Pakistan gurdwara demolition: पाकिस्तान में हिंदू और सिखों की स्थिति कैसी है वो आज दुनिया से छिपी नहीं है। 1947 में जब पाकिस्तान भारत से अलग हुआ था तब पाकिस्तान के हिस्से में करीब 20 से 23 प्रतिशत हिंदू और सिख रहा करते थे, लेकिन बीचे 7 दशकों में न केवल हिंदूओ और सिखों के साथ कट्टरपंथियों ने अत्याचार की हदें पार कर दी, बल्कि उनके घर की औरतो को सार्वजनिक तौर पर अपहरण करके जबरन धर्म परिवर्तन कराने के मामले हर साल देखने को मिले। एक इस्लामिक देश होने के कारण वहां रहने वाले हिंदूओ और सिखों को बेसिक सुविधायें भी नहीं मिलती.. तो भला जरा सोचिये कि वो अपने धर्म स्थलों की रक्षा कैसे करेंगे.. जिसका नतीजा ये हुआ कि पिछले 7 दशको में हिंदू और सिखो की संख्या केवल 1.5 प्रतिशत और 2.1 प्रतिशत ही रह गई है।
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कट्टरपंथियों ने 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरूद्वारे को तोड़ा
वहीं 1947 की रिपोर्ट बताती है कि उस वक्त पाक में 1817 मंदिर और गुरुद्वारे थे, लेकिन इतने सालों में 1770 के आसपास मंदिरो, गुरुद्वारों को सरकार की उपेक्षा, कट्टरपंथियों के अवैध कब्जों और दंगे फसाद के कारण पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया.. एक ऐसा ही गुरुद्वारा फिर से तबाह हुआ है.. जी हां, पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र से एक ऐसी ही दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहां इस्लामिक कट्टरपंथियों ने 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरु श्री सिंह सभा को जमींदोज कर दिया है। ये गुरुद्वारा पंजाब के फारूकाबाद के अंतर्गत आने वाले मंडी चूहड़काना में स्थित था। हालांकि देखरेख के बिना पहले से ही ये गुरुद्वारा काफी जर्जर स्थिति में था, लेकिन फिर भी वहां रहने वाले अल्पसंख्यक सिखो के लिए ये उनकी आस्था का प्रतीक था।
सिखों की ही भावनाओं को ठेस पहुंचाया
लेकिन 24 जून की रात को भू माफियाओं ने वहां के सरकारी अधिकारियों के साथ मिली भगत करके रात के अँधेरे का फायदा उठा कर गुरुद्वारा गुरु श्री सिंह सभा के जर्जर हिस्से को भी अज्ञात बदमाशों द्वारा पूरी तरह के ध्वस्त कर दिया गया। इस घटना ने वहां रहने वाले केवल सिखों की ही भावनाओं को ही ठेस नहीं पहुंचाया बल्कि दुनियाभर के सिखों की आस्था को ठेस पहुंची है और पाक की इस नापाक हरकत पर पाकिस्तान एक बार फिर से अल्पसंख्यकों और उनकी धरोहरो की सुरक्षा को लेकर घेरा जा रहा है।
गुरुद्वारे वाली जगह को सील कर दिया
इतना ही नहीं गुरुद्वारा को नुकसान पहुंचाने को लेकर इस बार वहां रहने वाले सिखों में इतना ज्यादा रोष है कि वो पाक में सिखों के प्रतिनिधि करने वाले संगठन के साथ मिलकर वो भी भारी संख्या में धरना प्रदर्शन करने लगे.. उनका ये उग्र रूप देखकर प्रशासन को झुकना पड़ा और तोड़फोड़ को काम को तुरंत रोकना पड़ा और गुरुद्वारे वाली जगह को सील कर दिया है, साथ ही वहां अनिश्चितकाल के लिए रोक भी लगा दी गई है। हालंकि बावजूद इसके आरोपियो के खिलाफ जायज कार्रवाई नहीं की गई। वो लोग लगातार पाकिस्तान सरकार से अल्पसंख्यको की धरोहरों को बचाने की मांग कर रहे है, लेकिन ये बेहद हास्यस्पद है कि जो अपनी सरकार को ढंग से नही बचा पाते है, वो दूसरो की रक्षा कहां से करेंगे।
सिखों ने अपनी ताकत का नमूना पेश किया
इतिहातकारो के अनुसार गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, सिंह सभा आंदोलन की एक निशानी की तौर पर यहां खड़ा था। जो कि गुरुद्वारा श्री सच्चा सौदा साहिब के पास मौजूद था। सिंह सबा आंदोलन 19वी सदी का एक ऐसा आंदोलन था जिसमें सिखों की धार्मिक पहचान और उनकी धरोहरो को संरक्षित करने के लिए शुरु किया गया था। लेकिन गुरुद्वारे के ध्वस्त होने के बाद सिखों की नाराजगी ने शायद प्रशान को सोचने पर मजबूर जरूर कर दिया होगा। यानि की अभी तो सिखों ने अपनी ताकत का नमूना पेश कर दिया है और बता दिया है कि बात जब उनके धर्म की धरोहर को बचाने को होगी तो वो एकजुट जरूर होंगे, अब देखना ये होगा कि पूरी दुनिया में मिट्टी पलीत होने के बाद पाकिस्तान की सरकार अल्पसंख्यको और उनकी धरोहरो को बचाने के लिए कौन सा नया बहाना बनाता है ताकि उनकी बचीखुची साख बच सकें।





























