History of Jagga Jatt: आपने अक्सर बड़े बुजुर्गों के मुंह से सुना होगा कि हर सिक्के के दो पहलू होते है, जो आपके लिए बुरा है वो किसी के लिए अच्छा भी हो सकता है, हालांकि गुनाह को कभी भी जस्टिफाई नहीं किया जा सकता है लेकिन क्या हो उस गुनाह के कारण सैकड़ों लोगों का भला हो रहा हो, लोगों का पेट भर रहा हो, तो लोग उसे राक्षस कहेंगे या मसीहा। एक ऐसा ही शख़्स हुआ पंजाब के दसुवाल में, जिसके कारनामों के कारण लोग उसे पंजाब का रॉबिनहुड कहने लगे थे, तो वहीं अंग्रेजी हुकूमत के नाक में दम करने वाले इस शख्स को अंग्रेजों ने सबसे बड़ा दुश्मन माना था। जी हां, आज भी पंजाब के रॉबिनहुड के नाम से फेमस जगत सिंह उर्फ जग्गा जट्ट की वो कहानी, जब उन्होंने असली रॉबिनहुड की तरह अमीरों को लूट कर गरीबों को देना शुरू कर दिया था, लेकिन फिर भी वो एक कुख्यात डाकू कहलाया। अपने इस लेख में हम पंजाब के गरीबों के मसीहा जग्गा डाकू के बारे में जानेंगे, जिसे अपनो के धोखे के कारण ही मौत मिली थी, वरना तो अंग्रेजी हुकूमत कभी उसे पकड़ नहीं सकी थी। क्या है जग्गा डाकू की कहानी।
1920 के दशक में पंजाब का कई इलाके डकैती के खौफ में जी रहे थे, गांवो के अमीर जमींदारो को हर वक्त ये डर लगा रहता था कि गांव में कही जग्गा डाकू न आ जाये.. कितनी भी सुरक्षा रहती थी, डाकुओ का झुंड आता और लूटपाट करके हवा में गायब हो जाता। इन डाकुओ का नेतृत्व कर रहा था जग्गा जट्ट उर्फ जग्गा डाकू.. जिसको उसके ज नाम से शुरु होने वाले अक्षर के कारण ही धोखे से मारा गया.. पंजाब के लाहौर जिले के बुर्जरण सिंह, ब्रिटिश पंजाब में माखन सिंह और भागन की सातवी संतान के रूप में जन्म हुआ था जगत सिंह का। मूल रूप से पंजाब से दासुवाल के रहने वाले एक विर्क परिवार में जन्मा था ये बालक.. माता पिता की पहली 6 संताने जन्म लेने के तुरंत बाद मर गई तो सातवी संतान की रक्षा के लिए दंपत्ति ने सोढीवाल गांव में एक संत की सेवा की.. और संतान की रक्षा करने की अर्जी लगाई।
संत ने उपाय बताया कि बच्चे के जन्म से पहले एक जीवित बकरा खरीदे और जब बच्चे का जन्म हो तो उसे तुरंत बच्चे को छुआ देना.. साथ ही चेतावनी भी दी कि बच्चे का नाम ज से मत रखना.. क्योंकि ऐसा होता है तो उसकी मौत धोखे से होगी.. बच्चे के जन्म के बाद बकरा जैसे ही छुआया गया बकरे की मौत हो गई.. य़ानि की मौत को यहां धोखा दिया गया था… संत की चेतावनी साफ थी कि ज से नाम इस धोखे को फिर से सामने ला सकती है.. लेकिन इस चेतावनी को माता पिता भूल गए और बच्चे के चाचा ने नाम रख दिय़ा जगत सिंह। जगत जब काफी छोटा था तभी पिता का निधन हो गया.. जिसके बाद जगत की मां और चाचा ने ही जगत की परवरिश की… घर मे किसी चीज की कमी नहीं थी.. कुश्ती का शौक होने के कारण शरीरिक बल काफी था, छोटी उम्र में ही इंदर कौर से शादी हो गई औऱ बेटी गुलाब कौर का जन्म हुआ।
