भारत के पांचवे प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की है जयंती, जानिए क्यों कहलाए जाते हैं “किसानों का मसीहा”

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 23 दिसम्बर 2020, 12:00 AM 🔄 Updated: 23 दिसम्बर 2020, 12:00 AM
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डॉ. अंबेडकर और सरदार पटेल के बाद पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ऐसे तीसरे महापुरुष हैं जिन्हें अपने विचारों के लिए जीवनकाल में उतनी स्वीकार्यता और प्रसिद्धि नहीं मिली जितनी उनके निधन के बाद प्राप्त हुई. आज यानी 23 दिसंबर, शुक्रवार को देश के 5वें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती है और इनकी स्मृति में राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है, तो आइए आपको पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बारे में बताते हैं…

पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों की आवाज बुलंद करने वाले प्रखर नेता चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसबंर 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर ग्राम में हुआ था. एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में जन्में चौधरी चरण सिंह का का परिवार जाट पृष्ठभूमि वाला था. इन्होंने 28 जुलाई, 1979 से 14 जनवरी, 1980 तक प्रधानमंत्री का पद संभाला था.

किसानों के कहलाए जाते थे मसीहा

अंग्रेजों की गुलामी में भी चौधरी चरण सिंह ने भारत के किसानों का कर्ज माफ कराने का दम रखा, इन्होंने खेतों की नीलामी और जमीन इस्तेमाल का बिल तैयार करवाया था. जिसके चलते इन्हें “किसानों का मसीहा” भी कहा जाता है. बता दें कि साल 1979 में उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के तौर पर चरण सिंह ने प्रस्तुत अपने बजट में 25 हजार गांवों के विद्युतीकरण को अनुमति दी थी.

साल 1937 में जब भारत में अंतरिम सरकार बनी तो उस दौरान चरण सिंह भी विधायक बने थे. साल 1939 में सरकार में रहते हुए उन्होंने कर्जमाफी विधेयक पास करवाया था. ये पहले ऐसे नेता रहे जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत से कर्जमाफी करवाई थी.

अगर बात करें चौधरी चरण सिंह की पढ़ाई की तो इन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से कानून की शिक्षा प्राप्त कर साल 1928 में गाजियाबाद में वकालत शुरू की. उसके बाद इनकी शादी गायत्री देवी से हुई थी.

संसद का नहीं किया सामना

जुलाई 1979 में चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री बने, वो बात अलग है कि बाद में इंदिरा गांधी ने अपना समर्थन वापस ले लिया और उनकी सरकार भी गिरी. जिसके चलते इतिहास में ये भी दर्ज है कि चरण सिंह एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्हें कभी संसद का सामना नहीं कर पड़ा था.

वहीं, चरण सिंह को लेकर एक और बड़ी बात ये है कि वो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मानने वाले लेकिन नेहरू के प्रतिस्पर्धी थे. वो अपने आपको कभी भी किसी से कम नहीं समझते थे. 85 साल की उम्र में 29 मई, 1987 को किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह ने अलविदा कह दिया. इतिहास के पन्नों में चौधरी चरण सिंह का नाम प्रधानमंत्री से ज्यादा एक किसान नेता के तौर पर जाना जाता है.

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