ईरानी महिलाओं के मानवाधिकारों का हो रहा हनन, मॉरलिटी पुलिस के नाम पर सरकार की क्रूरता

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ईरानी महिलाओं का हो रहा मानवाधिकारों का हनन

ईरान (Iran) में सितम्बर से हिजाब (Hijab) को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा था , जिसके बाद वहां की सरकार ‘मोरैलिटी पुलिस’ का गठन किया था। इसका काम देश में इस्लामिक ड्रेस कोड (Islamic dress code) को लागू करना था और यह सुनिश्चित करना था की सभी इस ड्रेस कोड का पालन कर रहे हैं या नहीं। हाल ही में एक खबर आई थी जिस वजह से पूरी दुनिया की मुस्लिम महिलाएं (Muslim Women) सुकून का सांस ले रही थी। खबर थी की ईरान की सरकार ने इस  ‘मोरैलिटी पुलिस (Morality Police)’ को भंग करने का निर्णय लिया है। 

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पश्चिमी मीडिया ने खबर दिखाने में की थी जल्दबाजी 

ऐसा लगता है मानो पश्चिमी मीडिया ने इस खबर को दिखाने में जल्दबाजी बरती है। मीडिया ने यह खबर ईरान के अटार्नी जनरल के बयानों का हवाला देते हुए छपा था। दूसरी तरफ इस खबर को फैलता देख ईरानी मीडिया ने इसे गलत करार दिया है। ईरानी मीडिया ने इस खबर की पूरी सच्चाई को दिखाते हुए लिखा है कि अभी तक खबर सिर्फ यह है कि ईरान की संसद और न्यायपालिका ने महिलाओं के अनिवार्य रूप से हिजाब पहनने के कानून पर पुनर्विचार करने का फैसला लिया है। दूसरी तरफ ईरानी मीडिया ने मॉरलिटी पुलिस के सवाल पर लिखा है कि यह देश के गृह मंत्रालय के तहत आता है। इसलिए इस बारे में कोई भी फैसला अटार्नी जनरल नहीं ले सकते।

  • क्या है मॉरलिटी पुलिस?

अगर ईरान की इस मॉरलिटी पुलिस प्रथा पर बात करे तो ये पुलिस जनता की सुविधा के लिए नहीं बनाई गई थी। यह तो देश में रह रही महिलाओं के लिए है जो उन्हें परम्परिक इस्लामिक कपड़े ना पहनने पर सजा देती है। इसमें सजा की प्रक्रिया भी कोई कानून के तहत नहीं बनी है। आप अगर वहां की महिलाओं को इस बारे में बात करते सुनेंगे तो आपकी रूह कांप जाएगी। 

मॉरलिटी पुलिस करती है महिलाओं के साथ दरिंदगी 

ईरान की एक महिला बताती है कि मॉरैलिटी पुलिस ने मुझे मेट्रो स्टेशन से पकड़ा और पीटने लगे। महिला ने आगे बताया कि उन्होंने सिर्फ पियर्सिंग करा रखी थी, लेकिन इस्लाम के मुताबिक ये गैर-इस्लामिक था। उन्होंने कहा कि मैंने कपड़े भी ठीक से नहीं पहने हैं, और मुझे पीटते रहे।’ यह बताते हुए 26 साल की ईरानी महिला दोन्या फर्द घबराकर रोने लगती हैं। महिला ने घबराते हुए आगे बताया कि मॉरलिटी पुलिस ने उनकी माँ को भी  गिरफ्तार कर जेल में दाल दिया है। ये लोग इस जेल को री-एजुकेशन सेंटर बताते हैं। 

घटना की शुरुआत 

यह पूरी घटना 13 सितम्बर 2022 को शुरू हुई थी।  जब एक ईरानी लड़की महसा अमीनी एक लंबा ओवरकोट पहनकर अपने परिवार के साथ तेहरान में घूम रही थीं। उसी समय महसा को वहां की पुलिस ने हिजाब ना पहनने के कारण पकड़ लिया और उनकी बर्बरता से पिटाई की गई। पिटाई के बाद और जेल में सही से मेडिकल सुविधा ना मिलने के कारण महसा की पुलिस कस्टडी में ही मृत्यु हो गई थी। तब से ईरान में और दुनिया के कई जगहों पर हिजाब को लेकर आंदोलन छिड़ा हुआ है। 

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