जानिए कब है इंदिरा एकादशी, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 07 अक्टूबर 2023, 05:30 AM Updated: 07 अक्टूबर 2023, 05:30 AM
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साल के हर महीने दो एकादशी पड़ती है और इस दिन लोग व्रत रखते हैं और इस वजह से हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का काफी महत्व है. वहीं इस समय हिंदू धर्म में पितृ पक्ष चल रहा है और इस महीने पितरों के पिंड दान किए जाते हैं. वहीं इस पितृ पक्ष के दौरान इंदिरा एकादशी आती है. वहीं इस पोस्ट के जरिए हम आपको इस बात की जानकारी देने जा रहे हैं कि इंदिरा एकादशी तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि क्या है.

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इंदिरा एकादशी का महत्व

अश्विन माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है. वहीं इस एकादशी का पितृ पक्ष में आने की वजह खास महत्व है वहीं ये एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस इंदिरा एकादशी के दिन विधि विधान से पूजा करने से पितृ भी प्रसन्न होते हैं और अशीर्वाद देते हैं. वहीं कहा ये भी जाता है कि इंदिरा एकादशी के दिन व्रत रखने से व्यक्ति को मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है. इसके साथ ही साथ पितरों को मुक्ति मिलती है.

इंदिरा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त

इस बार इंदिरा एकादशी का व्रत 9 और 10 अक्टूबर को रखा जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, इंदिरा एकादशी की शुरुआत 9 अक्टूबर, सोमवार को दोपहर 12 बजकर 36 मिनट पर होगी और 10 अक्टूबर, मंगलवान को दिन में 3 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी. वहीं  उदयातिथि के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत 10 अक्टूबर को ही रखा जाएगा. इंदिरा एकादशी व्रत का पारण अगले दिन 11 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 19 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 39 मिनट के बीच होगा.

इंदिरा एकादशी की पूजन विधि

वहीं जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं उन्हें विधि पूजा जरूर करनी चाहिए. एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित हैं और इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर व्रत का संकल्प लें और स्नान करें. वहीं इस इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी करनी चाहिए. इससे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करना शुभ माना जाता है क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अतिप्रिय है. ऐसे में भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित करें.

वहीं एकादशी पर श्राद्ध है तो श्राद्ध  विधि करें एवं ब्राह्मणों को भोजन कराएं. इसके बाद गाय, कौवे और कुत्ते को भी भोजन दें. व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी को पूजन के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें. इसके बाद परिवार के साथ मिलकर भोजन करें.

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