क्या प्लास्टिक की सरिया लोहे से भी ज्यादा मजबूत है? कीमत और मजबूती का पूरा हिसाब जानिए| GFRP vs Steel Rebar

👤 Nandani | Nedrick News 📍 Ghaziabad 🕒 Published: 30 जून 2026, 12:59 PM 🔄 Updated: 30 जून 2026, 12:59 PM
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GFRP vs Steel Rebar: लंबे समय से घर, पुल और दूसरी इमारतों के निर्माण में लोहे की सरिया का इस्तेमाल सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता रहा है। लेकिन अब निर्माण क्षेत्र में एक नई तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसे GFRP (Glass Fiber Reinforced Polymer) सरिया या फाइबर सरिया कहा जाता है। कई जगहों पर इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, जिसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या प्लास्टिक से बनी यह सरिया वास्तव में लोहे की सरिया से ज्यादा मजबूत है और क्या यह खर्च के लिहाज से भी बेहतर साबित हो सकती है।

दरअसल, GFRP सरिया सामान्य प्लास्टिक से नहीं बनती। इसे ग्लास फाइबर और विशेष प्रकार की रेजिन को मिलाकर तैयार किया जाता है। यही वजह है कि इसकी मजबूती सामान्य प्लास्टिक की तुलना में कहीं अधिक होती है। इसकी बाहरी सतह को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि कंक्रीट के साथ इसकी पकड़ मजबूत बनी रहे और निर्माण को बेहतर मजबूती मिल सके।

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क्यों बढ़ रहा है GFRP सरिया का इस्तेमाल? GFRP vs Steel Rebar

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सरिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जंग नहीं लगती। लोहे की सरिया समय के साथ नमी और पानी के संपर्क में आकर कमजोर पड़ सकती है, लेकिन GFRP सरिया पर जंग का असर नहीं होता। यही कारण है कि समुद्री इलाकों, पुलों, नालियों और अधिक नमी वाले क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

इसके अलावा यह वजन में भी काफी हल्की होती है। हल्का होने की वजह से इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है और निर्माण स्थल पर भी मजदूर इसे आसानी से संभाल सकते हैं। इससे परिवहन और हैंडलिंग में भी सुविधा मिलती है।

मजबूती और टिकाऊपन में कैसी है?

निर्माण क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि GFRP सरिया की तनाव सहने की क्षमता (Tensile Strength) कई मामलों में पारंपरिक स्टील सरिया से अधिक हो सकती है। हालांकि इसका पूरा इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग डिजाइन के टाइप पर निर्भर करता है। इसकी एक और बड़ी विशेषता इसकी लंबी उम्र है। माना जाता है कि यह लगातार नमी वाले वातावरण में भी 80 से 100 वर्ष तक टिक सकती है। इसके अलावा इसमें बिजली का करंट भी प्रवाहित नहीं होता, इसलिए कुछ विशेष प्रकार के निर्माण कार्यों में यह अतिरिक्त सुरक्षा भी प्रदान करती है।

हर जगह क्यों नहीं होती इसका इस्तेमाल?

जहां इसके कई फायदे हैं, वहीं कुछ सीमाएं भी हैं। सबसे बड़ी कमी यह है कि GFRP सरिया को स्टील की तरह आसानी से मोड़ा नहीं जा सकता। इसलिए इसका उपयोग हर प्रकार के निर्माण में नहीं किया जाता। आमतौर पर इसे उन परियोजनाओं में प्राथमिकता दी जाती है, जहां पहले से तय डिजाइन के अनुसार सीधे सरिये की जरूरत होती है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल पुलों, सड़क डिवाइडरों, ड्रेनेज सिस्टम, नालियों और कुछ विशेष संरचनाओं में अधिक देखने को मिलता है।

कीमत ज्यादा, लेकिन क्या पड़ती है सस्ती?

पहली नजर में GFRP सरिया महंगी लग सकती है। जहां स्टील की सरिया की कीमत लगभग 40 हजार रुपये प्रति टन के आसपास हो सकती है, वहीं फाइबर सरिया की कीमत करीब 1 लाख रुपये प्रति ट तक पहुंच सकती है। हालांकि केवल प्रति टन कीमत देखकर तुलना करना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। चूंकि GFRP सरिया स्टील के मुकाबले काफी हल्की होती है, इसलिए समान वजन में इसकी लंबाई और मात्रा ज्यादा मिलती है। यानी एक टन फाइबर सरिया से उतना या उससे भी अधिक काम हो सकता है, जितना लगभग दो टन स्टील सरिया से किया जाता है। यही वजह है कि कई परियोजनाओं में इसकी कुल लागत प्रतिस्पर्धी या किफायती साबित हो सकती है।

किसके लिए बेहतर विकल्प?

विशेषज्ञों का मानना है कि GFRP सरिया स्टील की पूरी तरह जगह लेने नहीं आई है, बल्कि यह विशेष परिस्थितियों में एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आई है। जहां जंग, नमी, बिजली या वजन जैसी चुनौतियां हों, वहां इसका उपयोग काफी फायदेमंद हो सकता है। वहीं सामान्य भवन निर्माण में कौन-सी सरिया इस्तेमाल होगी, इसका फैसला हमेशा परियोजना की जरूरत और इंजीनियर की सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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