कभी तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा बने थे मिथुन, इस घोटाले में आया नाम और फिर…ऐसा रहा TMC से बीजेपी तक का सियासी सफर

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 07 मार्च 2021, 12:00 AM 🔄 Updated: 07 मार्च 2021, 12:00 AM
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पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत चरम पर पहुंची हुई है। आज बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैली करने जा रहे हैं। पीएम मोदी की ये रैली कई मायनों में खास होने जा रही है। बॉलीवुड एक्टर मिथुन चक्रवर्ती भी इस रैली में पीएम मोदी के साथ नजर आएंगे। इस दौरान वो बीजेपी ज्वॉइन करने की पूरी संभावनाएं है। वैसे तो मिथुन चक्रवर्ती के बीजेपी में जाने की आशंकाएं तभी से लगाई जाने लगी थी, जब वो बीते दिनों RSS प्रमुख मोहन भागवत से मिले थे।

बीजेपी के होंगे मिथुन चक्रवर्ती

हालांकि ऐसा नहीं है कि मिथुन चक्रवर्ती अब राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं। उनकी सियासी पारी तो 2011 में ही शुरू हो गई थीं। इस दौरान वो तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा बन गए थे, लेकिन बाद में उन्होनें राजनीति से संन्यास भी ले लिया था। हालांकि इसके बाद अब मिथुन बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं। फिल्मों में तो मिथुन का खूब सिक्का चला, लेकिन राजनीति में वो अब तक कमाल नहीं दिखा पाए। आइए आज एक नजर डालते हैं मिथुन चक्रवर्ती के सियासी सफर पर…

कभी लेफ्टिस्ट थे मिथुन…

जवानी के दिनों में तो मिथुन चक्रवर्ती लेफ्ट से जुड़े हुए थे। वो कई बार खुद को लेफ्टिस्ट बताते थे। मिथुन बंगाल के खेल मंत्री और वरिष्ठ वामपंथी नेता सुभाष चक्रवर्ती के करीबी रहे हैं। जब मिथुन को ममता बनर्जी सरकार के दौरान TMC में हिस्सा बनने का निमंत्रण मिला, तो उन्होनें इसे स्वीकार लिया। जब 2011 में बंगाल की सत्ता ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के हाथों में गई, तो पार्टी ने मिथुन को राजनीति से जोड़ा। उनको TMC ने राज्यसभा से सांसद भी बनाया। लेकिन 2016 में मिथुन ने ही उन्होनें इस्तीफा दे दिया था। अपनी सेहत का हवाला देते हुए राजनीति छोड़ दी थीं। वो 2014 से 2016 तक TMC की तरफ से राज्यसभा के सांसद रहे।

शारदा चिटफंड में आया नाम और फिर…

राजनीति से अलग होने की मिथुन की शुरुआत तो उसी वक्त हो गई थीं, जब शारदा चिटफंड घोटाले में उनका नाम आ। दरअसल, शारदा चिटफंड कंपनी के मिथुन ब्रांड एंबेडसर थे। इस घोटाले को लेकर ED उनसे पूछताछ भी कर चुकी है। शारदा चिटफंड में नाम आने के बाद मिथुन ने एक करोड़ बीस लाख के करीब रुपये लौटा दिए। ये पैसा उन्होनें ये कहकर वापस किया कि वो किसी के साथ भी फर्जीवाड़ा नहीं करना चाहते। इसके बाद से ही ऐसी संभावनाएं जताए जाने लगी थीं कि मिथुन राजनीति से अलग हो जाएंगे।

अब मिथुन बीजेपी का हिस्सा बनकर अपनी सियासी पारी को दोबारा से शुरू कर सकते हैं। बंगाल चुनाव से ठीक पहले वो पार्टी का हिस्सा बन रहे हैं। उनके बीजेपी में जाने से चुनावों पर क्या असर पड़ता है, ये देखना दिलचस्प होगा।

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