पाकिस्तान बना रहा इस्लामिक NATO लेकिन क्या भारत के पास भी है कोई रक्षा संधि? जानिए पूरा मामला| India Defence Deal

Nandani | Nedrick News Ghaziabad Published: 31 जुलाई 2026, 08:03 AM Updated: 31 जुलाई 2026, 08:03 AM
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India Defence Deal: पश्चिम एशिया में पाकिस्तान लगातार अपने रक्षा और रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुई रक्षा डील के बाद अब खबर है कि कुवैत भी इस तरह के समझौते में दिलचस्पी दिखा रहा है। इससे पहले पाकिस्तान तुर्की को भी इस सुरक्षा व्यवस्था में शामिल करने की बात कर चुका है। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत के पास भी किसी देश के साथ ऐसी कोई रक्षा संधि है, जिसमें हमले की स्थिति में दूसरा देश सैन्य मदद के लिए बाध्य हो। इसका सीधा जवाब है… नहीं।

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भारत का किसी देश के साथ NATO जैसी रक्षा संधि नहीं| India Defence Deal

भारत का दुनिया के किसी भी देश के साथ ऐसा कोई कानूनी रक्षा समझौता नहीं है, जिसमें यह प्रावधान हो कि भारत पर हमला होने की स्थिति में दूसरा देश उसे अपने ऊपर हमला मानेगा और सैन्य कार्रवाई करेगा। इसी तरह भारत भी किसी अन्य देश के युद्ध में अपने-आप शामिल होने के लिए बाध्य नहीं है। यह नीति आजादी के बाद से भारत की विदेश नीति की एक अहम पहचान रही है।

रणनीतिक स्वायत्तता रही भारत की प्राथमिकता

स्वतंत्रता के बाद भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) की नीति अपनाई। इसका उद्देश्य था कि देश किसी सैन्य गुट का हिस्सा न बने और अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश नीति तय करे। समय के साथ वैश्विक हालात बदले, लेकिन भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की नीति बरकरार रखी। इसका मतलब है कि भारत सभी प्रमुख देशों से अच्छे संबंध रखता है, लेकिन किसी ऐसे सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनता, जो भविष्य में उसे किसी और के युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर करे।

रूस सबसे बड़ा रक्षा साझेदार, लेकिन सैन्य सहयोगी नहीं

भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंध हैं। भारतीय सेना के कई प्रमुख हथियार, जैसे लड़ाकू विमान, टैंक, पनडुब्बियां, एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल रूस के सहयोग से विकसित या खरीदे गए हैं। दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है, लेकिन इसके बावजूद ऐसा कोई समझौता नहीं है जिसमें रूस भारत की ओर से युद्ध लड़ने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हो। दोनों देश रक्षा तकनीक साझा करते हैं, संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हैं, लेकिन एक-दूसरे की लड़ाई लड़ने की बाध्यता नहीं है।

1971 की भारत-सोवियत संधि भी NATO जैसी नहीं थी

अक्सर 1971 में भारत और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच हुई शांति, मैत्री और सहयोग संधि का उदाहरण दिया जाता है। हालांकि, इस समझौते में भी NATO जैसी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। इसमें केवल यह प्रावधान था कि यदि किसी पक्ष की सुरक्षा को खतरा होगा तो दोनों देश आपसी परामर्श करेंगे और हालात के अनुसार उचित कदम उठाएंगे। यानी इसमें स्वतः सैन्य हस्तक्षेप की कोई शर्त नहीं थी।

पाकिस्तान-सऊदी मॉडल क्यों है अलग?

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ रक्षा समझौता सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा पर आधारित माना जाता है। इसमें दोनों देशों ने इस सिद्धांत पर सहमति जताई है कि किसी एक पर बाहरी हमला दोनों की सुरक्षा से जुड़ा मामला माना जाएगा। पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब में सैनिक, सैन्य प्रशिक्षक और सुरक्षा सलाहकार तैनात करता रहा है, जबकि बदले में सऊदी अरब उसे आर्थिक सहयोग, निवेश और ऊर्जा क्षेत्र में सहायता देता है। यदि भविष्य में कुवैत और तुर्की जैसे देश भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं तो पाकिस्तान का पश्चिम एशिया में सुरक्षा नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।

युद्ध की स्थिति में भारत को किस तरह मिल सकता है समर्थन?

अगर भविष्य में चीन या पाकिस्तान के साथ बड़ा सैन्य संघर्ष होता है तो कोई भी देश भारत की ओर से युद्ध लड़ने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं होगा। हालांकि इसका यह मतलब भी नहीं है कि भारत पूरी तरह अकेला रह जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में रूस रक्षा उपकरणों और हथियारों की आपूर्ति बढ़ा सकता है। अमेरिका खुफिया जानकारी, निगरानी तकनीक और लॉजिस्टिक सहायता दे सकता है। वहीं फ्रांस और इजरायल भी रक्षा तकनीक और सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन यह सहयोग उस समय की कूटनीतिक परिस्थितियों और दोनों देशों के संबंधों पर निर्भर करेगा।

क्वाड कोई सैन्य गठबंधन नहीं

भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड (Quad) समूह का सदस्य है। हालांकि, इसे अक्सर एशिया का NATO कहा जाता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। क्वाड किसी सामूहिक रक्षा संधि पर आधारित संगठन नहीं है। इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला होने पर बाकी सदस्य युद्ध में शामिल होंगे। क्वाड का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, साइबर सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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