देश में खामोशी, न्यूयॉर्क में समझदारी? मोहन भागवत के बयान पर भड़के कपिल सिब्बल, कह दी चुभने वाली बात! Kapil Sibal on Mohan Bhagwat

Nandani | Nedrick News Ghaziabad Published: 31 अगस्त 2026, 01:51 AM Updated: 31 अगस्त 2026, 01:51 AM
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Kapil Sibal on Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए एक बयान पर भारत में सियासी पारा चढ़ गया है। न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने कहा था कि ‘विविधता में एकता भारत के डीएनए में है’। अब उनके इसी बयान को लेकर वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सीधा निशाना साधा है। सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ अच्छी-अच्छी बातें बोलने से काम नहीं चलता, बल्कि यह जमीन पर काम में भी नजर आना चाहिए।

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कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना| Kapil Sibal on Mohan Bhagwat

निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए मोहन भागवत के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सिब्बल ने लिखा कि न्यूयॉर्क में मोहन भागवत कहते हैं—‘विविधता हमारी स्वाभाविक एकता का आभूषण है और इसकी रक्षा की जानी चाहिए।’

इस पर तंज कसते हुए सिब्बल ने आगे लिखा, “विदेश में समझदारी भरी बातें और देश में खामोशी। शब्दों से कुछ नहीं होता, काम बोलकर दिखाना चाहिए।” सिब्बल का सीधा इशारा इस बात की ओर था कि आरएसएस और उसके सहयोगी संगठन देश के भीतर जिस तरह की राजनीति करते हैं, वह विदेशों में दिए जाने वाले इन बयानों से मेल नहीं खाती।

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में क्या बोले थे संघ प्रमुख?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं। न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से ज्यादा लोगों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया। यह कार्यक्रम ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (AHAD) फोरम की ओर से आयोजित किया गया था।

अपने करीब एक घंटे के भाषण में भागवत ने कहा:

  • जब हम अमेरिका की बात करते हैं, तो अक्सर ‘बहुलतावाद’ (Pluralism) शब्द की चर्चा होती है। लेकिन जब हम भारत का जिक्र करते हैं, तो जुबान पर एक ही बात आती है, ‘विविधता में एकता’।
  • भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों ही उसके डीएनए (DNA) में बसे हैं।
  • विविधता कोई मजबूरी नहीं बल्कि हमारी स्वाभाविक एकता का आभूषण है। इसका उत्सव मनाया जाना चाहिए, इसे स्वीकार किया जाना चाहिए और इसका सम्मान होना चाहिए।

स्वामी विवेकानंद के संदेश का किया उल्लेख

अपने संबोधन के दौरान संघ प्रमुख ने स्वामी विवेकानंद के संदेश को याद करते हुए कहा कि हर देश के सामने एक बड़ा लक्ष्य होता है जिसे उसे पूरा करना होता है, और एक तय नियति होती है जिसे साकार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विविधता का सम्मान करते हुए हमें उस अंतर्निहित एकता की भावना को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि यही भारत का मूल स्वभाव है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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