RBI Sold Gold Bloomberg Report Truth: एक तरफ अर्थव्यवस्था के बड़े-बड़े दावे और दूसरी तरफ देश की तिजोरी से सोना बेचे जाने की चौंकाने वाली रिपोर्ट्स! कहने को तो हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर हैं, लेकिन आज यह सवाल उठना लाज़मी है कि आख़िर वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश की सबसे बड़ी धरोहर यानी सोने को लेकर क्या रणनीति चल रही है?
इतिहास गवाह है कि संकट के दौर में भी देश ने अपनी साख बचाने की कोशिश की, लेकिन आज सोने को सीधे बेचने के दावों की नौबत क्यों आई? क्या देश की आर्थिक स्थिति दावों से बिल्कुल उलट है या यह केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार का कोई गणित है? गिरवी रखना एक अलग बात है, लेकिन जब देश का सोना हमेशा के लिए हाथ से निकलने की खबरें आएं, तो हर नागरिक का परेशान होना तय है। सरकार हालांकि इन खबरों को सिरे से खारिज कर रही है, लेकिन आखिर इस पूरी बहस के पीछे की असली कहानी क्या है?
क्यों शुरू हुई बहस?
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के सीनियर इंडिया इकोनॉमिस्ट अभिषेक गुप्ता द्वारा तैयार की गई एक हालिया रिपोर्ट ने भारतीय बाज़ारों और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 22 मई 2026 तक के पिछले दो हफ्तों में कथित तौर पर करीब 12 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सोना बेचा है।
ब्लूमबर्ग का विश्लेषण कहता है कि सरकार ने हाल ही में सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाया था। सामान्य परिस्थितियों में, ड्यूटी बढ़ने से आरबीआई के स्वर्ण भंडार की वैल्यू बढ़नी चाहिए थी। लेकिन इसके विपरीत, आरबीआई के कुल गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में बड़ी गिरावट देखी गई, जो ब्लूमबर्ग के मुताबिक यह इशारा करती है कि आरबीआई ने बाजार में सोना बेचा है।
ब्लूमबर्ग और आर्थिक विश्लेषक दिनेश के वोहरा के अनुसार, मई 2026 में विदेशी मुद्रा भंडार के गंभीर संकट से निपटने के लिए RBI ने करीब 12 अरब डॉलर का सोना बेचा है। यह भारत के इतिहास में एक अप्रत्याशित और असाधारण कदम है, क्योंकि 1990 के दशक के बड़े आर्थिक संकट में भी देश ने अपना सोना… pic.twitter.com/tVCGQCn0Ff
— Nedrick News (@nedricknews) June 3, 2026
इसके पीछे की वजह क्या बताई गई?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव और मिडिल ईस्ट संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे भारतीय रुपया लगातार दबाव में आकर रिकॉर्ड निचले स्तरों की तरफ बढ़ रहा है। रिपोर्ट का दावा है कि टूटते रुपये को संभालने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex) को बचाने के लिए ही आरबीआई ने सोने के बदले लिक्विड करेंसी यानी अमेरिकी डॉलर को प्राथमिकता दी है।
सरकार ने दावों को सिरे से किया खारिज
हालांकि, ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट के सामने आने के तुरंत बाद भारत सरकार के आधिकारिक सूत्रों ने इस पूरे दावे और ब्लूमबर्ग के डेटा एनालिसिस को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि फॉरेक्स रिजर्व को बचाने के लिए आरबीआई द्वारा सोना बेचने की खबरें पूरी तरह से झूठी और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। केंद्रीय बैंक अपने सामान्य पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के तहत ही कदम उठाता है, न कि किसी आर्थिक संकट के चलते।
विपक्ष का तीखा हमला
लेकिन इस रिपोर्ट को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को घेरते हुए लिखा-‘यह अमृतकाल है? मोदी सरकार ने देश का सोना बेच दिया है।’ विपक्ष के इस वार के बाद से ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई देश की आर्थिक स्थिति दावों से अलग है, या फिर यह सरकार को घेरने की सिर्फ एक राजनीतिक कोशिश है।
ब्रिटेन से सोना वापस
द हिंदू, इंडिया टुडे और एनडीटीवी जैसे देश के तमाम बड़े मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स गवाह हैं कि आरबीआई ने हाल के वर्षों में 100 मीट्रिक टन से लेकर करीब 280 टन तक सोना ब्रिटेन के ‘बैंक ऑफ इंग्लैंड’ से निकालकर भारत की तिजोरियों में वापस ला चुका है। खुद बड़े अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जो भारत अपने सोने को वापस लाकर नागपुर और मुंबई के वॉल्ट्स में लॉक कर रहा है, वो भला गुपचुप तरीके से सोना क्यों बेचेगा?
क्या है एक्सपर्ट्स की राय ?
इस पूरे मामले को गहराई से समझने के लिए जब हमने आर्थिक विश्लेषकों और मार्केट एक्सपर्ट्स के बयानों को खंगाला, तो दो मुख्य बातें सामने आती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट केवल ‘अनुमान और डेटा कैलकुलेशन’ पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में जब सोने की कीमतें बदलती हैं या फॉरेक्स पोर्टफोलियो को री-बैलेंस (Rebalance) किया जाता है, तो आंकड़ों में उतार-चढ़ाव दिखना सामान्य है।
इसे सीधे ‘सोना बेचना’ मान लेना तकनीकी रूप से सही नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया के तमाम केंद्रीय बैंकों की तरह आरबीआई भी अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखने के लिए डॉलर और सोने का संतुलन बनाता रहता है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) इस समय बेहद मजबूत स्थिति में है, इसलिए देश पर सोना बेचने की कोई ‘आर्थिक मजबूरी’ या ‘संकट’ जैसी स्थिति बिल्कुल नहीं है।
एक तरफ जहाँ ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के आंकड़ों ने देश के राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया है और विपक्ष इसे देश की धरोहर बेचने से जोड़ रहा है, वहीं ज़मीनी हकीकत और सरकार का आधिकारिक रुख इस दावे से बिल्कुल उलट है। भारत का सोना देश की तिजोरी में न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि विदेशों से भी इसे वापस लाकर और मजबूत किया जा रहा है। ऐसे में किसी भी रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय, आरबीआई के आधिकारिक आंकड़ों का इंतज़ार करना ही सबसे सही कदम होगा।






