एक रौबिला शरीर, लंबी मूंछे, मजबूत शारीरिक ताकत के कारण धीरे धीरे लोग जग्गा जट्ट कहने लगे, वो कुश्ती में कई बार जीत चुका था.. जग्गा की इस प्रसिद्धि से उसके ससुराल में रहने वाले दो नकाई भाईयों ने जलन की भावना रखनी शुरु कर दी, खासकर जब जग्गा ने दोनो भाईयो को एक साथ परास्त कर दिया था, लेकिन जब जग्गा की प्रसिद्धि और ज्यादा हो गई तब कल मोकल गांव के जैलदार को अपनी गद्दी जाने की डर सताने लगा.. उसने जग्गा पर चोरी का झूठा आरोप लगवा कर जेल भिजवा दिया.. इसमें उससे बैर रखने वालों ने भी जैलदार का साथ दिया.. जग्गा ने शांति से अपने परिवार के लिए 4 सालों की सजा काटी लेकिन जब वो रिहा होकर लौटा तो उसी रात भाई फेरू गांव में फिर से चोरी हो गई.. जिसका आरोप सीधा जग्गा पर मढ़ दिया गया, लेकिन इस बार जग्गा बेगुनाह होते हुए जेल नहीं जाने वाला था, वो फरार हो गया..वहीं पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया।
पुलिस का ये उत्पीड़न जग्गा के बर्दाश्त के बाहर था, और इस अत्याचार के खिलाफ खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया.. फरार होने के कारण पुलिस लगातार तलाश कर रही थी, लेकिन कंगनपुर गांव में उसका सामना एक पुलिसवाले से हो गया। जग्गा बागी हो गया था, उसने पुलिस वाले की बंदूक छीनकर उसे ही गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। ये था जग्गा जट्ट का जग्गा डाकू बनने का पहला पड़ाव। जग्गा की इस लड़ाई में उसके दोस्त झंडा सिंह निर्मल और ठाकुर सिंह मंडेयाली भी उसके साथ थे.. इन तीनो ने पहली बार घुनियारी गांव में एक सुनार के घर डकैती की… ये था जग्गा डाकू बनने का आखिरी पड़ाव। जग्गा ने न केवल सोने की डकैती की थी बल्कि गरीबो और मजबूरो के कर्ज का हिसाब रखने वाला बहीखाता भी आग के हवाले कर दिया था। धीरे धीरे उसके समूह में बंता सिंह, सोहन तेली, लालू नाई रसोइया, भोलू और बावा शामिल हो गये.. जो उसके बचपन के दोस्त थे।
ये लोग अमीरो के घर में लूटपाट करते और गरीबों में बांट देते थे.. जिससे धीरे धीरे जग्गा डाकू पंजाब का रॉबिनहुड कहलाने लगा.. लेकिन 1930 के आसपास अपने ही एक वफादार की दगाबाजी के कारण जग्गा डाकू 29 साल की उम्र में ही मारा गया.. दरअसल 1930 में डाकू मल्लंगी की मृत मां को श्रद्धांजलि देने के लिए जग्गा अपने साथियों के साथ सिद्धूपुर गांव गया था। जग्गा के आतंक से तंग आकर अंग्रेजी हुकुमत ने उसके सिर पर इनाम रखा था, इसलिए जब वो सिद्धूपुर गांव पहुंचा हो रात उसने वहीं बिताने का फैसला किया.. रात के समय जग्गा ने अपने रसोइये से खाना बनाने को कहा, मगर रसोइये ने खाना बनाने से पहले जग्गा को शराब पीने के लिए मना लिया.. जग्गा अपने दोस्त बंता के साथ शराब पीने में व्यस्त हो गया और दूसरी तरफ लालू रसोइये ने अपने कुछ भाइयो को बुला लिया.. केवल इनाम के लालच में उसने नशे में धुत्त जग्गा पर अपने भाइयो के साथ मिलकर गोलियां चला दी.. किसी ने नहीं सोचा था कि जिस जग्गा को अंग्रेजी हुकुमत तक नहीं पकड़ पाई वो अपने ही वफादार के हाथों मारा जायेगा… और इस तरह से मात्र 29 साल की उम्र में पंजाब का रॉबिनहुड मौत के मुंह में चला गया। जो बड़ी से बड़ी गोलियों से नहीं मरा उसे धोखे ने ही मारा..





























