जानिए किस वजह से ऐतिहासिक है जोशीमठ, शुरू हुआ था सबसे बड़ा आन्दोलन

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 10 Jan 2023, 12:00 AM | Updated: 10 Jan 2023, 12:00 AM

धार्मिक होने के साथ ऐतिहासिक है जोशीमठ

जोशीमठ (Joshimath) तबाह होने की कगार पर है और दिन-प्रतिदिन यहाँ के हालात खराब होते जा रहे हैं . जोशीमठ की धरती (land of joshimath) फट रही है. घरों में दरारे आ रही है और इस वजह से यहां के लोग घर छोड़ने पर मजबूर हो गये हैं. जोशीमठ के तबाह होने की वजह कई सारी है साथ ये भी कहा जा रहा है कि इस तबाही की जानकारी पहले ही दे दी गयी थी लेकिन इस जानकारी को नजरअंदाज किया और आज मंजर ये हैं कि जोशीमठ किसी भी वक़्त तबाह हो सकता है. वहीं इस पोस्ट के जरिये हम आपको इस बात की जानकारी देने जा रहे हैं कि जोशीमठ की धरती धार्मिक होने के साथ ऐतिहासिक (Joshimath religious and historical) क्यों है. 

यहीं से शुरू हुआ था चिपको आन्दोलन 

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जोशीमठ का रिश्ता इतिहास की एक बड़ी घटना से ताल्लुक रखता है. जोशीमठ से कुछ 15 किलोमीटर दूर एक गांव पड़ता है. रैणी नाम का,  मार्च 1974 में इसी गांव की रहने वाली गौरा देवी गांव की औरतों को लेकर जंगल पहुंची और उनसे चिपक गई. पेड़ काटने वाले लोगों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, “अगर पेड़ काटने हैं तो पहले हम पर गोली चलाओ” और यहां से शुरुआत हुई चिपको आंदोलन (chipko movement) की. जिसके चलते सरकार को झुकना पड़ा और इस इलाके में पेड़ काटने पर रोक लगा दी गई. वहीं इस आंदोलन की वजह से  ये जगह ऐतिहासिक हो गई. 

जोशीमठ का विशेष महत्व

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जोशीमठ का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यहां से होकर बद्रीनाथ (Badrinath) और हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib) के दर्शन के लिए गुजरना पड़ता है और इस यात्रा के दौरान आसपास बर्फीले पहाड़ों के दर्शन होते हैं. वहीं कहा जाता है कि अगर आप बद्रीनाथ के दर्शन करने जा रहे हैं तो जोशीमठ के भगवान नरसिंह देवता (Lord Narasimha Devta of Joshimath) के दर्शन अहम है. अगर आप यहाँ पर नरसिंह देवता के दर्शन नहीं करते हैं तो आपको बद्रीनाथ के दर्शन करने का  फल नही मिलेगा. बता दें,सर्दियों में जब बद्रीनाथ के कपाट बंद हो जाते हैं, तब भगवान बद्री की प्रतिष्ठा इसी मंदिर में होती है.

बंद हो जायेगा बद्रीनाथ का रास्ता 
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स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में बनी भगवान नरसिंह की मूर्ति का बायां हाथ लगातार पतला होता जाएगा और जब ये गिर जाएगा तब नर और नारायण नाम के दो पर्वत आपस में मिल जाएंगे. इस तरह बद्रीनाथ का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाएगा और भगवान बद्रीनाथ की पूजा भविष्य बद्री में हुआ करेगी.

Also read- जब पेड़ों को बचाने के लिए उससे चिपक गए थे लोग… कब और कैसे शुरू हुआ वो Chipko Andolan?.

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