Hrithik Roshan: ‘कहो ना प्यार है’ फिल्म से करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करने वाले ऋतिक रोशन का फिल्मी सफर इतना आसान नहीं था। जहाँ एक तरफ उन्होंने अपने बचपन में ही बड़े पर्दे की दुनिया में कदम रख दिया था, वहीं दूसरी ओर एक वक्त ऐसा भी आया जब उनका फिल्मी करियर उनसे हमेशा के लिए दूर होने वाला था! आज बात करेंगे ऋतिक रोशन के ‘Stammering से Greek God’ तक के उस सफर की, जो आपको अंदर तक हिला देगा!
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व्हीलचेयर की आ गई थी नौबत
एक समय ऐसा था जब ऋतिक (Hrithik Roshan ) बोलने की कोशिश करते, तो उनके शब्द अटक जाते थे, और डांस करने की सोचते, तो डॉक्टर उन्हें व्हीलचेयर का डर दिखाते थे। लेकिन आज जब वे स्क्रीन पर आते हैं, तो पूरी दुनिया बस देखती रह जाती है, इस सफर की शुरुआत होती है साल 1980 से। जब महज 6 साल के छोटे से ऋतिक अपने नाना जे. ओम प्रकाश की फिल्म ‘आशा’ के सेट पर घूम रहे थे। सेट पर गाना बज रहा था और ऋतिक बिना किसी तैयारी के अभिनेता जितेंद्र के सामने अचानक डांस करने लगे।
उनके नाना को यह अंदाज़ इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे फिल्म का हिस्सा बना लिया और ऋतिक को उनकी पहली सैलरी के रूप में 100 रुपये मिले। इसके बाद उन्होंने ‘आप के दीवाने’ और साल 1986 में आई फिल्म ‘भगवान दादा’ में सुपरस्टार रजनीकांत के साथ एक बाल कलाकार के रूप में काम किया। पर्दे पर इस हंसते-खेलते बच्चे को देखकर कोई नहीं जान सकता था कि कैमरे के पीछे उसकी ज़िंदगी में कितना बड़ा तूफान चल रहा था।
Hrithik Roshan के classmates उड़ाते थे मज़ाक
एक ऐसा तूफान जिसने Hrithik Roshan के पूरे बचपन को डर और अकेलेपन से भर दिया। दरअसल, ऋतिक को बचपन से ही गंभीर रूप से हकलाने (Stammering) की समस्या (Problem) थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद बताया था कि उनके लिए बचपन किसी नर्क जैसा था। वे स्कूल जाने से कतराते थे क्योंकि सहपाठी (classmates) उनका मज़ाक उड़ाते थे। खासकर ओरल एग्जाम्स (Oral Exams) के दिनों में वे अक्सर बीमार होने का बहाना बनाते थे ताकि उन्हें सबके सामने बोलना न पड़े। स्कूल के बाद वे घंटों अकेले रोया करते थे। लेकिन ऋतिक ने अपनी इस कमजोरी के आगे घुटने नहीं टेके।
इस समस्या से उबरने के लिए ऋतिक ने कड़ी मेहनत शुरू की। उन्होंने स्पीच थेरेपी का सहारा लिया। वे हर दिन आईने के सामने खड़े होकर घंटों शब्दों का अभ्यास करते थे। एक-एक शब्द को सही से बोलने के लिए वे एक्सरसाइज करते थे। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उनके अटूट जज्बे ने रंग दिखाया। आज भी, इतने बड़े सुपरस्टार होने के बावजूद, ऋतिक अपनी आवाज के तालमेल को बनाए रखने के लिए रोजाना स्पीच एक्सरसाइज करते हैं।
21 साल की उम्र में लगा झटका
अभी हकलाहट से जंग जीती ही थी कि 21 साल की उम्र में ऋतिक (Hrithik Roshan ) को एक और गहरा झटका लगा। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें स्कोलियोसिस (Scoliosis) नाम की बीमारी है, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी एक तरफ झुक गई थी। डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि वे कभी फिल्मों में डांस या स्टंट नहीं कर पाएंगे, और अगर उन्होंने ऐसा किया तो वे हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ सकते हैं। इस खबर ने ऋतिक को अंदर से तोड़ दिया और वे करीब एक साल तक बिस्तर पर रहे। लेकिन, जो किस्मत से लड़ना जानते हैं, वो हार कहाँ मानते हैं!
साल 2000 में रचा इतिहास
लगभग एक साल तक बिस्तर पर रहने के बाद, ऋतिक (Hrithik Roshan ) ने हार मानने के बजाय खुद को फिर से खड़ा किया। उन्होंने डॉक्टरों की चेतावनी को एक चुनौती की तरह लिया। स्पेशल वर्कआउट, कड़ी फिजियोथेरेपी और अपनी रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। और फिर साल 2000 में वो दिन आया, जिसने भारतीय सिनेमा का इतिहास बदल दिया। फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ से उन्होंने एक ऐसा धमाकेदार डेब्यू किया, जिसने रातों-रात पूरे देश में ऋतिक रोशन का एक ऐसा जबरदस्त क्रेज़ पैदा कर दिया जो बॉलीवुड में पहले कभी नहीं देखा गया था।
लेकिन बॉलीवुड का किंग बनना इतना भी आसान नहीं था। पहली फिल्म की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद, ऋतिक की अगली कई फिल्में लगातार फ्लॉप साबित हुईं। जब लोगों को ऐसा लगा कि ऋतिक का करियर अब खत्म हो चुका है। पर इस अभिनेता ने फिर से अपनी मेहनत और लगन से सबको हैरान कर दिया। साल 2003 में आई फिल्म ‘कोई… मिल गया’ में एक मानसिक रूप से कमजोर लड़के ‘रोहित’ का किरदार निभाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक अच्छे डांसर ही नहीं, बल्कि एक कमाल के अभिनेता भी हैं।
पहली बड़ी सुपरहीरो फिल्म
इसके बाद Hrithik Roshan ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। चाहे भारत की पहली बड़ी सुपरहीरो फिल्म ‘क्रिश’ हो, ‘धूम 2’ का वो स्टाइलिश चोर ‘आर्यन’ हो, या फिर ‘जोधा अकबर’ के शहंशाह अकबर का किरदार—उन्होंने हर रोल में खुद को पूरी तरह झोंक दिया। हाल ही में आई ‘सुपर 30’, ‘वॉर’ और ‘फाइटर’ जैसी फिल्मों से उन्होंने यह साबित कर दिया है कि समय बदल सकता है, लेकिन उनका स्टारडम हमेशा बरकरार रहेगा।
जिसको डॉक्टरों ने व्हीलचेयर का डर दिखाया था, आज वो अपनी शानदार एक्टिंग, बेमिसाल डांसिंग स्किल्स और मस्कुलर बॉडी की बदौलत बॉलीवुड का अल्टीमेट ‘Greek God’ कहलाता है। ऋतिक रोशन का यह सफर हमें सिखाता है कि अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो दुनिया की कोई भी बीमारी या कमजोरी आपको आपकी मंजिल तक पहुँचने से नहीं रोक सकती।





























