जानिए कैसे बनाया जाता है भारत में व्रत के समय इस्तेमाल किया जाने वाला सेंधा नमक

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 20 Jan 2023, 12:00 AM | Updated: 20 Jan 2023, 12:00 AM

कहां से आया और कैसे बनाया जाता है सेंधा नमक 

जब भी हम हिन्दू धर्म (Hindu religion) में व्रत या उपवास (Fast) की बात करते है है तो तुरंत हमारे जेहन में साबूदाने की खिचड़ी के साथ कई अन्य फलाहार अपनी जगह बना लेते हैं। हम इस फलाहार की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि फलाहार में इस्तेमाल होने वाला नमक कोई आम नमक नहीं होता और न ही ये समुन्द्र  से आता है लेकिन क्या वजह है क्यों इसे इतना शुद्ध माना जाता है ये नमक कहां से आता है और उपवास के दौरान इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है. इस पोस्ट के जारिए हम आपको सेंधा नमक (Rock salt) से जुडी सभी जानकारी देने जा रहे हैं. 

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कहाँ से आता है शुद्ध सेंधा नमक

जानिए कैसे बनाया जाता है भारत में व्रत के समय इस्तेमाल किया जाने वाला सेंधा नमक — Nedrick News

 शुद्ध नमक (Pure salt) माने जाने वाला सेंधा नमक अन्य धातुओं और खनिजों की तरह पहाड़ों में पाया जाता है और इसे माइनिंग प्रोसेस के जरिए निकाला जाता है लेकिन आपको ये जानकर ये हैरानी होगी कि पिंक साल्ट (Pink salt) के नाम से प्रसिद्ध ये नमक भारत से नहीं बल्कि हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) के झेलम से आता है, सेंधा नमक पाकिस्तान की खेवरा साल्ट माइन (Khewra Salt Mine) से आता है। 

नमक को लेकर हुआ था विवाद 

2019 में पाकिस्तान में जब नमक को लेकर विवाद हुआ था वो इसी बात पर आधारित था कि सेंधा नमक भारत में सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट किया जाता है।  दरअसल, पाकिस्तान की खेवरा माइन्स से ही साल का 800 मिलियन टन से अधिक सेंधा नमक निकाला जाता है जो तरह-तरह के इस्तेमाल में लाया जाता है। ये सिर्फ खाने के ही नहीं बल्कि कमर्शियल इस्तेमाल के लिए भी एक्सपोर्ट होता है। पाक में सिंधु नदी के किनारे नमककोह और खेवड़ा नमक खान जैसी कई खदानें हैं, सिंधु नदी क्षेत्र में मिलने के कारण ही इसे सेंधा नमक, लाहौरी नमक या हिमालयी नमक कहा जाता है।

कैसे बनाया जाता सेंधा नमक  
जानिए कैसे बनाया जाता है भारत में व्रत के समय इस्तेमाल किया जाने वाला सेंधा नमक — Nedrick News

सबसे पहले अलग-अलग तरीकों से रॉक सॉल्ट के पत्थरों को तोड़ा जाता है, इस काम के लिए एक वर्कर को लगभग 8 घंटे माइन के अंदर रहना होता है,इसके बाद इसे रंग के आधार पर विभाजित किया जाता है। पत्थर आमतौर पर तीन रंग होते हैं सफेद, लाल और गुलाबी। सफेद का मतलब सोडियम क्लोराइड (Sodium chloride) ज्यादा है, गुलाबी का मतलब मैग्नीशियम (magnesium) और लाल का मतलब आयरन (Iron) ज्यादा है। इसके बाद ये नमक के बड़े-बड़े पत्थर रिफाइनरी और मिलों में ले जाए जाते हैं। वहां इन पत्थरों को ग्राइंड किया जाता है और छोटे-छोटे पार्टिकल्स और नमक का शेप दिया जाता है, इसके बाद पैकेट में बंद कर इस नमक को दुनिया भर में एक्सपोर्ट किया जाता है.

क्या है हिन्दू धर्म में सेंधा नमक का महत्व

इतिहासकारों की माने तो सिंधु के किनारे ही जब सिंधु सभ्यता का विकास हुआ, तब आर्य लोग सबसे पहले यहीं आकर बसे थे और यहीं से पूरे भारतवर्ष में इन्होंने अपना वर्चस्व बढ़ावा, आर्य सभ्यता जब विकसित हो रही थी और कर्मकांड व पूजा-पाठ, उपवास आदि का महत्व बढ़ गया था, तो लोग खाने में सिंधु नदी के किनारे मिलने वाले स्वच्छ नमक का ही उपवास में सेवन करते थे, क्योंकि यह नमक सीधे हिमालय के ग्लेशियरों से निकल कर आता था। यही परंपरा सैंकड़ों-हजारों सालों से आज तक चली आ रही है। इस नमक में मौजूद कई पोषक तत्त्व की वजह से यह आयुर्वेदिक तरीके से काफी महत्वपूर्ण होता है, हालांकि पाकिस्तान में सेंधा नमक की खदानें अब धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है और पाक में सेंधा नमक की ये खदानें अब पर्यटन का केंद्र बन चुकी है।

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