Kanpur News: एक जैसे चेहरे ही नहीं, फिंगरप्रिंट भी सेम! कानपुर का अनोखा मामला, विज्ञान हैरान

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 15 दिसम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 24 दिसम्बर 2025, 12:24 PM
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Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों के साथ-साथ विज्ञान के जानकारों को भी सोच में डाल दिया है। विज्ञान अब तक यही मानता आया है कि दुनिया में किसी भी दो इंसानों के फिंगरप्रिंट और आंखों की रेटिना एक जैसी नहीं हो सकतीं, लेकिन कानपुर के नौबस्ता इलाके में रहने वाले पवन मिश्रा के जुड़वां बेटे इस धारणा को चुनौती देते नजर आ रहे हैं।

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पवन मिश्रा के बेटे प्रबल और पवित्र जुड़वां हैं और शक्ल-सूरत में तो बिल्कुल एक जैसे हैं ही, अब उनके फिंगरप्रिंट और रेटिना भी बायोमीट्रिक जांच में पूरी तरह एक जैसे पाए गए हैं। इसी वजह से दोनों बच्चों के आधार कार्ड को अपडेट कराना उनके परिवार के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।

आधार अपडेट बना सिरदर्द- Kanpur News

पवन मिश्रा बताते हैं कि उनके दोनों बेटों का जन्म 10 जनवरी 2015 को हुआ था। जन्म के कुछ ही महीनों बाद उनका आधार कार्ड बन गया था, लेकिन जब करीब दस साल बाद आधार अपडेट कराने की जरूरत पड़ी, तब समस्या सामने आई। आधार सेंटर पर बायोमीट्रिक अपडेट कराने के बाद दोनों बच्चों के आधार कार्ड तो डाउनलोड हो गए, लेकिन जैसे ही राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए ई-केवाईसी कराई गई, गड़बड़ी शुरू हो गई।

पवन के मुताबिक, जब बेटे प्रबल की ई-केवाईसी कराई गई तो उसका आधार सक्रिय हो गया, लेकिन उसी वक्त दूसरे बेटे पवित्र का आधार कार्ड निरस्त दिखाने लगा। जब पवित्र का आधार अपडेट कराया गया, तो प्रबल का आधार निष्क्रिय हो गया। यह सिलसिला तीन-चार बार दोहराया गया, जिससे परिवार काफी परेशान हो गया।

तकनीक या विज्ञान, कौन जिम्मेदार?

जब सितंबर में पवन मिश्रा दोबारा आधार सेंटर पहुंचे, तब कर्मचारियों ने उनसे दोनों बच्चों की जन्म तिथि पूछी। यहीं उन्हें पहली बार बताया गया कि दोनों बच्चों के फिंगरप्रिंट और रेटिना इतने ज्यादा मिलते-जुलते हैं कि सिस्टम उन्हें अलग-अलग व्यक्ति के रूप में पहचान नहीं पा रहा है।

विज्ञान के जानकार इस मामले को भारत में बेहद दुर्लभ और पहला मामला मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जुड़वां बच्चों में फिंगरप्रिंट पैटर्न 55 से 74 प्रतिशत तक मिल सकता है, लेकिन पूरी तरह समान होना बेहद असामान्य है। कुछ विशेषज्ञों ने यह सवाल भी उठाया है कि कहीं आधार बायोमीट्रिक अपडेट की तकनीक मामूली अंतर को पहचानने में सक्षम नहीं है।

आधार विभाग ने शुरू की जांच

मामला सामने आने के बाद आधार रीजनल ऑफिस ने इसे गंभीरता से लिया है। आधार के डिप्टी डायरेक्टर प्रशांत कुमार ने साफ कहा कि सामान्य स्थिति में दो लोगों के फिंगरप्रिंट और रेटिना एक जैसे नहीं हो सकते। उन्होंने बताया कि इस मामले की गहराई से जांच कराई जाएगी।

इसके लिए पवन मिश्रा को उनके दोनों बेटों के साथ कानपुर के माल रोड स्थित क्लाउड हाउस में मौजूद आधार रीजनल ऑफिस बुलाया गया है। यहां हाई-टेक मशीनों की मदद से बच्चों के फिंगरप्रिंट और रेटिना का दोबारा परीक्षण किया जाएगा, ताकि महीन से महीन अंतर को भी पढ़ा जा सके।

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