MK Stalin Vs CM Vijay: तमिलनाडु की राजनीति में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) और मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के बीच टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है। अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार को सत्ता संभाले अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन विपक्ष ने उसके खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना शुरू कर दिया है।
शनिवार को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में DMK अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने TVK सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार DMK की वजह से सत्ता में है और कार्यकर्ताओं से इस सरकार को हटाने के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया।
‘हम चाहते तो रोक सकते थे सहयोगियों को’ MK Stalin Vs CM Vijay
स्टालिन ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद उनकी पार्टी के कई सहयोगी दलों ने TVK को समर्थन देने का फैसला किया था। उन्होंने बताया कि गठबंधन दलों के नेताओं ने इस बारे में पहले उन्हें जानकारी दी थी। पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, उन्होंने अपने सहयोगियों के फैसले का विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब सहयोगी दलों ने TVK का समर्थन करने की बात कही तो उन्होंने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की और इसे उनका लोकतांत्रिक अधिकार माना।
हालांकि स्टालिन ने यह भी कहा कि उन्होंने यह फैसला एक खास वजह से लिया था। उनके मुताबिक, यदि उस समय राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की आशंका बढ़ सकती थी, जिससे भारतीय जनता पार्टी के लिए तमिलनाडु में सत्ता का रास्ता खुल सकता था। इसी संभावना को रोकने के लिए उन्होंने सहयोगियों को अपनी पसंद का निर्णय लेने दिया।
DMK गठबंधन के सहयोगियों ने बदला था रुख
गौरतलब है कि 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में विजय की पार्टी TVK बहुमत के आंकड़े से 10 सीट पीछे रह गई थी। ऐसे में सरकार बनाने के लिए उसे अन्य दलों के समर्थन की जरूरत पड़ी। चुनाव के बाद कांग्रेस ने DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होकर TVK को समर्थन देने का फैसला किया। इसके अलावा DMK के अन्य सहयोगी दलों CPI, CPI(M), VCK और IUML ने भी विजय के नेतृत्व वाली पार्टी का साथ दिया। इन दलों के समर्थन के बाद TVK सरकार बनाने का दावा पेश करने में सफल रही।
इसी घटनाक्रम का जिक्र करते हुए स्टालिन ने कहा कि मौजूदा सरकार की सत्ता तक पहुंच में DMK की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कार्यकर्ताओं से सरकार के खिलाफ संघर्ष का आह्वान
चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्टालिन ने बड़ी संख्या में DMK में शामिल हुए पूर्व AIADMK कार्यकर्ताओं का स्वागत किया। इस मौके पर उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे TVK सरकार के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि आज भले ही DMK सत्ता में नहीं है, लेकिन पार्टी का संगठन मजबूत है और कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच काम कर रहे हैं। स्टालिन ने भरोसा जताया कि पार्टी आने वाले समय में और अधिक मजबूती के साथ वापसी करेगी।
हार-जीत राजनीति का हिस्सा: स्टालिन
अपने संबोधन में स्टालिन ने DMK के लंबे राजनीतिक इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और हार-जीत राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा है। उन्होंने 1975 के आपातकाल के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय DMK ने लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में खड़े होकर विरोध दर्ज कराया था, जबकि पार्टी को यह अंदेशा था कि इसके कारण उसकी सरकार को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
स्टालिन ने याद दिलाया कि 1976 में DMK सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था और पार्टी लंबे समय तक सत्ता से बाहर रही। इसके बावजूद संगठन ने संघर्ष जारी रखा और बाद में फिर से जनता का विश्वास हासिल किया। उन्होंने कहा कि पार्टी का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियां DMK का मनोबल नहीं तोड़ सकतीं।
‘DMK कार्यकर्ता न जीत से बहकते हैं, न हार से टूटते हैं’
स्टालिन ने कहा कि DMK का असली कार्यकर्ता वही है जो जीत मिलने पर अहंकार में नहीं आता और हार मिलने पर निराश होकर मैदान नहीं छोड़ता। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजे चाहे जो भी हों, पार्टी का काम जनता की सेवा करना है। सत्ता में रहते हुए भी DMK ने यही किया और विपक्ष में रहते हुए भी वह अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में भी पार्टी मजबूती से खड़ी है और जनता के मुद्दों को उठाती रहेगी।
AIADMK छोड़ DMK में शामिल हुए कई नेता
इस कार्यक्रम की एक और खास बात AIADMK से जुड़े बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का DMK में शामिल होना रही। कट्टनकोलाथुर-नॉर्थ यूनियन के पूर्व पदाधिकारी ‘गजा’ उर्फ गजेंद्रन के नेतृत्व में एक हजार से अधिक लोगों ने DMK की सदस्यता ग्रहण की। गजेंद्रन हालिया विधानसभा चुनाव में चेंगलपेट सीट से AIADMK उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का DMK में शामिल होना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
TVK सरकार पर बढ़ेगा विपक्ष का दबाव
23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में विजय की अगुवाई वाली TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने में सफलता हासिल की थी। हालांकि बहुमत से दूर रहने के कारण उसे सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ा। अब सरकार बनने के कुछ ही सप्ताह बाद DMK की ओर से आए इस आक्रामक बयान को तमिलनाडु की राजनीति में नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है।



























