Panch Mandir History: जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था, तब पूरे पंजाब में जहां करीब 57 प्रतिशत आबादी मुसलमानो की थी तो वहीं करीब 28 प्रतिशत हिंदू और 15 प्रतिशत सिख रहा करते थे। 1941 में ब्रिटिश हुकुमत की कराई जनगणना के अनुसार ये आकड़े भी तब के माने गए है… वहीं बंटवारे में पश्चिमी पंजाब के 16 जिले पाकिस्तान को मिले तो वहीं पूर्वी पंजाब केल 13 जिले भारत को मिले थे, लेकिन इस बंटवारे में सबसे ज्यादा क्रूर सच्चाई ये थे की इस दौरान करीब डेढ़ करोड़ लोगो ने अलग अलग विस्थापन किया था जिसमें मुसलमानो के साथ साथ हिंदू और सिख भी भारी संख्या में थे।
बंटवारे में जान माल का जो नुकसान हुआ वो तो हुआ ही … वहीं बहुत सी ऐसी हिंदू और सिखों की धरोहरो को भी नुकसान पहुंचाया गया… लेकिन बावजूद इसके आज भारतीय पंजाब में जो कि सिख राज्य के नाम से प्रचलित है, यहां सिख औऱ हिंदू पूरे सौहार्द के साथ रहते है। सिखो के गुरुद्वारों की तो अनगिनत कहानियां है, लेकिन अपने इस लेख में हम बात करेंगे कपूरथला के पंच मंदिर के बारे में..,जो हिंदूओं के लिए काफी अहम है।
पंच मंदिर का इतिहास – Panch Mandir History
पंजाब के कपूरथला जिले में स्थित है सूर्य भगवान समेत पांच देवी देवताओ के आपस में जुड़े मंदिरों से बना भव्य पंच मंदिर.. जो कि कपूरथला के महाराजा सरदार फतेह सिंह अहलूवालिया ने अपने शासनकाल में बनाया था। यानि की इस मंदिर को बने हुए करीब 125 सालो से भी ज्यादा हो गया है। इस मंदिर की भव्यता ऐसी है कि इसके प्रवेश द्वारा पर ही पंच मूर्तियां लगी है.. ये भारत का दूसरा ऐसा सूर्य मंदिर है जहां उगते हुए सूरज की पहली किरण पड़ती है। सफेद खूबसूरत संगमरमर से बना ये मंदिर हिंदू संस्कृति और कलाकृति का अनूठा संगम है। मंदिर की कलाएं इतनी बारीक और खूबसूरत है को हर कोई उसे देखता ही रह जाता है। पूर्णिमा की रात को ये मंदिर भी आगरा के ताजमहल की तरह काफी चमकदार नजर आता है।
मंदिर के अंदर पांच अलग अलग मंदिर – Panch Mandir History
मंदिर के अंदर पांच अलग अलग मंदिर बने हुए है जिसमें पंचमुखी शिवलिग, लक्ष्णी नारायण, राधा कृष्णा जी, बाबा बालक नाथ जी, श्री हनुमान जी, शनिदेव जी, मां दुर्गा जी और मां काली जी के साथ साथ राम दरबार की भी प्रतिमा स्थापित की गई है। पंच मंदिर के बीच ढांचे में राधा-कृष्ण का मुख्य मंदिर है और चारों कोनों पर सूर्य, गणेश, शिव-पार्वती और दुर्गा माता के चार अलग अलग छोटे मंदिर बने हैं। इतना ही नहीं मंदिर को इस तरह से बनाया गया है कि कोई भी मुख्य मार्ग पर खड़ा होकर भी मंदिर के पांच प्रतिमाओं को प्रणाम कर सकता है। यहां एकमात्र पंचमुखी शिव मंदिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि श्राद्धालु सावन में जल चढ़ाते है उनकी मनोकामना पूरी होती है।
मंदिर के अन्दर हिंदू धर्म और सिख धर्म का अनोखा संगम – Panch Mandir History
मंदिर में केवल देवी देवता को ही स्थापित नहीं किया गया बल्कि हिंदू धर्म और सिख धर्म की अनोखे संगम को महत्ता देने के लिए एक बड़ा का हॉल भी बनाया है जो शादी या अन्य धार्मिक कार्यकर्मों के लिए इस्तेमाल किया, जो यहां की भव्यता का प्रतीक है। हालांकि इस मंदिर को पहचान मिलनी शुरु हुई आजादी के बाद.. जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हो गया है औऱ लाखों हिंदू और सिख पंजाब के अलग अलग हिस्सों में आ कर बस गए.. जिन्होंने धीरे धीरे खुद को पूर्वी पंजाब का हिस्सा बना लिया।
मौजूदा समय में पंट मंदिर कपूरथला बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से लगभग 5 मिनट की पैदल दूरी पर है, यहां आसानी से जाया जा सकता है। मंदिर की वास्तुकला इतनी प्रभावी के इसकी एक छोटी की प्रतिकृति लाहौर के संग्रहालय Pre-partition Punjab Museum में रखी हुई है.. ये मंदिर हिंदू संस्कृति की पंजाब में मौजूद सबसे खूबसूरत धरोहरों में से एक है। अगर आपने इस मंदिर को सामने से देखा है तो आप हमें जरूर बताये कि आपको इस मंदिर में क्या खास लगा।





























