Raghav Chadha Join BJP: पुरानी कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं और आम आदमी पार्टी के सात सांसदों का भाजपा की ओर रुख करना इस कहावत को चरितार्थ कर रहा है। राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल और हरभजन सिंह सहित 7 सांसदों का भाजपा में जाना उसी अंदुरुनी कलह का नतीजा है जिसे ‘आप’ लंबे समय से छिपाने की कोशिश कर रही थी।
पिछले काफी समय से सुलग रही अंतर्कलह की आग ने आज ‘आप’ के कुनबे को राख कर दिया। दिल्ली की सत्ता के गलियारों में अब भगवा रंग हावी है। अब जब राजधानी की मखमली गद्दी पर भाजपा का परचम लहराने को तैयार है, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह ‘आप’ के अंत की शुरुआत है?
AAP को झटका
आज 24 अप्रैल 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय एक बड़ा झटका लगा जब उसके 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने सामूहिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का फैसला किया। राघव चड्ढा के नेतृत्व में स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और संजीव अरोड़ा ने पीएम मोदी की कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए ‘आप’ के अपने आदर्शों से भटकने का आरोप लगाया।
क्योकि इस्तीफा देने वाले सांसदों की संख्या कुल संख्या की दो-तिहाई से अधिक है, इसलिए दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत इनकी सदस्यता सुरक्षित रहने की संभावना है। सांसदों का यह सामूहिक विलय न केवल ‘आप’ के कुनबे को कमजोर करता है, बल्कि राज्यसभा में भाजपा की स्थिति को और अधिक मजबूत बनाता है।
राघव चड्डा ने कही ये बात (Raghav Chadha Join BJP)
हम पूर्ण रूप से भाजपा में विलय कर रहे हैं। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वे कड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, जिन्हें लेने से पहले की सरकारें और नेता डरते थे। हम ‘आप’ छोड़कर राष्ट्र निर्माण के इस मिशन का हिस्सा बन रहे हैं और प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में देश सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।
“हम भाजपा में विलय कर रहे हैं। पिछले 12 सालों में भाजपा की केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कई ऐसे फैसले लिए हैं जो कि आज से पहले कई नेता लेने से डरते थे… हम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के लिए काम करेंगे…”
– पूर्व आम आदमी पार्टी नेता राघव चड्ढा ने… pic.twitter.com/G7wqu9Fjl6— Nedrick News (@nedricknews) April 24, 2026
AAP की प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पंजाब की जनता के साथ बड़ा विश्वासघात करार दिया है। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा पर पंजाबियों को धोखा देने का आरोप लगाया, वहीं वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ED और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों का डर दिखाकर विपक्षी दलों को तोड़ रही है ताकि भगवंत मान सरकार के जनहित कार्यों में बाधा डाली जा सके। ‘आप’ नेतृत्व ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब के लोग इन दलबदलू सांसदों को कभी माफ नहीं करेंगे और यह पूरी कवायद राज्य की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की एक सोची-समझी साजिश है।
क्या कहते है राजनीतिक विशेषज्ञ (Raghav Chadha Join BJP)
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राघव चड्ढा जैसे कद्दावर चेहरे और दो-तिहाई सांसदों का एक साथ भाजपा में जाना आम आदमी पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा अस्तित्व का संकट है, जो पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार और विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुँचा सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस विलय से राज्यसभा में संख्या बल का समीकरण पूरी तरह भाजपा के पक्ष में झुक जाएगा, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना सरकार के लिए आसान होगा। कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि 10 में से 7 सांसदों के एक साथ आने से ‘एंटी-डिफेक्शन लॉ’ (दल-बदल विरोधी कानून) बेअसर हो जाएगा, जिससे यह कदम सदस्यता बचाने की एक सोची-समझी संवैधानिक रणनीति नजर आता है।
इसके अलावा पंजाब से ताल्लुक रखने वाले इन सांसदों का विद्रोह न केवल भगवंत मान सरकार के लिए अस्थिरता पैदा कर सकता है, बल्कि यह केजरीवाल के केंद्रीय नेतृत्व और पंजाब गुट के बीच बढ़ती अंदरूनी दूरियों को भी स्पष्ट रूप से उजागर करता है।
पंजाब की सत्ता पर हो सकता है असर
आम आदमी पार्टी के सात सांसदों का यह सामूहिक दलबदल भारतीय राजनीति में एक बड़े शक्ति संतुलन के बदलाव का संकेत है। जहाँ भाजपा ने अपनी रणनीति से राज्यसभा में अपनी पकड़ और भी मजबूत कर ली है, वहीं आम आदमी पार्टी के लिए यह केवल सांसदों का नुकसान नहीं, बल्कि विचारधारा और भरोसे का भी बड़ा संकट है।
राघव चड्ढा जैसे प्रमुख चेहरे का साथ छोड़ना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर पंजाब और दिल्ली के नेतृत्व के बीच दरार गहरी हो चुकी है। ‘एंटी-डिफेक्शन लॉ’ की बारीकियों का इस्तेमाल कर किया गया यह विलय ‘आप’ के भविष्य पर सवालिया निशान लगाता है और यह आने वाले समय में पंजाब की सत्ता के समीकरणों को भी अस्थिर कर सकता है।





























