Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद से इस वक्त पांच ऐसी बड़ी खबरें सामने आ रही हैं, जो न सिर्फ आपको हैरान कर देंगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक नैतिकता के परखच्चे उड़ा देंगी। पहली खबर में, बलात्कार के एक रसूखदार आरोपी का जेल से छूटने पर फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ ऐसा स्वागत किया जाता है, मानो उसने कोई पुण्य काम किया हो। वहीं, दूसरी खबर ममता को कलंकित करती है, जहां एक सौतेली मां ने अपनी ही साढ़े तीन साल की मासूम बेटी को सिर्फ इसलिए गला घोंटकर मार डाला क्योंकि वह उसकी परवरिश को बोझ समझती थी।
कानून-व्यवस्था की बदहाली का आलम यह है कि हमारी तीसरी खबर में मोदीनगर के दबंग एक दंपत्ति को सरेराह लाठी-डंडों से पीटते हैं और कैमरे के सामने खुलेआम चुनौती देते हैं कि ‘हम पुलिस से नहीं डरते’। इन आपराधिक वारदातों के बीच, चौथी खबर सीधे आपकी जेब और रोजाना के सफर पर चोट करने वाली है, जहां दिल्ली-NCR में तीन दिन की ट्रांसपोर्ट हड़ताल के कारण गाजियाबाद के लाखों कामकाजी लोग बेहाल होने वाले हैं। और अंत में, हमारी पांचवीं खबर न्याय के मंदिर से है, जहां जजों पर ही अभद्र टिप्पणी प्रसारित करने के आरोप में अवमानना की जांच के बाद एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।
रसूख की गुंडागर्दी, रिश्तों का कत्ल, खाकी का खत्म होता खौफ, जनता की लाचारी और न्यायपालिका का अपमान… आखिर गाजियाबाद में यह क्या हो रहा है? तो चलिए इस लेख के जरिए इन सभी खबरों की पूरी हकीकत विस्तार से जानते हैं।
रेप आरोपी को बेल मिलने पर पहनाई फूलों की माला
जब बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के आरोपी को जेल से छूटने पर फूलों की माला पहनाई जाए और ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला जाए, तो सभ्य समाज में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या हमने अपराध और पुण्य के पैमाने ही बदल दिए हैं? गाजियाबाद की डासना जेल से बाहर आए एक आरोपी का यह भव्य स्वागत समाज की इसी गिरती संवेदनशीलता की गवाही देता है।
सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद कानून-व्यवस्था और सामाजिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि आरोपी पर एलएलबी की एक छात्रा ने नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म करने का संगीन आरोप लगाया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या आरोपी का किसी रसूखदार संगठन से होना उसके अपराध को कम घिनौना बना देता है? या किसी संगठन का अध्यक्ष होना उसे जुर्म करने का लाइसेंस दे देता है?
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि गाजियाबाद की डासना जेल से जमानत पर छूटे दुष्कर्म के आरोपी सुशील प्रजापति का समर्थकों ने भव्य स्वागत किया। जेल से बाहर आते ही समर्थकों ने आरोपी पर फूल बरसाए, उसे कंधे पर उठाया और गाड़ियों का बड़ा जुलूस निकाला, जिसका वीडियो वायरल होने पर तीखी आलोचना हो रही है।
आरोपी सुशील प्रजापति हिंदू युवा वाहिनी का मुरादनगर का पूर्व नगर अध्यक्ष है। एलएलबी की एक छात्रा ने आरोप लगाया था कि अगस्त 2025 में सुशील ने उसे नौकरी का झांसा देकर बुलाया, कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। गाजियाबाद पुलिस ने आरोपी को 11 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद करीब 9 महीने जेल में रहने पर 17 मई 2026 को उसे कोर्ट से जमानत मिली। घटना के समय हिंदू युवा वाहिनी ने बयान जारी कर आरोपी से पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन अब इस तरह के स्वागत प्रदर्शन ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
मां ने गला दबाकर मासूम को उतारा मौत के घाट (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद से आई यह दूसरी खबर समाज के उसी पुराने डर और रूढ़ि को सच साबित करती दिखती है कि ‘सौतेला तो सौतेला ही होता है’। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वाकई कोई मां अपने ही घर के बच्चों की परवरिश को इतना बड़ा बोझ मान सकती है कि वह क्रूरता की सारी हदें पार कर जाए?
