CBI Operation Chakra VI: देशभर में मासूम लोगों को डरा-धमकाकर करोड़ों की चपत लगाने वाले ‘डिजिटल अरेस्ट’ गिरोह के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपना शिकंजा और कस दिया है। एजेंसी ने अपने विशेष अभियान ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ के तहत कार्रवाई करते हुए 5 और आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। इससे पहले इस नेटवर्क से जुड़े 3 लोगों को पकड़ा गया था। अब इस पूरे मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 8 हो गई है।
CBI की यह तेज कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद शुरू हुई है। देश की शीर्ष अदालत ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए बढ़ रहे साइबर क्राइम के खतरनाक स्तर पर गहरी चिंता जताई थी और सीबीआई को इस सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ने का सख्त निर्देश दिया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की थी।
बिट्स पिलानी से लेकर गुजरात और कर्नाटक तक अरबों का खेल| CBI Operation Chakra VI
CBI की जांच का दायरा मुख्य रूप से तीन बड़े मामलों पर टिका है, जिनमें पीड़ितों को कई-कई हफ्तों तक बंधक बनाकर भारी-भरकम रकम वसूली गई:
- बिट्स पिलानी मामला: यहां एक पीड़ित को फर्जी पुलिस अफसर बनकर डराया गया और 3 महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। इस दौरान उससे 10 लाख रुपये ऐंठे गए, जबकि कुल ठगी का दायरा 67 करोड़ रुपये तक फैला हुआ था।
- गुजरात का मामला: गुजरात में शातिरों ने हद पार करते हुए एक शख्स को 3 महीने तक डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाए रखा और उससे 24 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड ठगी कर ली।
- कर्नाटक का मामला: यहां एक पीड़ित को एक महीने तक कमरे में कैद की तरह डराकर रखा गया और उससे 45 करोड़ रुपये ऐंठ लिए गए।
पहले पकड़े गए थे मनी लॉन्ड्रिंग के 3 मोहरे
शुरुआती छापेमारी में सीबीआई ने तीन शातिरों को दबोचा था। इनमें हरियाणा का आकाश शामिल था, जिसने खुद अपने खाते में 1.95 करोड़ रुपये लिए थे। वहीं, कोलकाता के राजा करमाकर की फर्म के खाते में ठगी के 1.5 करोड़ रुपये पहुंचे थे। तीसरी आरोपी ज्योति रानी थी, जिसने बैंक में आए पैसे को तुरंत कैश में निकाला और बाकी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग में सीधी भूमिका निभाई थी।
फर्जी बैंक खाते, मैलवेयर और 5 नए आरोपी
इन तीनों से मिली कड़ियों को जोड़ते हुए सीबीआई ने अब 5 और मास्टरमाइंड्स को पकड़ा है, जो ठगी के पैसे को अलग-अलग खातों में बांटने (लेयरिंग) का काम करते थे:
- इटारसी (मध्य प्रदेश): संकेत बस्तवार और पंकज दमाड़े ने धोखे से फर्जी बैंक खाते खुलवाए और डिजिटल अरेस्ट से आई रकम को ठिकाने लगाने में अहम रोल निभाया।
- दिल्ली-एनसीआर: आरिफ उर्फ ‘किंग भाई’, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ ‘हैरी’ (नई दिल्ली) और शशांक सिंह उर्फ ‘रवि’ (गाजियाबाद, यूपी) पीड़ितों से पैसा लेने के लिए बैंक खातों का इंतजाम करते थे।
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आरिफ, हरीश और शशांक ने खाताधारकों के मोबाइल में एक खतरनाक एपीके (APK) फाइल यानी मैलवेयर इंस्टॉल करवा रखी थी। इसके जरिए ये शातिर बैंक के एसएमएस (SMS) अलर्ट को बीच में ही हैक कर लेते थे और खाताधारक को भनक लगे बिना ही खातों से करोड़ों रुपये इधर-उधर कर देते थे।
CBI का कहना है कि बाकी फरार आरोपियों की तलाश जारी है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इस पूरे साइबर नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए जांच तेज कर दी गई है।














































