बंगाल में ममता बनर्जी के सपोर्ट में उतरे ओवैसी की पार्टी के लोग, जानें क्या है पूरा मामला?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 03 मार्च 2021, 05:30 AM Updated: 03 मार्च 2021, 05:30 AM
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बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है। देश के 5 प्रदेशों में चुनाव होने वाले हैं लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की है। क्योंकि इस चुनाव में पश्चिम बंगाल की सत्तारुढ़ पार्टी टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना जताई जा रही है। 

चुनाव आयोग ने 294 विधानसभा सीटों वाले बंगाल में 8 चरणों में चुनाव कराने का फैसला लिया है। इस चुनाव में टीएमसी को बीजेपी, कांग्रेस, वाम दल, AIMIM समेत कई क्षेत्रीय पार्टियों से चुनौती मिलने वाली है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पहली बार बंगाल में चुनाव लड़ने वाली है। 

लेकिन चुनाव से ठीक पहले प्रदेश में AIMIM को तगड़ा झटका लगा है। AIMIM बंगाल प्रेसीडेंट ने कहा है कि ओवैसी को किसी ने मिसगाइड किया है उनके लोग इस चुनाव में TMC को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

‘बंगाल में नहीं होने देंगे बीजेपी को फायदा’

AIMIM बंगाल प्रेसीडेंट जमीरुल हसन (Zamirul Hassan) ने एक प्राइवेट चैनल से बातचीत करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, हम TMC को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, ‘औवेसी को किसी ने misguide किया है। हमने 25 सीट identify की है, जिस पर TMC कभी नही जीती है, उसी पर लड़ेंगे। बीजेपी को फायदा नही होने देंगे। औवेसी अगर हमारी बात मानते हैं तो ठीक है वरना हम आपस मे बैठकर फैसला ले लेंगे।‘ उन्होंने (Zamirul Hassan) कहा, ओवैसी ने हमसे राय लिए बगैर पीरज़ादा से बात की। पीरजादा ने 100 करोड़ रुपये इकट्ठा कर लिए हैं।

अपने दम पर चुनाव लड़ेगी AIMIM

दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी ने पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी। ओवैसी ने कोलकाता में उनसे मुलाकात भी की थी लेकिन दोनों के बीच बात नहीं बनी। 

ISF अब कांग्रेस और वाम दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली है। जिसकी आधिकारिक घोषणा हो चुकी है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी प्रदेश में अब अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और टीएमसी को टक्कर देगी। 

गौरतलब है कि ओवैसी की पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भी किस्मत आजमाया था और 5 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुए थे। AIMIM की प्रत्याशियों की वजह से कई सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवारों की हार हुई थी और बीजेपी को अप्रत्यक्ष रुप से पूरा फायदा हुआ था। पश्चिम बंगाल चुनाव में भी कुछ ऐसा ही होने का अंदेशा है।

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