कहीं फेसबुक दोस्ती से लाखों की ठगी तो कहीं पर्यटकों का बवाल | Top 5 Ghaziabad News

Rajni | Nedrick News Ghaziabad Published: 26 Jun 2026, 07:14 AM | Updated: 26 Jun 2026, 07:14 AM

Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद की पांच बड़ी खबरों में आज प्रशासनिक सुधारों, कानून व्यवस्था और साइबर क्राइम की पांच बड़ी खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। जहां लोनी तहसील में ई-पंजीकरण के खिलाफ 15वें दिन भी वकीलों की हड़ताल से कामकाज पूरी तरह ठप रहा, वहीं गाजियाबाद प्रशासन ने भू-माफियाओं पर बड़ा प्रहार करते हुए जमीनी कब्जों की जांच अब लेखपालों के बजाय सीधे तहसीलदारों को सौंप दी है।

इसी बीच, उत्तराखंड के रामनगर में गाजियाबाद के पर्यटकों द्वारा महिला दारोगा से बदसलूकी का शर्मनाक मामला सामने आया है। इसके अलावा, साइबर अपराधियों ने जिले में कोहराम मचाते हुए कूरियर हेल्पलाइन नंबर के जरिए 3.24 लाख और फेसबुक पर ऑनलाइन बिजनेस का झांसा देकर एक कारोबारी से 33.49 लाख की बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। तो चलिए इस लेख के जरिए इन सभी खबरों को विस्तार से जानते हैं।

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ई-रजिस्ट्री के विरोध में 15वें दिन भी वकीलों का धरना जारी

लोनी तहसील में ई-पंजीकरण (ई-रजिस्ट्री) प्रणाली के खिलाफ वकीलों और दस्तावेज लेखकों का धरना शुक्रवार को 15वें दिन भी जारी रहा। बार एसोसिएशन के नेतृत्व में चल रही इस बेमियादी हड़ताल के कारण रजिस्ट्री और न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप हैं, जिससे दूर-दूर से आने वाले आम लोग बेहद परेशान हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गाजियाबाद जिले की लोनी तहसील में ई-पंजीकरण (ई-रजिस्ट्री) प्रणाली के विरोध में वकीलों, स्टांप वेंडरों और बैनामा लेखकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है। इस आंदोलन के कारण स्थानीय रजिस्ट्री और न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे दूर-दूर से आने वाली आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

वकीलों के विरोध का कारण

तहसील बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि इस नई व्यवस्था से संपत्ति पंजीकरण का काम निजी एजेंसियों के नियंत्रण में चला जाएगा। अधिवक्ताओं का तर्क है कि इससे दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं, कंप्यूटर ऑपरेटरों और मुंशियों का रोजगार पूरी तरह छिन जाएगा। निजी संस्थाओं के शामिल होने से आम जनता पर रजिस्ट्री के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। इस नई व्यवस्था से काम की पारदर्शिता भी बुरी तरह प्रभावित होगी।

जनता पर पड़ रहा सीधा असर

हड़ताल के चलते जमीनों, मकानों और अन्य संपत्तियों के बैनामा, इकरारनामा और रहननामा से जुड़े सारे काम पूरी तरह बंद हैं। वकीलों ने अपने चैंबर बंद रखे हैं, जिसके कारण न्यायिक और अदालती कार्यों के लिए आने वाले लोग रोजाना बिना काम के बैरंग लौट रहे हैं। हालांकि स्थानीय प्रशासन इस गतिरोध को सुलझाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन वकील इस सरकारी आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं।

गूगल पर कूरियर कस्टमर केयर का नंबर सर्च करते ही लाखों साफ (Top 5 Ghaziabad News)

आप इंटरनेट पर किसी कंपनी का हेल्पलाइन नंबर ढूंढ रहे हों और अचानक आपका बैंक अकाउंट खाली हो जाए! गाजियाबाद से साइबर ठगी का एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जो यह सोचने पर मजबूर करता है कि इंटरनेट पर उपलब्ध हर जानकारी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यहाँ एक शख्स को कूरियर ट्रैकिंग के लिए कस्टमर केयर का नंबर गूगल पर सर्च करना बेहद भारी पड़ गया और ठगों ने उसके खाते से 3.24 लाख रुपये साफ कर दिए। तो चलिए जानते कि कैसे साइबर अपराधी सर्च इंजन रैंकिंग का फायदा उठाकर आम जनता को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं।

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद के कविनगर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति से कूरियर कंपनी का हेल्पलाइन नंबर सर्च करने के दौरान 3.24 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है, इस घटना को लेकर पीड़ित ने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

कैसे हुई ठगी?

