Biswajit Chatterjee: दोस्त की सलाह से डूब गया हिंदी सिनेमा के हैंडसम हंक का करियर

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 19 Sep 2024, 12:00 AM | Updated: 19 Sep 2024, 12:00 AM

बॉलीवुड में मौजूदा समय में सिद्धार्थ मल्होत्रा, आदित्य रॉय कपूर, विक्की कौशल और सदाबहार शाहरुख खान सरीखे स्टार्स को हैंडसम हंक का टैग मिला हुआ है…लेकिन इसी इंडस्ट्री में एक अभिनेता ऐसे भी हुए, जिन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे हैंडसम हीरो का टैग मिला और उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जमकर कहर मचाया. कई बड़ी अभिनेत्रियों के साथ उन्होंने काम किया..वहीदा रहमान, मुमताज, माला सिन्हा, राजश्री जैसी कई अभिनेत्रियों के साथ उनकी जोड़ी काफी हिट रही…लेकिन जिंदगी का एक फैसला उन पर काफी भारी पड़ गया था…आखिर क्या था पूरा मामला, चलिए समझते हैं.

हिंदी सिनेमा के स्टार बन गए थे विश्वजीत

हिंदी सिनेमा के सबसे हैंडसम हीरो विश्वजीत चटर्जी ने अभिनय करियर की शुरुआत बांग्ला फिल्मों से की. इसके बाद साल 1962 में आई फिल्म ‘बीस साल बाद’ से उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी अपना हुनर आजमाया. करियर की शुरुआत में ही उन्होंने कई ऐसी फिल्में की थी, कि वह देखते ही देखते स्टार बन गए.

विश्वजीत के पिता आर्मी में डॉक्टर थे. अपने बेटे को एक्टर बनते देखना उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था लेकिन विश्वजीत शुरु से ही थिएटर करते आ रहे थे. 10 साल की उम्र से ही उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कर दी थी. उन्होंने पहले बंगाली फिल्मों में काम किया, उसके बाद हिंदी सिनेमा की ओर रुख किया.

ऐसे बर्बाद हुआ विश्वजीत चटर्जी का करियर

एक वक्त तो ऐसा आया कि विश्वजीत चटर्जी ने हिंदी सिनेमा में भी अपनी धाक जमा ली थी. डेब्यू फिल्म के बाद से ही उन्हें किंग ऑफ रोमांस के नाम से पहचाना जाने लगा था. 70 के दशक में इंडस्ट्री में विश्वजीत की तूती बोलती थी…उनकी फिल्मों में रोमांस की काफी सराहना होती थी..ऐसा हो गया था कि वह जिस फिल्म में होते थे..वह हिट की गारंटी बन जाती थी..

उनकी फिल्में मेरे सनम, शहनाई, आसरा, नाइट इन लंदन, ये रात फिर ना आएगी, किस्मत और इश्क पर जोर नहीं जैसी फिल्में उस दौर में सुपरहिट रही थी…

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मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो करियर के पीक पर उनके एक दोस्त ने उन्हें प्रोड्यूसर बनने की सलाह दे डाली थी और यही से उनके करियर का पतन शुरु हो गया…विश्वजीत ने अपने दोस्त की बातों में आकर प्रोड्यूसर बनने का फैसला लिया और सारा पैसा फिल्मों में लगा दिया. 1975 में अपनी फिल्म ‘कहते हैं मुझको राजा’ का निर्माण और निर्देशन किया. उनका ये फैसला गलता साबित हुआ और देखते ही देखते उनका करियर बर्बाद हो गया.

प्रोड्यूसर बनने के बाद उन्होंने एक बार फिस से एक्टर के तौर पर इंडस्ट्री में वापसी करने की कोशिश की लेकिन उन्हें दोबारा वो स्टारडम नहीं मिला, जो कभी उनके पास था.

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