Kajol News: अभिनेत्री काजोल ने हाल ही में अपनी बेटी Nysa Devgan के साथ रिश्ते और पेरेंटिंग के अनुभवों को लेकर बेहद ईमानदारी से बात की है। एक इंटरव्यू में उन्होंने खुलकर बताया कि टीनएज के शुरुआती सालों में मां और बेटी के बीच काफी टकराव हुआ करता था और उस दौर ने उनके रिश्ते को काफी चुनौतीपूर्ण बना दिया था।
12 साल की उम्र से शुरू हुआ टकराव | Kajol News
काजोल ने बताया कि जब नीसा लगभग 12 साल की हुईं, तभी से घर में छोटी-छोटी बातों पर बहस और झगड़े शुरू हो गए थे। इस उम्र में बच्चों में हार्मोनल बदलाव, भावनात्मक अस्थिरता और खुद को स्वतंत्र रूप से साबित करने की इच्छा बढ़ जाती है, और यही चीजें उनके रिश्ते में भी देखने को मिलीं।
उन्होंने साफ कहा कि उस समय अक्सर हालात इतने टेंशन वाले हो जाते थे कि दोनों तरफ से इमोशनल और कभी-कभी बिना वजह के रिएक्शन आने लगते थे।
तीन साल तक चला मुश्किल दौर
काजोल के मुताबिक यह मुश्किल दौर लगभग तीन साल तक चला। इस दौरान कई बार ऐसा हुआ कि मां और बेटी एक-दूसरे की बात सुनने को तैयार नहीं होते थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह खुद भी कई बार गुस्से में बहुत सख्त हो जाती थीं, जिससे रिश्ते में और दूरी बढ़ जाती थी।
यह समय उनके लिए भावनात्मक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि एक तरफ पेरेंटिंग की जिम्मेदारी थी और दूसरी तरफ एक बढ़ते हुए बच्चे को समझने की कोशिश।
पेरेंटिंग अप्रोच में बड़ा बदलाव
काजोल ने बताया कि एक समय के बाद उन्होंने खुद को रोकने और स्थिति को नए नजरिए से देखने का फैसला किया। उन्हें एहसास हुआ कि सिर्फ डांटना या कंट्रोल करना समाधान नहीं है, बल्कि धैर्य और समझदारी ज्यादा जरूरी है। इसके बाद उन्होंने अपनी पेरेंटिंग स्टाइल बदल दी। उन्होंने तय किया कि अब वह बहस के बजाय अपनी बेटी से ज्यादा बातचीत करेंगी, उसे समझने की कोशिश करेंगी और सबसे अहम उसकी बात ध्यान से सुनेंगी।
सुनने और स्पेस देने से बदला रिश्ता
काजोल ने कहा कि धीरे-धीरे उन्हें यह समझ आने लगा कि बच्चों को सिर्फ सलाह नहीं चाहिए होती, बल्कि उन्हें सुने जाने और अपनी बात रखने की आजादी भी चाहिए होती है। जब उन्होंने नीसा को खुलकर बोलने का मौका देना शुरू किया, तो रिश्ते में बड़ा बदलाव आया। अब उनकी बातचीत पहले से ज्यादा खुली, लंबी और समझदारी भरी होने लगी है।
कंट्रोल छोड़ना बना सबसे बड़ा सबक
काजोल ने यह भी माना कि पेरेंटिंग का सबसे बड़ा सबक उनके लिए यह रहा कि हर चीज को कंट्रोल करने की जरूरत नहीं होती। बच्चों को अपना रास्ता खुद समझने देना भी जरूरी है, बस माता-पिता का समर्थन और भरोसा बना रहना चाहिए। इस सोच ने उनके रिश्ते को काफी मजबूत बना दिया।
आज कैसा है मां-बेटी का रिश्ता
आज काजोल और नीसा के बीच रिश्ता पहले से काफी बेहतर हो चुका है। दोनों अब ज्यादा सहज हैं और एक-दूसरे के साथ खुलकर बात कर पाती हैं। जो दूरी कभी बढ़ गई थी, वह अब काफी हद तक कम हो चुकी है।
पहले भी सामने आया था मुश्किल दौर
काजोल ने इससे पहले भी एक इंटरव्यू में बताया था कि नीसा के टीनएज के शुरुआती दौर में हालात काफी मुश्किल थे। एक बार तो गुस्से में उन्होंने नीसा का नया फोन भी तोड़ दिया था। बाद में उन्होंने इसे “कठोर प्यार” बताते हुए कहा कि कभी-कभी माता-पिता को सख्त होना पड़ता है, लेकिन समय के साथ समझदारी ज्यादा जरूरी हो जाती है।




