कविनगर के जे-ब्लॉक निवासी कमल सिंह पठानिया ने डीटीसी कूरियर के जरिए एक पार्सल भेजा था। पार्सल की स्थिति (Status) जानने के लिए उन्होंने 11 जून 2026 की सुबह इंटरनेट पर कूरियर कंपनी का हेल्पलाइन नंबर खोजा। इंटरनेट पर मिले फर्जी नंबर पर संपर्क करने के दौरान साइबर ठगों ने उन्हें अपने झांसे में ले लिया और उनके बैंक खाते से 3.24 लाख रुपये उड़ा दिए। पीड़ित की शिकायत पर कविनगर थाना पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।

सर्च इंजन फ्रॉड से ऐसे बचें

  • आधिकारिक वेबसाइट का करें उपयोग: गूगल या अन्य सर्च इंजन पर अपराधियों द्वारा फर्जी नंबर डाल दिए जाते हैं, जिन्हें लोग असली समझकर कॉल कर देते हैं। इसलिए कभी भी कूरियर, बैंक, बिजली बिल या कस्टमर केयर का नंबर सीधे गूगल सर्च से न उठाएं। हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) पर जाकर ही ‘Contact Us’ पेज से नंबर लें।
  • फर्जी ऐप डाउनलोड न करें: यदि कोई कस्टमर केयर अधिकारी कॉल पर आपको कोई ऐप (जैसे AnyDesk, TeamViewer) डाउनलोड करने या किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने को कहे, तो तुरंत कॉल काट दें।
  • गोपनीय जानकारी न बदलें: याद रखें कि कोई भी असली कूरियर कंपनी या बैंक कभी भी आपसे रिफंड या सहायता के नाम पर OTP, UPI पिन या कार्ड डिटेल्स नहीं मांगता।

महिला एसआई से अभद्रता

उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रामनगर के एक रिसॉर्ट में गाजियाबाद और चंडीगढ़ से आए पर्यटकों द्वारा भारी बवाल करने का मामला सामने आया है। रिसॉर्ट संचालक के साथ मारपीट की सूचना पर बीच-बचाव करने पहुंची एक महिला दारोगा और पुलिस टीम के साथ भी इन पर्यटकों ने गंभीर अभद्रता और धक्का-मुक्की की। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने और मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी को जेल भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर स्थित कॉर्बेट फन रिसोर्ट में गाजियाबाद और चंडीगढ़ से आए पर्यटकों द्वारा भारी बवाल करने का मामला सामने आया है। इन पर्यटकों ने न केवल रिसोर्ट संचालक के साथ मारपीट की, बल्कि बीच-बचाव करने पहुंची महिला उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) राजकुमारी और पुलिस टीम के साथ भी गंभीर अभद्रता और धक्का-मुक्की की।

आईडी कार्ड मांगने पर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद (साहिबाबाद) निवासी कोमल शर्मा और चंडीगढ़ निवासी अविनाश कुमार मेक माय ट्रिप के जरिए रिसोर्ट में ठहरे थे। जंगल सफारी से लौटने के बाद वे अपने जिप्सी चालक शमशाद (स्थानीय निवासी) को भी अपने कमरे में ले गए। रिसोर्ट संचालक मुकेश जोशी ने जब कमरे में चालक की मौजूदगी पर आपत्ति जताई और सुरक्षा के लिहाज से उसका आधार कार्ड (ID Proof) मांगा, तो कमरे में शराब पी रहे पर्यटक भड़क गए। पर्यटकों और चालक ने मिलकर रिसोर्ट संचालक के साथ गाली-गलौज व मारपीट की और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद संचालक ने आपातकालीन नंबर 112 पर पुलिस को सूचना दी।

