Retired Captain Puran Singh: अदम्य साहस, अटूट आस्था और फौजी जज्बे के आगे उम्र सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाती है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में भक्ति और शारीरिक सहनशक्ति का एक ऐसा ही अद्भुत चमत्कार देखने को मिल रहा है।
भारतीय सेना की 8 जाट रेजिमेंट से सेवानिवृत्त 65 वर्षीय कैप्टन पूरन सिंह सोलंकी इस समय श्री गोवर्धन महाराज की पवित्र 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा पैरों से नहीं, बल्कि सिर के बल यानी ‘शीर्षासन’ मुद्रा में लगा रहे हैं। पिछले 11 दिनों से जारी उनकी इस कठिन साधना को देखने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ रहा है।
हाल ही में गिरिराज महाराज के परम भक्त डॉ. महावीर सिंह ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ गोवर्धन पहुँचकर इस जांबाज फौजी का भव्य स्वागत किया और उनके इस जज्बे को सलाम किया। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि कैप्टन पूरन सिंह की इस अनोखी साधना और इससे जुड़ी मुख्य बातें क्या हैं।
कौन हैं Captain Puran Singh ?
आपको बता दें कि कैप्टन पूरन सिंह (Captain Puran Singh) मथुरा की महावन तहसील के राया ब्लॉक के नगौड़ा (नगोडा) गांव के रहने वाले हैं और भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 8 जाट रेजिमेंट से सेवानिवृत्त हैं।
कैसे तय करते हैं सफर?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह पैरों के बजाय अपने हाथों के सहारे सिर के बल (शीर्षासन की मुद्रा में) आगे बढ़ते हैं। वह हर दिन सुबह 6 से 7 बजे के बीच अपनी यात्रा शुरू करते हैं और प्रतिदिन लगभग 600 मीटर की दूरी तय करते हैं। प्रत्येक 100 मीटर चलने के बाद वह कुछ समय विश्राम करते हैं।
पहले भी बना चुके हैं विश्व रिकॉर्ड
बताया जा रहा है कि कैप्टन पूरन सिंह (Captain Puran Singh) के नाम पहले भी लगातार 4 घंटे 2 मिनट तक शीर्षासन करने का विश्व रिकॉर्ड दर्ज है। इस बार वह लगभग 35 दिनों में अपनी इस 21 किमी की दुर्गम परिक्रमा को पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
क्या है इस साधना का उद्देश्य?
मिली जानकारी के अनुसार, 65 वर्ष की उम्र में इस कठिन साधना के पीछे उनका उद्देश्य देश की युवा पीढ़ी को योग के प्रति प्रेरित करना, स्वस्थ रहने का संदेश देना और जीवन में कभी हार न मानने का जज्बा सिखाना है।
डॉ. महावीर सिंह ने बढ़ाया हौसला
बता दें कि उनकी इस कठिन परिक्रमा के 11वें दिन गिरिराज महाराज के परम भक्त डॉ. महावीर सिंह अपने सैकड़ों साथियों के साथ गोवर्धन पहुँचे। उन्होंने कैप्टन साहब का माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया और करीब दो घंटे तक उनके साथ रहे।
डॉ. महावीर सिंह ने कहा कि कैप्टन साहब के इस रूप को देखकर उन्हें साक्षात गिरिराज महाराज के दर्शन जैसा अनुभव हुआ है। निश्चित रूप से, कैप्टन पूरन सिंह (Captain Puran Singh) की यह आस्था और योग साधना आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है।











































