महंगाई और वेतन संकट पर दहला फ्रांस: सड़कों पर उतरे लाखों लोग, पेरिस में मशाल मार्च और एफिल टावर बंद| France Paris protests 2026

[nedrick_meta]
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google
[modern_share]

France Paris protests 2026: बढ़ती महंगाई, कम वेतन और शिक्षा क्षेत्र में बजट कटौती को लेकर फ्रांस में भारी जनआक्रोश देखने को मिला है। गुरुवार, 5 नवंबर को राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्र, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। दिनभर चले इन राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़पें भी हुईं। तनाव के बीच पेरिस का मशहूर एफिल टावर दिनभर पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद रहा और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं चरमरा गईं।

और पढ़ें: मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले अमेरिका का बड़ा एक्शन: ईरान के केश्म द्वीप पर की एयरस्ट्राइक| US airstrike Qeshm Island

रात में नेशन स्क्वायर पर दिखा अलग नजारा| France Paris protests 2026

दिनभर चली रैलियों और हंगामे के बाद रात होते ही पेरिस के ऐतिहासिक नेशन स्क्वायर पर बेहद अनोखा दृश्य नजर आया। यहाँ हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी रंग-बिरंगी झांकियों और जलती हुई मशालों के साथ जमा हुए। आसमान में रोशनी बिखेरते फ्लेयर्स चमकाए गए, जिससे पूरा इलाका रोशन हो उठा। हालांकि, शांतिपूर्ण झांकियों के बीच कुछ इलाकों में माहौल तनावपूर्ण भी बना रहा।

पेरिस और लियोन जैसे प्रमुख शहरों में कुछ उपद्रवी समूहों और पुलिस के बीच सीधी भिड़ंत हुई। प्रदर्शन खत्म होने के दौरान कुछ जगहों पर आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं, जिन्हें दमकल और सुरक्षा अधिकारियों ने बाद में नियंत्रित किया।

प्रदर्शनकारियों की संख्या पर अलग-अलग दावे

इस आंदोलन के जरिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर चौतरफा दबाव बनाने की रणनीति साफ दिखाई दी। आंदोलन के समर्थन में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों ने एक दिन की देशव्यापी हड़ताल की। देशभर में सड़कों पर उतरे लोगों की संख्या को लेकर सरकार और यूनियनों के दावों में बड़ा अंतर देखने को मिला। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, पूरे देश में करीब 6 लाख लोगों ने इन प्रदर्शनों में भाग लिया। वहीं दूसरी तरफ, आंदोलन का नेतृत्व कर रही प्रमुख श्रमिक यूनियनों में शामिल सीजीटी (CGT) का दावा है कि इस विरोध प्रदर्शन में 16 लाख से अधिक लोग शामिल हुए।

क्यों भड़का यह जनांदोलन?

फ्रांस की जनता में इस असंतोष की मुख्य वजह लगातार बढ़ती महंगाई, स्थिर वेतन और शिक्षा बजट में कमी है। छात्र वर्ग स्कूलों और कॉलेजों में आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने और शिक्षा पर सरकारी बजट बढ़ाने की मांग कर रहा है। वहीं कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों की मांग है कि महंगाई दर को देखते हुए वेतन और पेंशन में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए। इस आंदोलन की शुरुआत सितंबर के महीने में एक हाईस्कूल में कर्मचारियों और शिक्षकों की भारी कमी के विरोध से हुई थी। शुरुआत में यह केवल छात्रों का छोटा विरोध था, लेकिन धीरे-धीरे कामकाजी तबका और विभिन्न ट्रेड यूनियनें भी इसमें जुड़ती चली गईं, जिससे यह देशव्यापी जनआंदोलन में बदल गया।

स्कूल ठप, परिवहन प्रभावित

गुरुवार को हुई हड़ताल का सबसे गहरा असर देश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा। फ्रांस के करीब एक तिहाई हाईस्कूल या तो पूरी तरह बंद रहे या वहां सामान्य पढ़ाई ठप रही। कई स्थानों पर छात्रों ने खुद स्कूलों के मुख्य द्वारों को ब्लॉक कर दिया, जबकि शिक्षक हड़ताल पर चले गए। कई शहरों में बस और मेट्रो सेवाओं पर असर पड़ा, जिससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

और पढ़ें: ट्रंप की सुरक्षा के लिए तैनात मिसाइल सिस्टम के पास कैसे गिरा प्राइवेट जेट? Florida हादसे ने खड़े किए सवाल| Florida plane crash Learjet

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Recent News

Editor's Picks

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds