भारत की कूटनीति से हिला तुर्की? PM मोदी और साइप्रस राष्ट्रपति की मुलाकात बनी चर्चा का केंद्र| India Cyprus relations news

Nandani | Nedrick News Ghaziabad Published: 24 May 2026, 11:32 AM | Updated: 24 May 2026, 11:32 AM

India Cyprus relations news: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही अपने पांच देशों के दौरे से भारत लौटे, वैसे ही एक अहम विदेशी मेहमान उनसे मिलने पहुंच गया। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके पीछे बड़े रणनीतिक और भू-राजनीतिक संकेत देखे जा रहे हैं। पीएम मोदी से मिलने वाले नेता थे साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिड्स, जिनकी भारत यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

दरअसल, साइप्रस ऐसा देश है जो लंबे समय से तुर्की के साथ तनावपूर्ण रिश्तों से जूझ रहा है। वहीं तुर्की लगातार पाकिस्तान के समर्थन और कश्मीर मुद्दे पर भारत विरोधी बयान देता रहा है। ऐसे में साइप्रस और भारत की बढ़ती नजदीकियों को बेहद अहम माना जा रहा है।

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तुर्की की ‘ब्लू होमलैंड’ नीति से बढ़ी चिंता| India Cyprus relations news

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की जल्द ही अपनी चर्चित “ब्लू होमलैंड” नीति को कानूनी रूप देने की तैयारी में है। इस नीति का मकसद भूमध्यसागर यानी मेडिटरेनियन क्षेत्र में समुद्री इलाकों और प्राकृतिक संसाधनों पर अपना प्रभाव बढ़ाना माना जाता है। साइप्रस का आरोप है कि तुर्की इस नीति के जरिए उसके गैस भंडारों और समुद्री सीमाओं पर दावा ठोकना चाहता है। यही नहीं, साइप्रस को डर है कि तुर्की रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वही इलाका है जहां से भारत, इजराइल और यूरोप को जोड़ने वाले संभावित IMEC कॉरिडोर का रास्ता गुजरता है। इस वजह से यह क्षेत्र भारत के लिए भी रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

साइप्रस के समर्थन में खुलकर बोले पीएम मोदी

भारत पहले भी साइप्रस की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की बात करता रहा है। पिछले साल 16 जून को जब पीएम मोदी साइप्रस गए थे, तब राष्ट्रपति निकोस उन्हें उस इलाके के करीब भी लेकर गए थे, जिस पर तुर्की का कब्जा बताया जाता है। गौरतलब है कि जिस तरह पाकिस्तान ने कश्मीर के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है, उसी तरह तुर्की पर भी साइप्रस के उत्तरी हिस्से के करीब 35 प्रतिशत इलाके पर कब्जे का आरोप लगता रहा है। ऐसे में जब भारत ने सार्वजनिक तौर पर साइप्रस की संप्रभुता का समर्थन किया, तो तुर्की में इसे लेकर काफी नाराजगी देखने को मिली थी।

अब भारत यात्रा के दौरान साइप्रस के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के साथ खड़े होकर कहा कि उनका देश भारत के समर्थन के लिए आभारी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता दिए जाने की भी खुलकर वकालत की।

मेडिटरेनियन क्वाड की चर्चा तेज

इस मुलाकात के बाद एक और बड़ी चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। खबरें हैं कि तुर्की के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए साइप्रस, भारत, इजराइल और ग्रीस के बीच एक नए रणनीतिक समूह पर बातचीत चल रही है, जिसे अनौपचारिक तौर पर “मेडिटरेनियन क्वाड” कहा जा रहा है। हालांकि अभी तक इसको लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों को देखते हुए इन देशों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

भारत के लिए क्यों अहम है साइप्रस?

साइप्रस आकार में छोटा देश जरूर है, लेकिन यूरोप और मेडिटरेनियन क्षेत्र में उसकी रणनीतिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऊर्जा, समुद्री व्यापार और यूरोप से कनेक्टिविटी के लिहाज से भी यह क्षेत्र भारत के लिए खास मायने रखता है। ऐसे में पीएम मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति की यह मुलाकात सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का संकेत मानी जा रही है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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