Jaswant Singh Khalra की बायोपिक पर क्यों मचा बवाल? सिर्फ 2 दिन में ही ओटीटी प्लेटफॉर्म से क्यों हटानी पड़ी Satluj?

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 07 जुलाई 2026, 09:30 PM Updated: 07 जुलाई 2026, 09:30 PM
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Jaswant Singh Khalra: 3 जुलाई की रात को एक फिल्म, जिसपर बैन होने का खतरा मंडरा रहा था अचानक नाम बदल कर ओटीटी फ्लेटफॉर्म जी 5 पर रीलीज की गई.. फिल्म का नाम था सतलुज.. लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि जिस विवाद और डर के कारण इस फिल्म का नाम बदला गया और आनन फानन में इसे रिलीज किया गया, वो डर तब भी सही साबित हुआ और रिलीज के मात्र 48 घंटे बाद ही फिल्म को हटा दिया गया.. सतलुज फिल्म के लीड एक्टर है पंजाबी सिंगर औऱ एक्टर दिलजीत दोसांझ।

उनकी पिछली फिल्म सरदार जी 3 के साथ भारत में जो हुआ, उसके बाद से ही उनके सितारे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में तो गर्दिश में है ही, लेकिन फिल्म सतलुत के हटाने के बाद लोगों की काफी तीखी प्रतिक्रिया आ रही है.. कुछ लोगो ने इस पर सवाल उठाये तो कुछ ने कहा कि ये हटनी ही चाहिए, क्योंकि ये फिल्म भारत की नेशनल सिक्यूरिटी पर बड़ा खतरा साबित हो सकती है। अब सवाल ये है कि आखिर क्या है इस फिल्म में.. जिसे लेकर नोर्म इतने सख्त कर दिये गए.. जानते है क्या है सतलुज में विवादित।

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जसवंत सिंह खालरा की संवेदनशील कहानी

ये फिल्म 1995 के दौर के पंजाब की है, जब जसवंत सिंह खालरा जो कि ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट थे, उन्होंने पंजाब में तब चल रहे कुछ ऐसे ज्वलंतशील मुद्दो को उठाया था, जिसने सरकार की नींव हिला दी थी..फिल्म सतलुज असल में साल 2022 में ही रीलिज होने वाली थी, और तब इसका नाम घल्लूघारा था.. जिसका हिंदी में मतलब होता है नरसंहार। जिस पर सेंसर बोर्ड ने पंजाब की लेगेसी इस नाम से जुड़ी होने के कारण नाम बदलने को कहा था, जिसके बाद इसका नाम रखा गया था पंजाब 1995.. इस नाम के पीछे का कारण भी काफी सेंसीटिव था, 1995 में ही पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या की गई थी तो वहीं सतलुत जिन सोशल एक्टीविस्ट यशवंत सिंह खालरा पर बेस्ड है उनकी भी हत्या उसी साल हुई थी। ये नाम सीधा पंजाब की राजनीति में भूचाल लाने जैसा था।

इसलिए इस नाम को भी स्वीकार नहीं किया गया। वहीं सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म में 123 कट लगाने की शर्त रखी थी, और रीलिज से पहले ही ये ठंडे बस्ते में चली गईं.. करीब 3 साल के इंतजार के बाद 3 जुलाई को फिल्म का नाम सतलुज रख कर मेकर्स ने जी5 पर रीलीज करने की बड़ी हिम्मत दिखाई.. लेकिन जैसी की डर था.. जी5 ने बिना किसी स्पष्टीकरण के फिल्म को 48 घंटो में ही हटा दिया… अब सवाल कि फिल्म का सतलुज नाम से क्या कनेक्शन है.. तो चलिये आपको बताते है.. लेकिन उससे पहले बात करेंगे उस शख्स के बारे में जिसकी कहानी सतलुत में कही गई है।

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दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का रोल प्ले किया

