जिनके शरीर पर है टैटू, उनका ब्लड निकालने से कतराते हैं डॉक्टर्स, जानें ऐसा क्यूं ?

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कई लोगों के अलग अलग शौक होते हैं जिन्हें वे जीते जी पूरा करने की ख्वाहिश रखते हैं. शरीर पर परमानेंट टैटू गुदवाना उन्हीं शौकों में से एक माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आपने शरीर में टैटू गुदवाया हुआ है तो आप ब्लड डोनर नहीं बन सकते हैं. जी हां जरूरत पड़ने पर अगर रक्त दान की नौबत आन पड़े या अपनी स्वेच्छा से आपको ब्लड डोनेट करना हो तो टैटू होने के चलते आप नहीं कर सकते. आइये जानें क्या है इसकी वजह ?

किन लोगों का नहीं हो सकता ब्लड डोनेशन ?

जिनके शरीर पर परमानेंट टैटू गुदा हो वे लोग चाहकर भी ब्लड डोनर नहीं बन सकते. हालांकि मौत के बाद इनके शरीर से ऑर्गन डोनेट किये जा सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि टैटू बनवाने में जिस नीडल का यूज होता है, कई बार वही नीडल टैटू बनवाने वाले व्यक्ति को हेपेटाईटिस का कैरियर बना देती है. यानि इन लोगों में हेपेटाईटिस होता है लेकिन इसके लक्षण दिखना मुश्किल होता है. इन लोगों को HIV होने का खतरा भी रहता है. ऐसे में टैटू बनवाये हुए लोगों का ब्लड निकालना खतरे से खाली नहीं है.

किन लोगों का नहीं हो सकता ऑर्गन डोनेशन ?

ऐसे कई लोग हैं जिनका ब्लड लेने से डॉक्टर्स बचते हैं. इसके अलावा क्रूट्सफेल्ड जेकब रोग (Creutzfeldt-Jakob disease-CJD) से ग्रसित लोगों का भी ऑर्गन डोनेट नहीं किया जा सकता. ऐसे लोगों का अंग किसी दूसरे के शरीर में नहीं लगाया जा सकता. क्योंकि ये रोग टिश्यूज के जरिये दूसरे व्यक्ति में फ़ैल सकता है. साथ ही इबोला वायरस डिजीज, ऐक्टिव कैंसर और एचआईवी से इंफेक्टेड लोगों को भी अंग दान के दायरे से बाहर रखा जाता है. ये बीमारियां डोनर के शरीर की सेल्स और टिश्यू को भी संक्रमित कर सकती हैं.

डेथ के बाद कब तक कर सकते हैं ऑर्गन डोनेट ?

मृत्यु के बाद इंसान के शरीर के अंग कई घंटों तक जीवित रहते हैं. इस दौरान अगर उन अंगों को निकाल कर किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में लगा दिया जाए तो उसे जीवनदान मिल सकता है. सबसे कम देर तक जो अंग शरीर में जीवित रहते हैं उनमें आखें शामिल हैं. वहीं सबसे ज्यादा देर तक इंसान की किडनी जीवित रहती है. जिसे किसी के शरीर में डाला जा सकता है.

इसके अलावा हार्ट 4 से 6 घंटा, लंग 4 से 6 घंटा, किडनी 48 से 72 घंटे, लीवर 12 से 24 घंटे, पैंक्रियाज 12 से 18 घंटे, आंत 6 से 12 घंटे, जबकि आंखें 4 से 6 घंटे के बीच मरने वाले के शरीर से निकाल देनी चाहिए. ऐसा नहीं है कि एक व्यक्ति की आंखें सिर्फ एक ही व्यक्ति को रोशनी दे सकती हैं. बल्कि एक व्यक्ति के कॉर्निया से 3 से 4 लोगों की जिंदगी को रोशन किया जा सकता है.

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