न्याय व्यवस्था पर बड़ा दाग? पूर्व Justice Yashwant Verma जांच समिति में दोषी करार

Rajni | Nedrick News Delhi Published: 12 अगस्त 2026, 10:50 PM Updated: 12 अगस्त 2026, 10:50 PM
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Justice Yashwant Verma: जो सबूतों के आधार पर सही और गलत का फैसला करते हैं, आज वही कटघरे में दोषी करार दिए गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि देश की न्याय व्यवस्था आख़िर किन हाथों में सौंपी गई थी? दिल्ली स्थित सरकारी आवास से जली हुई नकदी मिलने के मामले में, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा पर लगे सभी आरोपों को तीन सदस्यीय जांच समिति ने सही पाया है। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के तहत तैयार यह विस्फोटक रिपोर्ट आज लोकसभा और राज्यसभा में पेश कर दी गई है, जिससे अब आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

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क्या थे आरोप?

जांच समिति (Judges Inquiry Committee) ने पूर्व जज यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Verma) के खिलाफ ‘आर्टिकल्स ऑफ चार्ज’ I, II और III के तहत तीनों आरोपों को पूरी तरह सिद्ध पाया है। ये आरोप निम्नलिखित हैं:

  • पहला आरोप : मार्च 2025 में उनके नई दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास (30, तुगलक क्रेसेंट) में आग लगने के बाद स्टोररूम से भारी मात्रा में जले हुए ₹500 के नोट मिले थे। पूर्व जज इस नकदी के स्रोत और मालिकाना हक पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
  • दूसरा आरोप: स्टोररूम में मिले भौतिक साक्ष्यों (नकदी) को सही तरीके से सुरक्षित नहीं रखा गया। कानूनी सील और निरीक्षण से पहले वहां सफाई करवाई गई, जिससे घटनास्थल की स्थिति बदल गई और सबूत नष्ट करने की कोशिश हुई।
  • तीसरा आरोप: जांच के दौरान जस्टिस वर्मा के बयानों में बार-बार बदलाव देखा गया। समिति ने उनके स्पष्टीकरणों को अधूरा और भ्रामक माना। इसके अलावा, वह अपने बचाव के लिए गवाह के तौर पर भी समिति के सामने पेश नहीं हुए।

जांच समिति का गठन और कार्रवाई

  • सांसदों की मांग और गठन: पूर्व जज ((Justice Yashwant Verma) के घर पर भारी मात्रा में नोट मिलने के बाद 200 से अधिक सांसदों ने उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। इसके बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था।
  • समिति के सदस्य: इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार ने की। इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर और वरिष्ठ अधिवक्ता बी. वी. आचार्य भी शामिल थे। समिति ने इस साल मई 2026 में अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी थी।
  • इस्तीफा और कानूनी पेंच: विवाद बढ़ने के बाद जस्टिस वर्मा ने अप्रैल 2026 में अपना इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, कानून मंत्रालय ने अभी तक उनके इस्तीफे को आधिकारिक रूप से अधिसूचित (Notify) नहीं किया है।
  •  कार्रवाई: इस्तीफा अधिसूचित न होने के कारण तकनीकी रूप से वह अभी भी सेवा में माने जा सकते हैं। इसी वजह से संसद में उनके खिलाफ महाभियोग (Impeachment) या हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया को जारी रखने को लेकर एक बड़ी कानूनी बहस छिड़ गई है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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