फिल्म की कहानी में दिलजीत दोसांझ जसवंत सिंह खालरा का रोल प्ले कर रहे है, जो 90 के दशक में पंजाब के पंजाब में फैले आतंकवाद के प्रकोप के बीच 25 हजार से भी ज्यादा बेकसूरों को पूछताछ के नाम पर पुलिस द्वारा चुपचाप उठाये जाने और उनकी हत्या करके उनका चोरी छिपे अंतिम संस्कार करके लापता होने की टैग लगाने का सनसनीखेज खुलासा किया था। इतना ही नहीं खालरा ने ये भी खुलासा किया करीब 2000 पुलिस वालों की भी हत्या की गई जिन्होंने इस नरसंहार करने वाले पुलिस की मदद करने से इंकार कर दिया था। उन्होंने ये मुद्दा केवल भारत में ही नहीं बल्कि कनाडा, ब्रिटेन समेत कई देशों में जाकर मानव अधिकार हनन और पंजाब पुलिस द्वारा बेगुनाहों की हत्या औऱ उनके चोरी छिपे अंतिम संस्कार किये जाने  का खुलासा किया था.. जसवंत सिंह की ये खोज उनके दोस्त दारा सिंह के अचानक लापता होने के बाद शुरु हुई थी, जिसने उन्हें पंजाब पुलिस के उस क्रूर रूप से मिलाया था, जिसे जानने के बाद सबकी रूंह कांप गई।

सतलुज नदी से यशवंत सिंह खालरा की डेड बॉडी मिली

जसवंत सिंह खालरा के इस खुलासे के बाद पंजाब में खूनी उबाल आया था, जिसका नतीजा ये हुआ था कि 6 सितंबर 1995 में जसवंत सिंह खालरा को चुप कराने के लिए उनके ही घर के बाहर जब वो अपनी गाड़ी धो रहे थे, अगवा कर लिया गया था और ये अगवा करने वाले भी पंजाब पुलिस के अधिकारी थे। करीब डेढ़ महीने तक लापता रहने के बाद पंजाब की सतलुज नदी से ही यशवंत सिंह खालरा की डेड बॉडी रिकवर हुई थी, उन्हें गोली मारी गई थी। जसवंत सिंह तरणतारण जिले थे, और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई ) की रिपोर्ट के मुताबित केवल तरणतारण में ही पुलिस ने गैरकानूनी रूप से 1991 से लेकर 1994 के बीच 2,097 लोगों का अंतिम संस्कार किया था। 80 और 90 के दशक में पंजाब में जब उग्रवाद चरम पर था तब पंजाब पुलिस को ये अधिकार दिया गया था कि वो किसी भी संदिग्ध को बिना वारंट के उठा सकते है, जिसका फायदा उठा कर पंजाब पुलिस ने बेगुनाह सिखों के नरसंहार का खेल रचा था।

जसवंत सिंह खालरा की हत्या

जसवंत सिंह खालरा की हत्या की जांच सीबीआई ने की औऱ 6 पुलिस कर्मियों को दोषी पाया गया, जिन्हें करीब 10 साल बाद 18 नवंबर 2005 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सीबीआई ने जांच में बताया कि जसवंस सिंह को अगवा करने में पंजाब पुलिस के महानिदेशक कंवर पाल सिंह गिल मुख्य साजिशकर्ता थे। पुलिस ने तरनतारण के एक पुलिस स्टेशन में रख कर काफी टॉर्चर किया किया गया था और फिर उन्हें गोली मारी गई थी। जसवंत सिंह खालरा ने इस फिल्म को लेकर बयान दिया है कि उन्होंने ये फिल्म देखी है औऱ इस फिल्म में ज्यादातर वो सब कुछ है जो उनके पति से जुड़ा है, और सही है।

भले ही फिल्म भारत में जी5 से हटा दी गई है लेकिन ZEE5 ग्लोबल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये उपलब्ध रहेगी। जी 5 की तरफ से एक ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी हुई जिसमें कहा गया कि मौजूदा हालातो को देखते हुए फिलहाल के लिए अगली सूचना आने तक फिल्म को हटा दी गई.. कानूनी प्रक्रिया को पूरी करने के बाद फिल्म को फिर से लाई जायेगी।

वहीं दिलजीत दोसांझ ने भी लाइव आकर कहा कि फिल्म के साथ वहीं किया गया जो जसवंत सिंह खालरा के साथ किया गया था। दिलजीत ने कहा कि कुछ लोग मुझे जितना चाहे परेशान कर सकते है, लेकिन मैं मरने तक पंजाब के साथ हूं। लोगों ने फिल्म डाउनलॉड कर लिया है और उन्होंने कहा कि जिन्होंने फिल्म डाउनलॉड की हो वो दूसरो को भी दिखायें। अब देखना ये होगा कि वाकई में ये फिल्म दोबारा आयेगी.. या लोग कुछ दिनों में इस घटना को भी भूल जायेंगे।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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