Paper leak cases: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने देश का पहला विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दिया। यह अदालत नए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 यानी एंटी-चीटिंग कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेगी।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक के मामलों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करना है।
दिल्ली में बना देश का पहला विशेष कोर्ट| Paper leak cases
दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय के निर्देश पर जारी अधिसूचना के अनुसार, नए एंटी-चीटिंग कानून के तहत दर्ज सभी लंबित मामलों को अब इस विशेष अदालत में स्थानांतरित किया जाएगा। राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स में स्थापित इस फास्ट ट्रैक कोर्ट की जिम्मेदारी दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा की जज अनु ग्रोवर बालीगा को सौंपी गई है। वह स्पेशल CBI जज के रूप में इन मामलों की सुनवाई करेंगी।
Nothing is more important than the welfare and future of our youth!
We have decided to set up fast-track courts to ensure swift and stringent punishment for those involved in paper leaks. Have directed the concerned authorities and officials to take all necessary steps in this…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 23, 2026
यह अदालत NEET, UPSC, SSC, NTA और अन्य प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों का तेजी से निपटारा करेगी।
कानून में क्या है प्रावधान?
सरकार ने हाल ही में लागू किए गए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के जरिए परीक्षा में नकल, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
PM Modi ने सुबह किया था ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द और कठोर सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। साथ ही संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। प्रधानमंत्री की इस घोषणा के कुछ ही घंटों बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पहला विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दिया।
कई राज्यों में भी होगी कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के बाद पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी ऐसे विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि पेपर लीक से जुड़े दो मामले बॉम्बे हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में हैं, जबकि अन्य मामले दिल्ली, कोलकाता और मध्य प्रदेश से जुड़े हुए हैं।
सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी किए बदलाव
NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के लगातार प्रदर्शन और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन के बीच सरकार ने कई प्रशासनिक फैसले भी लिए। उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर उन्हें पंचायती राज मंत्रालय भेज दिया गया। उनकी जगह नरेश गंगवार को नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं टी.के. अनिल कुमार को शिक्षा सचिव बनाया गया है। इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में इस पूरे मामले पर कई उच्चस्तरीय बैठकें भी हुईं।
CJP ने उठाए जवाबदेही के सवाल
उधर, CJP ने प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत तो किया, लेकिन इसे अधूरा बताया। पार्टी का कहना है कि केवल सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी तय होना चाहिए कि पेपर लीक हो क्यों रहे हैं। CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक जंतर-मंतर पर उनका आंदोलन जारी रहेगा।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यह अच्छी बात है कि लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने इस मुद्दे पर कदम उठाया है। लेकिन असली सवाल यह है कि पेपर लीक की घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं। उनका कहना था कि केवल दोषियों को सजा देने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी, बल्कि व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।





























