जीवन में अगर दुख ही दुख है तो यह उपाय करें, चमत्कार हो जाएगा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 02 नवम्बर 2023, 05:30 AM Updated: 02 नवम्बर 2023, 05:30 AM
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Guru Nanak Sakhi in Hindi – जीवन में दुख और सुख का सामना करना पड़ता है. यही जिंदगी है. यह आपको लगता है कि आपके जीवन में दुख ही दुख है. और आपके जीवन में कभी भी सुख की प्राप्ति नही होती या आपको लगता है कि आपका जीवन ही खराब है तो ऐसा सोचना बंद कर दीजिये, ऐसा बिलकुल भी नहीं है. सुख और दुख तो सबके जीवन का हिस्सा होते है. सुख और दुख दोनों का हमारे जीवन में महत्व है.

सुख और दुख हमे एक दूसरे का अनुभव कराते है. अगर हमारे जीवन में दुख नही होगा तो हम सुख को अच्छे से महसूस नहीं कर पाएंगे और अगर हमारे जीवन में सुख नहीं होगा तो हमे दुख भी महसूस नहीं होगा. आज हम आपके लिए एक ऐसी कहानी लेकर आए है जिससे पढ़कर आप सुख और दुख को समझ जाएंगे. आज हम आपको इस कहानी से जीवन का मंत्रा समझा देंगे. तो अगर आपक एजिवन में दुख ही दुख है तो आईये ये कहानी पढ़े और चमत्कार देखियें.

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सुख-दुख का चक्र ही जीवन है

एक बार की बात है, एक आदमी गुरु जी के पास गया और पुछा की हे गुरु जी मैं इतना दुखी क्यों हूं? क्या आप मेरे दुख का कारण बता सकते है? गुरु जी ने उसे बताया कि खुद चीजों के साथ जोड़ लेना और उनसे आकर्षित होकर उनके पीछे भागना ही तुम्हारे सारे दुखों का कारण है. उस व्यक्ति ने गुरु जी से कहा कि आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपने मुझे मेरे दुखों का कारण बता दिया. और इतना कहकर वो व्यक्ति जाने लगा, गुरु ज ने कहा पूरी बात तो सुनो… वो आदमी बोला गुरु जी मुझे समझ आ गया है आप किस बात की तरफ इशारा के रहे हो और वो चला गया.

एक महीने के बाद वो आदमी फिर से गुरु जी के पास आया और गुरु जी को बताया कि आपने जैसा बोला था मैंने वैसा ही किया, लेकिन गुरु जी अब मैं पहले से भी ज्यादा दुखी हूं. आपने मुझे ऐसा उपाय क्यों बताया जिससे मैं ओर ज्यादा दुखी हो गया. गुरु जी ने उसे पुछा बताओं तुमने क्या किया? वो आदमी बोला आपने बोला था कि चीजों से मोह करना ही मेरे दुःख का कारण है इसीलिए मैंने अपने सारे रिश्तेदारों और परिवार से दूर हो गया, ऐसा करने से मैं कुछ दिन तो खुश रहा लेकिन बाद में मुझे उनकी याद आने लगे और अब मैं उनके पास वापिस जा रहा था, लेकिन उससे पहले मैंने सोचा आप से मिल लेता हूं.

Guru Nanak Sakhi in Hindi – गुरु जी ने कहा कि तुम आपने परिवार को छोड़ कर नहीं आए हो, तुम उन्हें अपने साथ लेकर ही घूम रहे हो इसीलिए तुम दुखी हो. गुरु जी ने बताया कि दुख और सुख तो जीवनभर का साथी है. वो आदमी बोला कि गुरु जी की क्या मैंने दुखी रहने के लिए जन्म लिया है. गुरु जी न कहा हाँ.. तुमने दुखी और सुखी रहने के लिए ही जन्म लिया है. वो आदमी बोला इस सुख-दुख के चक्र से बहार निकलने का कोई उपाय नहीं है. गुरु जी बोले कि हाँ है न.

गुरु जी ने उस व्यक्ति को बताया कि अगर तुम इस दुख-सुख के चक्र से बहार आना चाहते हो तो तुम्हे सबके साथ रह कर भी अकेला रहना पड़ेगा. वो आदमी बोला इसका क्या मतलब होता है गुरु जी ने समझाया कि आप बहार तो सबके साथ रहो, लेकिन अंदर अकेले रहो किसी से लगाव न लगाए तो आप सुख-दुख के चक्र से बहार आ सकते है. वो आदमी गुरु जी की बात समझ गया और उन्हें धन्यवाद बोल कर चला गया.

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