Sansad March: संसद के मानसून सत्र के पहले दिन देश की राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। दिल्ली का जंतर-मंतर CJP के प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं की हुंकार से गूंज रहा है, जो संसद कूच की तैयारी में हैं। दूसरी ओर, सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया है।
ऐसे संवेदनशील माहौल में जब आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है, तब इस ‘संसद चलो’ मार्च की दिशा क्या होगी? क्या कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच यह छात्र आंदोलन अपनी आवाज सत्ता के गलियारों तक पहुंचा पाएगा, या प्रशासन की सख्ती इस पर भारी पड़ेगी? चलिए इस लेख के जरिए पूरी स्थिति का निष्पक्ष विश्लेषण करते हैं।
सोशल मीडिया पर दिखा छात्रों का आक्रोश
आज सोशल मीडिया का हर प्लेटफॉर्म छात्रों के इस व्यापक संघर्ष की गवाही दे रहा है। देश का युवा वर्ग अब शांत बैठने के मूड में नहीं है और अपने अधिकारों के लिए सड़कों से लेकर इंटरनेट तक आवाज बुलंद कर रहा है।
देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित धांधली के खिलाफ पिछले करीब 20 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर सफदरजंग अस्पताल शिफ्ट किए जाने की घटना ने आंदोलन की आग में घी का काम किया है। आंदोलनकारियों ने इसे पुलिसिया सख्ती और जबरन की गई कार्रवाई बताया है, जिसने छात्रों ही नहीं, बल्कि आम जनता के एक बड़े हिस्से में गहरा आक्रोश भर दिया है।
Sansad March को लेकर धारा 163 लागू
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि नई दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पहले की धारा 144 CrPC) लागू कर दी गई है। इसके तहत जंतर-मंतर के निर्धारित स्थल को छोड़कर 5 या अधिक लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने या सभा करने पर पूरी तरह रोक है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में 5000 से अधिक दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ की 25 बटालियन) के जवान तैनात किए गए हैं।
सुरक्षा के लिहाज से नई दिल्ली को 15 विशेष सुरक्षा जोन में बांटा गया है। सेंट्रल विस्टा, पार्लियामेंट स्ट्रीट और संवेदनशील मेट्रो स्टेशनों पर रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात हैं। प्रदर्शन स्थल पर पारदर्शिता के लिए पुलिसकर्मी 270 बॉडी-वर्न कैमरों से लैस हैं और पूरे इलाके की सघन वीडियोग्राफी की जा रही है।
इस्तीफे की मांग और प्रदर्शनकारियों का दावा
- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग: सीजेपी (CJP) द्वारा यह मार्च (Sansad March) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित अनियमितताओं के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया है।
- भारी भीड़ का दावा: पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और संस्थापक अभिजीत दिपके के अनुसार, जंतर-मंतर और उसके आसपास हजारों की संख्या में समर्थक रात से ही एकत्रित हो चुके हैं।
- संसद कूच का संकल्प: प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि वे अपने हक की आवाज उठाने के लिए संसद की तरफ जरूर बढ़ेंगे और उन्हें कोई नहीं रोक सकता।
दिल्ली पुलिस की एडवाइजरी और चेतावनी
दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर साफ चेतावनी दी है कि बिना अनुमति के किसी भी तरह का मार्च या जुलूस निकालना कानून का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसा करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, नई दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास के रास्तों पर आवाजाही प्रभावित रहने की आशंका को देखते हुए, पुलिस ने आम जनता को इन मार्गों से बचने और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।






























