Chinta Devi Success Story: चिंता देवी,  झारखंड की एक महिला उद्यमिता की मिसाल, बम्बू हैंडीक्राफ्ट से बना रही हैं आत्मनिर्भरता की राह

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 11 जून 2025, 05:30 AM Updated: 11 जून 2025, 05:30 AM
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Chinta Devi Success Story: आज की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रही हैं। वे घर के कामकाज के साथ-साथ खुद का बिजनेस भी चला रही हैं। झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड की निवासी चिंता देवी इस बात का उदाहरण हैं। अपनी मेहनत, हुनर और सही दिशा में काम करके उन्होंने अपने जीवन में सफलता हासिल की है। चिंता देवी बम्बू हैंडीक्राफ्ट, जुट के डिजाइनर बैग्स, थैले, एंब्रायडरी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने के कारोबार से अच्छी कमाई कर रही हैं और दूसरों को भी इस दिशा में प्रेरित कर रही हैं।

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चिंता देवी की ट्रेनिंग यात्रा- Chinta Devi Success Story

चिंता देवी ने अपने काम की शुरुआत 2007 में की थी। वह 2012 तक बम्बू हैंडीक्राफ्ट की ट्रेनिंग लेने के लिए विभिन्न स्थानों पर गईं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प के बारे में सीखा और धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अपने कौशल को निखारा। उनकी मेहनत और हुनर ने उन्हें सिर्फ खुद के लिए बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रास्ते खोले। अब तक उन्होंने 200 से अधिक महिलाओं को ट्रेनिंग दी है, जिनकी मदद से वे भी आत्मनिर्भर बन सकी हैं। वर्तमान में, चिंता देवी और उनकी 30 सहकर्मियों के साथ एक कुटीर उद्योग चला रही हैं, जहां बम्बू हैंडीक्राफ्ट से लेकर एंब्रायडरी, थैले और आर्टिफिशियल ज्वेलरी तक तैयार की जाती है।

चिंता देवी के द्वारा बनाए गए उत्पाद और उनकी कीमतें

चिंता देवी के कुटीर उद्योग में कई आकर्षक और उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं। इनमें से कुछ सबसे सस्ता पेन स्टैंड है, जिसकी कीमत मात्र 50 रुपये है। वहीं, सबसे महंगा उत्पाद टाइटैनिक की प्रतिकृति है, जिसकी कीमत 2500 रुपये है। टाइटैनिक बनाने में लगभग 5 दिन का समय लगता है और इसे बम्बू के साथ विभिन्न अन्य सामग्रियों से तैयार किया जाता है। उनके द्वारा बनाए गए उत्पाद सिर्फ झारखंड में ही नहीं, बल्कि अहमदाबाद, दिल्ली, और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी भेजे जाते हैं। इस कुटीर उद्योग ने न केवल चिंता देवी को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि इससे जुड़ी महिलाओं को भी रोजगार के अवसर दिए हैं।

जेएसएलपीएस का सहयोग

चिंता देवी की सफलता के पीछे जेएसएलपीएस (झारखंड राज्य लिवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) का बड़ा योगदान है। उन्होंने शुरूआत में ट्रेनिंग लेकर इस काम को शुरू किया और बाद में जेएसएलपीएस से जुड़ीं। जेएसएलपीएस ने उन्हें न केवल वित्तीय सहायता दी, बल्कि महिलाओं को कौशल विकास के लिए भी प्रेरित किया। इस सरकारी सहयोग ने चिंता देवी की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया। अब वह अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग कर रही हैं और अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं।

स्थानीय कच्चा माल और बड़े शहरों तक पहुंच

चिंता देवी की कड़ी मेहनत का परिणाम यह है कि उनके द्वारा बनाए गए उत्पाद अब झारखंड के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में जा रहे हैं। गिरिडीह जिले में बांस का कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होता है, जबकि एंब्रायडरी और जुट के बैग्स के लिए कच्चा माल कोलकाता और असम से आता है। इस व्यापार ने न केवल स्थानीय उद्योग को बढ़ावा दिया है, बल्कि यह देश के विभिन्न हिस्सों में भी प्रचलित हो रहा है।

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