Delhi pollution control action: राजधानी दिल्ली में सर्दियों की आहट के साथ ही हवा में घुलने वाले जहर यानी प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। इस बार सरकार का रुख थोड़ा अलग है प्रदूषण के चरम पर पहुंचने और हालात बेकाबू होने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही रोक-टोक और कड़े इंतजामों पर जोर दिया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने ‘विंटर एक्शन प्लान 2026-27’ का पूरा खाका तैयार कर लिया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने साफ किया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि तकनीक, सख्त नियमों और जनता की भागीदारी के दम पर इस चुनौती का सामना करने जा रही है।
दिल्ली में 30% स्थानीय धुआं, बाकी NCR से: समन्वय पर जोर| Delhi pollution control action
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और आला अधिकारी शामिल हुए। बैठक में आंकड़ों के जरिए बताया गया कि दिल्ली की खराब हवा में करीब 30 फीसदी हिस्सा शहर के अपने अंदरूनी स्रोतों से आता है, जबकि 60 से 65 फीसदी प्रदूषण आसपास के एनसीआर (NCR) क्षेत्रों से पहुंचता है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार अपने अधिकार क्षेत्र के हर एक प्रदूषण स्रोत पर पूरी सख्ती से शिकंजा कसेगी, लेकिन हवा को वास्तव में सांस लेने लायक बनाने के लिए पूरे एनसीआर में एक साथ मिलकर ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ और पेट्रोल पंपों पर सख्त पहरा
वाहनों से निकलने वाले धुएं को रोकने के लिए दिल्ली के 500 पेट्रोल पंपों पर ‘No PUCC, No Fuel’ का नियम मिशन मोड में सख्ती से लागू किया जाएगा। यानी बिना वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के गाड़ियों को तेल नहीं मिलेगा। इसके अलावा, अपनी उम्र पूरी कर चुके पुराने वाहनों (End-of-Life Vehicles) को सड़कों से हटाने के लिए एएनपीआर (ANPR) कैमरों की मदद से ऑटोमैटिक ट्रैकिंग और कार्रवाई होगी।
दिल्ली में इस वक्त तीन ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन काम कर रहे हैं, जिनकी क्षमता हर साल 2.44 लाख कमर्शियल गाड़ियों की फिटनेस जांचने की है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को रफ्तार: मेट्रो और बसों की सवारी बढ़ाने का लक्ष्य
सड़कों पर निजी गाड़ियों की भीड़ कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को पूरी ताकत दी जा रही है।
- राजधानी में बसों का बेड़ा बढ़कर अब 6,840 हो चुका है, जिसमें 5,088 पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसें हैं।
- सभी 228 मेट्रो स्टेशनों पर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया है।
- सरकार का लक्ष्य दिल्ली मेट्रो के दैनिक यात्रियों की संख्या को 65 लाख से बढ़ाकर 72 लाख और डीटीसी बसों के यात्रियों को 37 लाख से बढ़ाकर 42 लाख प्रतिदिन तक ले जाने का है।
- इसके अलावा ‘दिल्ली मेट्रो सारथी ऐप’, कार-पूलिंग और शेयर्ड ट्रांसपोर्ट को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
50% वर्क फ्रॉम होम और दफ्तरों के अलग-अलग समय
सड़कों पर एक साथ वाहनों का दबाव और जाम रोकने के लिए ऑफिस टाइमिंग में बड़ा फेरबदल करने की तैयारी है।
- नगर निगम (MCD) के दफ्तर सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुलेंगे।
- दिल्ली सरकार (GNCTD) के कार्यालय सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक काम करेंगे।
- इसके साथ ही सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति 50 फीसदी तक सीमित रखने और बाकी 50 फीसदी को वर्क फ्रॉम होम (WFH) देने की योजना बनाई गई है, ताकि पीक आवर्स में गाड़ियों का धुआं कम से कम हो।
धूल नियंत्रण और ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स पर एक्शन
प्रदूषण फैलाने वाले हर हॉटस्पॉट के 3 किलोमीटर के दायरे को कवर करते हुए स्पेशल प्लान बनाया गया है। ट्रैफिक जाम वाले 62 प्रमुख पॉइंट्स में से 42 का समाधान निकाल लिया गया है। वहीं 15 सिग्नल-फ्री रास्तों में से 8 का काम पूरा हो चुका है और बचे हुए 7 स्ट्रेच अक्टूबर 2026 तक पूरे कर लिए जाएंगे।
सड़क की उड़ती धूल पर लगाम लगाने के लिए इस साल रिकॉर्ड 3,065 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य रखा गया है, जबकि सामान्य तौर पर हर साल केवल 1,000 किलोमीटर का काम होता है। 20 सितंबर तक 1,193 किलोमीटर का काम निबटाया जा चुका है और बाकी 1,872 किलोमीटर पर तेजी से काम चल रहा है।














































