Ranchi Student Protest: क्या सत्ता के नशे में हुक्मरान यह भूल चुके हैं कि उन्हें जनता ने चुना है? सत्ता किसी की भी हो, लेकिन उसका ताज पहनने वाले अक्सर यह भूल जाते हैं कि वे जनता की सेवा के लिए चुने गए हैं। लोकतंत्र में जनता जनार्दन होती है, इसलिए शासकों को पूरी ईमानदारी के साथ अपना कार्यभार संभालना चाहिए, न कि अपने पद का दुरुपयोग करके जनता के साथ विश्वासघात करना चाहिए।
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ और परीक्षा प्रणाली में कथित धांधली के खिलाफ रांची में चल रहा छात्रों का आंदोलन व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई धांधली के खिलाफ छात्र नेता देवेंद्र महतो का आमरण अनशन इसी राजनीतिक बेरुखी के खिलाफ युवाओं की एक तीखी हुंकार है, जो साफ संदेश दे रही है कि जब सत्ता अपने वादों से मुकरती है, तो युवाओं का आक्रोश इसी तरह सड़कों पर उतरता है।
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Devendra Mahto का अनिश्चितकालीन अनशन जारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC CGL परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के खिलाफ अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने केवल अपना ‘वाटर फास्ट’ (बिना पानी का उपवास) खत्म किया है, उनका अनिश्चितकालीन अनशन यानी भूख हड़ताल (Ranchi Student Protest) अभी भी जारी है।
उन्होंने साफ किया कि मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के विशेष आग्रह पर उन्होंने केवल पानी और नमक ग्रहण किया है, लेकिन जब तक सरकार छात्रों की मांगें नहीं मानती, वे अन्न का एक दाना भी नहीं खाएंगे।
इससे यह सवाल उठना तो लाज़मी है कि क्या छात्रों को अपना भविष्य बचाने के लिए, अपने उसी भविष्य को दांव पर लगाकर सड़कों पर उतरना पड़ेगा? जिस युवा को देश का भविष्य कहा जाता है, आज उसकी आवाज़ को इस तरह अनसुना किया जा रहा है-अगर यही देश का विकास है, तो फिर पतन क्या होगा?
Sonam Wangchuk की भावुक अपील
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देवेंद्र महतो को वीडियो कॉल कर उनके गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता जताई। वांगचुक ने कहा कि बिना पानी के उपवास करना ‘आत्महत्या’ करने जैसा है, इसलिए उन्हें आंदोलन को लंबे समय तक जारी रखने के लिए पानी जरूर पीना चाहिए। उन्होंने समझाया कि अनशन का मतलब दूसरों की आत्मा को जगाना होता है, न कि खुद आत्महत्या करना।
लेकिन शायद इसीलिए कहा गया है कि सोए हुए इंसान को उठाना तो आसान है, मगर सोने का नाटक करने वालों को जगाना नामुमकिन होता है।
झारखंड में JPSC, JSSC CGL और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन तोड़ दिया है। देश के जाने-माने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देवेंद्र नाथ महतो से फोन पर विशेष… pic.twitter.com/hhafEfcrsA
— Nedrick News (@nedricknews) August 5, 2026
Devendra Mahto की बड़ी शर्त
छात्र नेता महतो ने पानी पीने के लिए सोनम वांगचुक के सामने एक बड़ी शर्त रखी। उन्होंने कहा कि वांगचुक को झारखंड के छात्रों के इस आंदोलन (Ranchi Student Protest) का अंत तक समर्थन करना होगा। सोनम वांगचुक द्वारा इस शर्त को सहर्ष स्वीकार करने और जल्द ही खुद रांची आकर छात्रों से मिलने का भरोसा देने के बाद ही महतो ने पानी और नमक ग्रहण किया।
Ranchi Student Protest पर क्या सरकार सुनेगी छात्रों का आवाज
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से उठी यह गूंज अब सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोनम वांगचुक जैसे राष्ट्रीय व्यक्तित्व के जुड़ने से इसने एक बड़ा रूप ले लिया है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का यह कड़ा स्टैंड कि वे “भविष्य बचाने के लिए अपना भविष्य दांव पर लगा देंगे” लेकिन पीछे नहीं हटेंगे यह साफ करता है कि युवाओं का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है।
अब गेंद पूरी तरह से सरकार और प्रशासन के पाले में है। लोकतंत्र में संवाद ही हर समस्या का समाधान होता है। ऐसे में व्यवस्था को ‘सोने का नाटक’ छोड़कर तुरंत जागना होगा और छात्रों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करना होगा। यदि समय रहते इस आक्रोश को शांत नहीं किया गया और परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो युवाओं का व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा, जो किसी भी लोकतांत्रिक राज्य के लिए सबसे बड़ा पतन होगा।











































