Safdarjung News: राजधानी के सफदरजंग अस्पताल ने हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने भारत का नाम वैश्विक मेडिकल जगत में और ऊंचा कर दिया है। अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के डॉक्टरों ने दुनिया में पहली बार एक बेहद दुर्लभ हृदय रोग से पीड़ित मरीज का रोबोटिक सिस्टमिक एट्रियोवेंट्रिकुलर वाल्व रिप्लेसमेंट सफलतापूर्वक किया है। अस्पताल के अनुसार, यह उपलब्धि विश्व स्तर पर अपनी तरह की पहली सर्जरी मानी जा रही है।
इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व CTVS विभाग के प्रमुख डॉ. अनुभव गुप्ता और डॉ. कविता शर्मा की टीम ने किया। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन आधुनिक तकनीक और सटीक योजना की मदद से ऑपरेशन सफल रहा।
मरीज को थीं जन्म से दो दुर्लभ हृदय संबंधी बीमारियां| Safdarjung News
अस्पताल के मुताबिक, मरीज जन्म से ही दो दुर्लभ हृदय रोगों से जूझ रहा था। पहली बीमारी कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज (CCTGA) थी, जिसमें दिल की आंतरिक संरचना सामान्य लोगों से अलग होती है। इसके कारण दिल के एक हिस्से को पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
दूसरी समस्या डेक्स्ट्रोकार्डिया थी, जिसमें दिल सामान्य रूप से बाईं ओर होने के बजाय सीने के दाईं तरफ होता है। समय के साथ मरीज का एक महत्वपूर्ण हार्ट वाल्व खराब हो गया था और उसमें रिसाव शुरू हो गया था। इससे हृदय की कार्यक्षमता लगातार प्रभावित हो रही थी और समय पर इलाज नहीं होता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
ऐसे किया गया दुनिया का पहला ऑपरेशन
डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीज के दिल की असामान्य स्थिति थी। आमतौर पर इस तरह की सर्जरी सीने के दाईं ओर से की जाती है, लेकिन इस मरीज का दिल दाईं तरफ होने के कारण डॉक्टरों ने पहली बार सीने की बाईं ओर से ऑपरेशन करने का फैसला लिया।
सर्जरी से पहले मरीज के दिल की थ्री-डी इमेज तैयार की गई, ताकि उसकी जटिल संरचना को विस्तार से समझा जा सके। इसके बाद पारंपरिक तरीके से छाती की हड्डी काटने के बजाय छोटे-छोटे चीरे लगाए गए। इन्हीं छिद्रों के जरिए रोबोटिक मशीन और हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे की मदद से वाल्व रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया पूरी की गई।
रोबोटिक तकनीक से मिले कई बड़े फायदे
इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से मरीज की छाती की हड्डी नहीं काटनी पड़ी। इसके कारण ऑपरेशन के दौरान खून कम बहा, संक्रमण का खतरा भी काफी कम रहा और मरीज को सामान्य सर्जरी की तुलना में कम दर्द हुआ।
अस्पताल ने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहा है और उसकी रिकवरी उम्मीद से बेहतर रही है। रोबोटिक सर्जरी की वजह से मरीज जल्द सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
भारतीय चिकित्सा जगत के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
सफदरजंग अस्पताल का कहना है कि दुनिया में पहली बार किसी ऐसे मरीज का यह रोबोटिक ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया है, जिसका दिल दाईं ओर था और जिसे जन्म से दो दुर्लभ हृदय रोग थे।
यह सफलता सिर्फ़ एक मरीज़ के इलाज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय डॉक्टरों की एक्सपर्टीज़, मॉडर्न टेक्नोलॉजी के उनके असरदार इस्तेमाल और मुश्किल सर्जरी करने की उनकी काबिलियत को भी दिखाती है। मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कामयाबी से भविष्य में ऐसे रेयर केस के इलाज में आसानी होगी और ग्लोबल हेल्थ सेक्टर में भारत की जगह और मजबूत होगी।
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