Europe AC Rules: इस साल भीषण गर्मी का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। यूरोप के कई देशों में भी तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि जिन देशों में कभी एयर कंडीशनर (AC) की ज्यादा जरूरत महसूस नहीं होती थी, वहां अब लोग इन्हें खरीदने के लिए दुकानों पर टूट पड़े हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर वायरल हो रहे कई वीडियो में सुपरमार्केट के अंदर लोगों की भीड़ साफ दिखाई दे रही है। वीडियो में लोग AC, पोर्टेबल कूलिंग डिवाइस, पंखे और घर को ठंडा रखने वाले दूसरे उपकरण तेजी से खरीदते नजर आ रहे हैं। कई जगह तो हालात ऐसे बन गए कि लोग एक-दूसरे से सामान छीनते हुए भी दिखाई दिए।
दरअसल, यूरोप इस समय लंबे समय तक चलने वाली भीषण गर्मी और लू जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की दिनचर्या बदल दी है और अब घरों को ठंडा रखना सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।
यूरोप में AC का इस्तेमाल अब भी क्यों है कम? Europe AC Rules
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में एयर कंडीशनर आम जरूरत बन चुके हैं। लेकिन यूरोप की स्थिति इससे काफी अलग है। इसकी सबसे बड़ी वजह वहां की जलवायु है। यूरोप के अधिकांश हिस्सों में साल का बड़ा हिस्सा ठंडा रहता है, जबकि गर्मी का मौसम अपेक्षाकृत छोटा होता है। इसी कारण वहां के अधिकांश घरों में AC लगाने की परंपरा कभी विकसित नहीं हो सकी।
लोग आमतौर पर पंखे, प्राकृतिक वेंटिलेशन या घरों को ठंडा रखने के दूसरे साधनों का इस्तेमाल करते रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ती गर्मी ने इस सोच को बदलना शुरू कर दिया है।
अमेरिका और यूरोप में बड़ा अंतर
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में करीब 90 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनर मौजूद हैं। इसके मुकाबले यूरोप में केवल करीब 20 प्रतिशत लोग ही AC का इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि अचानक बढ़ी मांग के कारण कई देशों में एयर कंडीशनर की कमी महसूस होने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में हीटवेव की घटनाएं पहले की तुलना में ज्यादा और अधिक तीव्र होती जा रही हैं। ऐसे में भविष्य में वहां एयर कंडीशनर की मांग और बढ़ सकती है।
पुराने शहरों में AC लगाना आसान नहीं
यूरोप में AC की कम संख्या की एक बड़ी वजह वहां की ऐतिहासिक इमारतें भी हैं। इटली, फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों के कई शहर सदियों पुराने भवनों के लिए प्रसिद्ध हैं। इन इमारतों में किसी भी तरह का बाहरी बदलाव करने पर सख्त नियम लागू होते हैं। स्थानीय प्रशासन ऐतिहासिक इमारतों की मूल बनावट और सुंदरता को सुरक्षित रखना चाहता है। ऐसे में दीवारों में बदलाव करना या बाहरी यूनिट लगाना आसान नहीं होता। कई जगहों पर इसके लिए स्थानीय निकायों और हाउसिंग सोसायटी से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।
हालांकि नई कमर्शियल बिल्डिंग और आधुनिक आवासीय परियोजनाओं में AC लगाना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन वहां भी कुछ तकनीकी और प्रशासनिक नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
किराएदारों के लिए और भी बड़ी परेशानी
यूरोप के कई देशों में बड़ी आबादी किराए के मकानों में रहती है। खासतौर पर जर्मनी, डेनमार्क और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में लगभग आधी आबादी किराए के घरों में निवास करती है। ऐसे घरों में रहने वाले लोगों के लिए एयर कंडीशनर लगवाना और भी मुश्किल हो जाता है। अधिकांश मामलों में मकान मालिक बिना अनुमति किसी तरह की स्थायी इंस्टॉलेशन की इजाजत नहीं देते। यदि अनुमति मिल भी जाए, तो उसके साथ कई शर्तें जुड़ी होती हैं, जिससे पूरा काम काफी महंगा हो जाता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग पोर्टेबल AC, कूलिंग फैन, एयर कूलर या अन्य कम लागत वाले विकल्पों की तलाश करते हैं।
वायरल वीडियो ने खींचा लोगों का ध्यान
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस समय खूब चर्चा में हैं। इनमें सुपरमार्केट के बाहर लंबी कतारें और अंदर AC तथा कूलिंग उपकरण खरीदने की होड़ साफ दिखाई दे रही है। कई लोग एक साथ कई उपकरण खरीदते नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर सीमित स्टॉक होने के कारण ग्राहकों के बीच अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी देखने को मिली।




























