीना और इराक पहुंचे थे, जहां उन्होंने इक ओंमकार का संदेश दिया था। वहां गुरु साहिब ने छुआछूत, भेदभाव, अंथविश्वास का विरोध करते हुए दया, भाईचारा और सेवा का संदेश दिया था। गुरु साहिब के आगमन और यहां संगतो को संदेश देने के प्रतीक के रूप में आज भी बगदाद (Sikhism in Bagdad) में बाबा नानक दरगाह के नाम से सिख गुरद्वारा मौजूद है। जो कि अल काधिमिया स्टेशन के पास स्थित है।
कहा जाता है कि उस वक्त यहां पर पीर दस्तगीर और बहलोल दाना काफी बड़े संत हुआ करते थे, जिनके हजारों अनुयायी थे, उन्होंने जब गुरु साहिब को पहली बार देखा तो उनके चेहरे की आभा देखकर उनकी आंखे भर आई.. वहां उन्होंने गुरु साहिब के साथ आध्यत्मिकता का नया संदेश जाना, गुरु साहिब टिगरिस नदी के किनारे पर बैठ कर संगत को संदेत देते थे, जहां आज भी चबूतरा मौजूद है और वहां पर लिखा है- गुरु पवित्र गुरु बाबा गुरु नानक देव जी की स्मृति में.. सात संतो ने इस स्थान का निर्माण कराया है.. जो कि गुरु साहिब की उदासी के समय में ही किया गया था। हालांकि समय के साथ ये स्थान विलुप्त ही हो गया था लेकिन पहले विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सेना की तरफ से इराक गए सिख सैनिको ने इस स्थान की खोज की थी।
सिख सैनिको ने एकजुट होकर उसका दरगाह का किया – Sikhism in Baghdad
ये स्थान खंडहर बन चुका था लेकिन सिख सैनिको ने एकजुट होकर उसका पुर्ननिर्माण किया.. यहां पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब को स्थापित किया और लंगर की परंपरा शुरु की थी, धीरे धीरे सिखों की संख्या यहां बढ़ने लगी थी, लेकिन 2003 में इराक पर कई घातक हमले हुए जिससे गुरुवारा बाबा नानक दरगाह को काफी नुकसान हुआ.. हालांकि निशानी के तौर पर बाहरी दीवार का हिस्सा और एक मेहराब ही बचा है। जो सबूत है कि कभी बगदाद में सिख धर्म फला फूला था। बगदाद में सिख आबादी की बात करें तो युद्ध से पहले यहां सिखो की संख्या काफी अच्छी थी, लेकिन इस वक्त पूरे इराक में करीब 5600 सिख है, जिसमें 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी बगदाद में ही रहती है।
ये बेहद दुख की बात है कि कभी सिख धर्म की संस्कृति का प्रतीक बनने वाला बगदाद आज गृह युद्ध की आग में जलकर केवल खूनखराबे तक सीमित हो गया है। जबकि गुरु साहिब ने हमेशा शांति और प्रेम का संदेश दिया.. 2023 में इराकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कासिम अल अराजी ने दिल्ली यात्रा के दौरान बगदाद के गुरुद्वारे बाबा साहब दरगाह को फिर से बनाने के लिए अपील की थी, लेकिन जैसी स्थिति फिलहाल इस वक्त बगदाद में है, उसे देखते हुए इसका जीर्णोधार इतना आसान नहीं होगा।
सिख अब भी यहां अल्पसंख्यक है, जिन्हें अपनी पहचान के लिए लड़ना पड़ रहा है.. ऐसे में जरूरी है कि सिखों को एकजुटता दिखाते हुए फिर से गुरु नानक देव जी की धरोहर को बनाये रखें। सिक्खी की परंपरा को बनाये रखने के लिए उनका संघर्ष जल्द ही रंग लायेगा.. और फिर से यहां सिखों की तादाद बढ़ेगी।




























