मुगल आक्रांता औरंगजेब ने क्यों दिया था गुरु तेगबहादुर जी का सिर धड़ से अलग करने का आदेश ?

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Published: 04 Mar 2024, 12:00 AM | Updated: 04 Mar 2024, 12:00 AM

पांचवे गुरु, गुरु अर्जनदेव जी की शहादत के बाद सिखों ने मुगलों के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया था..छठे गुरु, गुरु हरगोविंद सिंह जी ने सिखों को योद्धा बनाने का काम किया और एक कुशल सिख सेना का गठन भी किया…गुरु अर्जनदेव जी की हत्या मुगल बादशाह जहांगीर ने इतने निर्मम तरीके से कराई थी कि पूरा देश सन्न रह गया था…उसके बाद लगभग जितने भी गुरु हुए, सभी ने धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने का निर्णय किया और उसमें काफी हद तक सफल भी रहे थे. लेकिन नौवें गुरु, गुरु तेगबहादुर जी की हत्या में भी मुगलों ने निर्ममता का गला घोंट दिया था.

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त्यागमल से तेगबहादुर कैसे बनें गुरुजी

गुरु तेगबहादुर जी एक निर्भीक और बहादुर योद्धा थे. केवल 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने पिता गुरु हरगोविंद सिंह जी के साथ मिलकर मुगल सेना को धूल चटा दिया था. बचपन में इन्हें त्यागमल के नाम से जाना जाता था…13 वर्ष की आयु में वह करतारपुर की लड़ाई में हिस्सा लेने अपने पिता के साथ जा रहे थे. . फगवाड़ा के निकट पलाही गांव में मुगलों की सेना ने उनका पीछा करते हुए अचानक आक्रमण कर दिया. पिता के साथ गुरु तेग बहादुर ने मुगलों की सेना की टुकड़ी को मुंह तोड़ जवाब दिया. उनकी इसी बहादुरी और साहस ने उन्हें त्यागमल से तेग बहादुर बना दिया.

गुरुजी की शादी 1632 में जालंधर के पास करतारपुर में बीबी गुजरी जी से हुई. इसके बाद वह अमृतसर के बकाला में रहने लगे. आठवें गुरु, गुरु हरकिशन जी के ज्योतिजोत के बाद 1665 में गुरु तेगबहादरु जी गुरुगद्दी पर काबिज हुए. उन्होंने धर्म के प्रचार प्रसार और कल्याणकारी कार्यों के लिए देश के कई हिस्सों का भ्रमण किया. वो आनंदपुर से किरतपुर, रोपड़, सफाबाद के बाशिंदों को धर्म का पाठ पढ़ाते हुए दमदमा साहिब होते हुए कुरुक्षेत्र पहुंचे. उनके भारत भ्रमण के दौरान 1666 में  पटना साहिब में गुरु गोविंद सिंह का जन्म हुआ.

गुरुजी औरंगजेब के समकालीन थे और औरंगजेब के शासन में जनता त्रस्त थी. जबरदस्ती धर्मांतरण हो रहा था और इंकार करने वाले लोगों का सिर कलम कर दिया जाता था. कश्मीरी पंडितों पर भी औरंगजेब ने काफी कहर ढ़ाया. इसके बाद औरंगजेब से त्रस्त कश्मीरी पंडितों का एक प्रतिनिधिमंडल श्री आनंदपुर साहिब में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की शरण में मदद के लिए पहुंचा.

औरंगजेब ने रखी थीं ये 3 शर्तें

गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों को उनके धर्म की रक्षा का आश्वासन दिया और हिन्दुओं को बलपूर्वक मुस्लिम बनाने का खुले स्वर में विरोध किया. उनके इस कदम से औरंगजेब गुस्से से भर गया. 1675 में गुरु तेग बहादुर जी पांच सिखों के साथ आनंदपुर से दिल्ली के लिए चल पड़े. औरगजेब ने उन्हें रास्ते से ही पकड़ लिया और तीन-चार महीने तक कैद में रखकर अत्याचार की सीमाएं लांघ दी.

उसके बाद गुरुजी को इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया जाने लगा. इतिहासकारों के मुताबिक औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर जी के सामने 3 शर्ते रखी थीं..ये 3 शर्तें थी कलमा पढ़कर मुसलमान बनने की, चमत्कार दिखाने की या फिर मौत स्वीकार करने की..गुरुजी ने धर्म छोड़ने और चमत्कार दिखाने से स्पष्ट रुप से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि वह सिर कटवा सकते हैं लेकिन बाल नहीं कटवाएंगे. जिसके बाद 1665 में दिल्ली के चांदनी चौक पर जल्लाद जलालदीन ने गुरु तेग बहादुर का सर धड़ से कलम कर दिया था. उसी स्थान पर आज गुरुद्वारा शीशगंज साहिब बना हुआ है.

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