पुलिस कमिश्नर सिस्टम: क्या होती है ये प्रणाली, जानिए कैसे बढ़ जाती है इससे पुलिस की पॉवर?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 13 अगस्त 2021, 05:30 AM Updated: 13 अगस्त 2021, 05:30 AM
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ऐसी चर्चाएं चल रही है कि लखनऊ, नोएडा, वाराणसी और कानपुर के बाद अब कुछ और शहरों में भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होगा। ये शहर वो होंगे जिनकी आबादी 10 लाख से ज्यादा है। इनमें  गाजियाबाद, प्रयागराज, आगरा और मेरठ जैसे शहर शामिल हैं, जहां यूपी की योगी सरकार कमिश्नर प्रणाली लागू करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं। 

सबसे पहले यूपी के लखनऊ और नोएडा में कमिश्नर सिस्टम को लागू किया गया था, जिसकी सफलता के बाद इसे राज्य के दो और शहरों वाराणसी और कानपुर में भी लाया गया। अब इसके बाद धीरे धीरे योगी सरकार की प्लानिंग इसे दूसरे शहरों में भी लागू करने की है। ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि आखिर ये पुलिस कमिश्नर प्रणाली है क्या? इससे राज्य की कानून व्यवस्था पर क्या फर्क पड़ता है? आइए जानते हैं इसके बारे में…

क्या होती है पुलिस कमिश्नर प्रणाली?

इसके बारे में अगर हम आपको आसान भाषा में समझाने की कोशिश करें, तो इसका यही मतलब है कि कमिश्नर प्रणाली के लागू होने पुलिस के अधिकार काफी बढ़ जाते हैं। दरअसल, कोई भी फैसला लेने के लिए पुलिस अधिकारी स्वतंत्र नहीं होते। कोई आकस्मिक परिस्थिति आ जाती है, तो डीएम, मंडल कमिश्नर या शासन के आदेश पर ही काम करना होता है। लेकिन कमिश्नर सिस्टम लागू होने पर ऐसा नहीं होता। इसके लागू होने से कानून व्यस्था से जुड़े तमाम मुद्दों पर पुलिस कमिश्नर को फैसले लेने का अधिकार मिल जाता है। 

कमिश्नर सिस्टम आजादी से पहले का है। अंग्रेजों के जमाने में ये प्रणाली कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में लागू थी। इस सिस्टम में पूरी ज्यूडिशियल पावर कमिश्नर के पास होती है। ये व्यवस्था पुलिस प्रणाली अधिनियम, 1861 पर आधारित है।

कैसे बढ़ जाती है पुलिस की ताकत?

कमिश्नर सिस्टम लागू होने से पुलिस के अधिकार बढ़ जाते हैं। कोई भी इमरजेंसी सियुएशन आती है, तो उससे निपटने के लिए पुलिस को डीएम या फिर दूसरे अधिकारियों के फैसला का इंतेजार नहीं करना पड़ता। इन हालातों में वो खुद फैसले लेने में सक्षम हो जाती है। जिले की कानून व्यवस्था से जुड़े सारे फैसलों को लेने का अधिकार भी कमिश्नर को मिल जाता हैं। किसी धरना प्रदर्शन की इजाजत देने से लेकर दंगों के दौरान लाठीचार्ज, बल प्रयोग समेत कई फैसले पुलिस ले सकती है। साधारण शब्दों में कहें तो पुलिस कमिश्नर सिस्टम में CRPC के सारे अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाते हैं। 

ऐसे में पुलिस तुरंत ही कोई कार्रवाई कर सकती है। व्यवस्था के लागू होने से पॉवर कमिश्नरके हाथों में चली जाती है। धारा-144 लगाने, कर्फ्यू लगाने, 151 में गिरफ्तार करने, 107/16 में चालान करने जैसे कई अधिकार सीधे पुलिस ले सकती है। 

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