Sikhs 12 o clock connection: सरदार जी 12 बज गए… भारत में सरदारो से लिए ये मजाक काफी प्रचलित है.. करीब 50 प्रतिशत सरदारों को एक न एक बार इस मजाक को कहना पड़ा है..लेकिन क्या आप सोच सकते है कि जिस वाक्य को सिखों का अपमान करने के लिए, उनका मजाक बनाने के लिए इस्तेमाल करते है असल में वो एक वीरता की गाथा के कारण कहा जाता है। शायद नहीं। जो सरदारो के 12 बजने को लेकर मजाक बनाते है.. उन्हें सही मायने में 12 बजे औऱ सरदारो का रियल कनेक्शन पता ही नहीं है।
क्योंकि जैसे ही आप ये सच जानेंगे.. मजाक उड़ाने वालो के सिर शर्म से झुक जायेंगे। वहीं हर एक व्यक्ति सरदारो को सैल्यूट करेगा.. जिन्होंने सैकड़ो महिलाओं की आबरू बचाई.. वो भी इस 12 बजते ही.. अपने इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे 12 बज गए औऱ सरदारो का आपस में क्या रिश्ता है,. तो वहीं क्यों जिसे बहादुरी औऱ सम्मान के साथ याद किया जाना चाहिए था.. उसे लोगो ने मजाक में बदल दिया। क्या है सिख धर्म का 12 बजे से कनेक्शन।
महान लड़ाका सरदार जस्सा सिंह अहलूवालिया – Sikhs 12 o clock connection
सच तो ये है कि सरदारो के 12 बज गए का कनेक्शन 18वी सदी के महान लड़ाका सरदार जस्सा सिंह अहलूवालिया (Jassa Singh Ahluwalia) से है… जी हां, ये बात करीब 1739 की होगी… फारस का शासक औऱ लूटेरा नादिरशाह भारत को लूट कर वापिस फारस लौट रहा था… लेकिन लूट में केवल सोने, चांदी हीरे जवाहरत ही नहीं थे बल्कि 2000–2200 के करीब हिंदू–सिख लड़कियां और महिलाओं भी बंदी थी, जिन्हे नादिरशाद ने उत्पात मचाने के बाद बंदी बनाया था औऱ अपनी दासी बनाने के लिए फारस ले जा रहा था। वो पंजाब के रास्ते से ही भारत आया था, उसके साथ हजारों की संख्या में सेना थी। जो कई महीनों तक का सफर करके आई थी और वैसे ही धीरे धीरे अलग अलग समय पर पड़ाव डाल वापिस लौट रहे थे।
महिलाओ की रक्षा के लिए सरदार जस्सा सिंह ने उठाया बड़ा कदम – Sikhs 12 o clock connection
लेकिन जब नादिरशाह पंजाब पहुंचा तब उसे ये अंदाजा नहीं था कि यहां उसका सामना भारत मां के वीर लाल सरदार जस्सा सिंह अहलूवालिया (Jassa Singh Ahluwalia) से होगा।.. उनकी सेना गुरिल्ला युद्ध में निपुण थी और घात लगातार सेना को तबाह कर देना उनकी सेना की सबसे बड़ी खूबी की। जब नादिरशाह का पड़ाव पंजाब में पड़ा जब भारतीय महिलाओ की रक्षा के लिए सरदार जस्सा सिंह ने एक बड़ा कदम उठाया.. वो जानते थे कि दिन के उजाले में हमला करने से महिलाओ को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, इसलिए उन्होंने अपनी सेना को रात के समय घात लगाकर हमला करने और महिलाओ को आजाद कराने का फैसला किया।
जैसे ही 12 बजे.. सरदार जस्सा सिंह (Jassa Singh Ahluwalia) की सेना ने नादिरशाह ( Nadir Shah) की सेना पर धाबा बोल दिया.. उस हमले में सैकड़ो महिलाओ को बचाया गया.. ये सिलसिला कई दिनो तक चलता रहा, जिसके बाद से नदिरशाह की सेना 12 बजे के नाम से भी थर थर कांपने लगती थी। वो लाख कोशिशे करते लेकिन सरदार जस्सा सिंह (Jassa Singh Ahluwalia) की सेना अपना लक्ष्य पूरा कर के ही दम लेती थी… नादिरशाद की सेना 12 बजते ही कहने लगती की सरदार के 12 बज गए। ये 12 बज गए कहावत असल साहस, शौर्य और वीरता की गाथा है, तो वहीं दुश्मनो के पसीने छुड़ा देने के ऊपर कही गई कहकावत है।
12 बजते ही सरदार पागल हो जाते है- क्या है सच्चाई – Sikhs 12 o clock connection
अब सवाल ये है कि मजाक मजाक में ये भी कहा जाता है कि 12 बजते ही सरदार पागल हो जाते है.. तो उसके पीछे का क्या कारण है। दरअसल सरदार जस्सा सिंह (Jassa Singh Ahluwalia) की सेना 12 बजते ही गोरिल्ला कला से ही हमला करती थी.. जो बिना रूके हमला करती थी.. औऱ हवा में आती और हवा में गायब हो जाते थे.. इसलिए दुश्मनो की सेना ने उन्हें पागल सरदार कहना शुरु कर दिया था.. क्योंकि वो 12 बजते ही कहां से औऱ कैसे हमला करेंगे, उन्हें भी इस बात का अदांजा नहीं था। सरदार महिलाओ को बचाने के बाद फिर सीधा मुगलो पर हमला न करके 12 बजे रात में उनके शिविरो पर हमला करने लगे थे। इसलिए जैसी ही 12 बजते,, मुगल सेना थर थर कांपते हुए कहती थी कि 12 बज गए है सरदार आ गए … सावधान हो जाओं।
12 बजे का कनेक्शन असल में सिख धर्म में महिलाओं के प्रति दर्शाये जा रहे सम्मान का प्रतीक है। जो बताते है कि जब बात धर्म की रक्षा की हो, औऱ जब बात नारी के सम्मान की हो तो धर्म बाद में आता है और नारी सम्मान सबसे पहले में। इसके लिए कोई नियम भी तोड़ना पड़े को सिखो को गुरेज नहीं करना चाहिए.. क्योंकि तब महिला सम्मान की रक्षा ही सबसे बड़ा सम्मान है। तो हम उम्मीद करते है कि सरदार क 12 बज गए सुनकर अब आप भी अपमान करने वालो को करारा जवाब दे सकते है। 12 बजना कोई मजाक का नहीं बल्कि बहादुरी औऱ बलिदान का प्रतीक है।






