महिला दारोगा से दुर्व्यवहार और पुलिस की कार्रवाई

सूचना पाकर मौके पर पहुंची महिला दारोगा ने जब पर्यटकों को रोकने का प्रयास किया, तो आरोपी अविनाश ने उन पर हमला कर दिया, सरकारी कार्य में बाधा डाली और उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार (जबरदस्ती छूने की कोशिश) किया। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चोट पहुंचाने व गंभीर आपराधिक धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने, हमला करने व अभद्रता करने के दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं।

मुख्य आरोपी भेजा गया जेल

रामनगर कोतवाल सुशील कुमार के अनुसार, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अविनाश कुमार, कोमल शर्मा और जिप्सी चालक शमशाद को गिरफ्तार कर लिया था। मुख्य आरोपी अविनाश को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया है, जबकि महिला पर्यटक और चालक को कोतवाली से जमानत मिल गई है।

फेसबुक दोस्ती के जाल में फसा इंदिरापुरम कारोबारी

सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका एक बड़ा उदाहरण इंदिरापुरम में सामने आया है। यहाँ ज्ञानखंड-1 निवासी एक कारोबारी को फेसबुक पर घाना के रहने वाले शख्स से दोस्ती करना बेहद भारी पड़ गया। ठगों ने ऑनलाइन जड़ी-बूटी (Herbs) के व्यापार में दोगुने मुनाफे का झांसा देकर कारोबारी से 33.49 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित की शिकायत पर इंदिरापुरम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद के इंदिरापुरम के ज्ञानखंड-1 में रहने वाले कारोबारी अमरदीप सिंह की कुछ समय पहले फेसबुक पर ‘एलेक्स’ नाम के एक व्यक्ति से दोस्ती हुई। एलेक्स ने खुद को अफ्रीका का निवासी बताया था। उसने अमरदीप को झांसा दिया कि भारत में मिलने वाली एक खास जड़ी-बूटी की विदेशों में भारी मांग है। उसने दावा किया कि यदि अमरदीप इसे भारत से खरीदकर उसकी कंपनी को सप्लाई करे, तो उसे दोगुना मुनाफा होगा।

कैसे बिछाया जाल

कारोबारी को जाल में फंसाने के लिए ठगों ने मुंबई की एक फर्जी सप्लायर कंपनी और फूड एंड ड्रग्स एसोसिएशन के फर्जी अधिकारियों से अमरदीप की बात कराई। इसके बाद सैंपल पास कराने और जड़ी-बूटी खरीदने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 33,49,150 रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। मोटी रकम ट्रांसफर होने के बाद जब आरोपियों के फोन बंद हो गए और कोई डिलीवरी नहीं हुई, तब पीड़ित को अपने साथ हुई इस बड़ी ठगी का अहसास हुआ।

मामले में पुलिस की कार्रवाई

पीड़ित अमरदीप सिंह की शिकायत पर इंदिरापुरम थाना पुलिस और साइबर सेल ने आईटी एक्ट व धोखाधड़ी की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन सभी बैंक खातों की बारीकी से जांच कर रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।

तहसीलदार करेंगे सरकारी जमीन पर कब्जे की जांच

गाजियाबाद जिले में भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी (DM) ने एक बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है। अब सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे की शिकायतों की जांच लेखपाल स्तर पर नहीं होगी, बल्कि इसकी जिम्मेदारी सीधे तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है। निचले स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार की शिकायतों को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाजियाबाद जिले में सरकारी जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जों और भू-माफियाओं की साठगांठ को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गाजियाबाद के जिलाधिकारी (DM) ने एक नया प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे की शिकायतों की शुरुआती जांच लेखपाल स्तर पर नहीं की जाएगी। अब इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी सीधे तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) को सौंपी गई है।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अक्सर यह शिकायतें मिल रही थीं कि निचले स्तर के राजस्व कर्मी (लेखपाल) अवैध कब्जों की जांच में ढिलाई बरतते हैं या कई मामलों में भू-माफियाओं के साथ उनकी मिलीभगत की आशंका रहती है। लेखपालों द्वारा गलत या भ्रामक रिपोर्ट देने के कारण न केवल सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंच रहा था, बल्कि अदालती कार्यवाहियों में भी देरी हो रही थी। इसी लापरवाही और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए जिलाधिकारी ने जांच का स्तर ऊंचा कर दिया है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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