PNG Gas Big Update: E20 पेट्रोल के बाद अब आपके रसोई बजट को एक और झटका लग सकता है। क्या आपकी रसोई में आने वाली पाइपलाइन गैस अब महंगी होने वाली है? पेट्रोलियम नियामक बोर्ड (PNGRB) ने पीएनजी में 5% हाइड्रोजन ब्लेंडिंग के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस नए बदलाव से आपकी जेब हल्की होगी या रसोई गैस के दाम घटेंगे? तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं इस नई योजना का आपके बिल और सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा।
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कीमत पर पड़ेगा असर ( PNG Gas Big Update)
प्राकृतिक गैस और ग्रीन हाइड्रोजन की लागत में एक बहुत बड़ा अंतर है, जिसके कारण पीएनजी के दाम बढ़ने की पूरी आशंका है। अगर दोनों ईंधनों के भावों की सीधी तुलना करें, तो जहां प्राकृतिक गैस का मौजूदा बेंचमार्क भाव लगभग 1,067 प्रति MMBtu है, वहीं ग्रीन हाइड्रोजन का भाव 2,880 से 2,950 प्रति MMBtu के बीच है। इसका सीधा मतलब यह है कि ग्रीन हाइड्रोजन पारंपरिक प्राकृतिक गैस के मुकाबले लगभग 2.7 गुना ज्यादा महंगी है।
इसके अलावा, सरकारी टेंडर में भी ग्रीन हाइड्रोजन की दर 387 से 397 प्रति किलोग्राम (GST सहित) तय की गई है। ऐसे में, जहां दिल्ली में वर्तमान में PNG का रेट 50.59 प्रति SCM है, वहीं इसमें 5% महंगी ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंड होने के बाद गैस कंपनियों की कुल इनपुट लागत काफी बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर आने वाले समय में उपभोक्ताओं के बिल पर पड़ सकता है।
क्या गैस चूल्हा और पाइपलाइन बदलना पड़ेगा?
हाइड्रोजन बेहद ज्वलनशील और हल्की गैस है। 5% तक मिश्रण के लिए मौजूदा गैस चूल्हों को बदलने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन गैस कंपनियों को अपने पाइपलाइन नेटवर्क, लीक डिटेक्शन सिस्टम और मीटरों में सुरक्षा सुधार करने होंगे। इस इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने का खर्च भी कंपनियों की लागत बढ़ाएगा। देश में यह प्रयोग एकदम नया नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NTPC ने सूरत (गुजरात) की अपनी कवास टाउनशिप में और GAIL ने इंदौर में पहले ही सफलतापूर्वक पायलट प्रोजेक्ट चलाए हैं।
क्या हाइड्रोजन मिक्स होने के बाद आपकी रसोई सुरक्षित रहेगी?
क्योंकि हाइड्रोजन बेहद ज्वलनशील, हल्की और अदृश्य गैस है, इसलिए सुरक्षा को लेकर लोगों के मन में डर होना स्वाभाविक है। हालांकि, राहत की बात यह है कि 5% तक के मिश्रण के लिए उपभोक्ताओं को अपने मौजूदा गैस चूल्हों या पाइपलाइन को बदलने की बिल्कुल जरूरत नहीं होगी। असली चुनौती और जिम्मेदारी गैस कंपनियों की है।
हाइड्रोजन के छोटे मॉलिक्यूल्स (अणुओं) के कारण बारीक से बारीक लीक का खतरा बढ़ जाता है, जिससे निपटने के लिए कंपनियों को अपने पाइपलाइन नेटवर्क को अपग्रेड करना होगा, एडवांस लीक डिटेक्शन सिस्टम लगाने होंगे और हाई-टेक मीटर इंस्टॉल करने होंगे।
इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को हाई-सुरक्षा मोड पर ले जाने का खर्च भी बहुत बड़ा होगा। सुरक्षा के लिहाज से यह प्रयोग पूरी तरह जांचा-परखा है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी कंपनियों जैसे NTPC ने सूरत (गुजरात) में और GAIL ने इंदौर में इसके सुरक्षा मानकों का सफलतापूर्वक परीक्षण (Pilot Project) पहले ही कर लिया है।अब












