क्या कोई महज साढ़े तीन साल की मासूम से इतनी नफरत कर सकता है कि उसकी जान ही ले ले? मां का रूप तो ममता का होता है, और उस अबोध बच्ची को तो अभी अपनों और सौतेलों के बीच का फर्क भी नहीं मालूम था। गाजियाबाद के वेव सिटी इलाके में एक सौतेली मां द्वारा अपनी ही बेटी की गला दबाकर हत्या करने की इस वारदात ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, गाजियाबाद (वेव सिटी थाना क्षेत्र) में एक सौतेली मां (ज्योति) ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी (वंशिका) की गला दबाकर हत्या कर दी, क्योंकि वह बच्ची से नफरत करती थी और उसकी परवरिश को बोझ समझती थी। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना वाले दिन (16 मई 2026) मासूम बच्ची ने खेलने के दौरान घर में ही शौच (Defecate) कर दिया था और वह पीने के लिए दूध मांग रही थी। इसी बात से नाराज होकर ज्योति आगबबूला हो गई।
गुस्से में आकर ज्योति ने पहले बच्ची को बेरहमी से पीटा, जिससे उसके शरीर पर गंभीर चोटें आईं। इसके बाद उसने मासूम का मुंह-नाक और गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। जब बच्ची का पिता ड्यूटी से रात 8 बजे घर लौटा, तो उसने बेटी को जमीन पर बेसुध पाया। आरोपी पत्नी ज्योति ने झूठ बोला कि बच्ची बिस्तर से नीचे गिर गई थी और बेहोश हो गई। पिता और चाचा जब बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बच्ची के चाचा ने सौतेली मां पर शक जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बच्ची की मौत बिस्तर से गिरने से नहीं, बल्कि गला घोंटने (Strangulation) से हुई थी और उसकी पसलियों में फ्रैक्चर व शरीर पर 17 जगह चोटों के निशान थे। पुलिस की सख्त पूछताछ के आगे आरोपी सौतेली मां टूट गई और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया, और उसने बताया कि उसकी खुद की भी एक दो महीने की छोटी बेटी थी। वह तीन छोटे बच्चों की परवरिश को अपने ऊपर एक भारी मानसिक बोझ समझने लगी थी।
मोदीनगर में अपने ही घर के बाहर भी सुरक्षित नहीं
गाजियाबाद की यह तीसरी खबर सीधे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या गाजियाबाद में लोग अब अपने ही घर के बाहर भी सुरक्षित नहीं हैं? आखिर कौन हैं ये दबंग लोग, जिन्हें कानून का बिल्कुल भी खौफ नहीं है? क्या जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस शहर में पैर पसारती ऐसी गुंडागर्दी से पूरी तरह बेखबर हैं?
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि मोदीनगर के भोजपुर क्षेत्र से दबंगई का एक ऐसा ही सीसीटीवी (CCTV) फुटेज वायरल हुआ है, जिसने पुलिस के इकबाल को चुनौती दे दी है। घर के बाहर ईंटें हटाने को लेकर हुए मामूली विवाद में दबंगों ने एक दंपत्ति को लाठी-डंडों से सरेराह बेरहमी से पीटा और चिल्लाकर कहा- ‘हम पुलिस से नहीं डरते’।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दबंग युवक किस तरह सरेराह महिला और उसके पति को बेरहमी से पीट रहे हैं और वहां मौजूद लोग मूकदर्शक (तमाशबीन) बने हुए हैं। पीड़ित पति अपनी पत्नी को बचाने का प्रयास करता रहा, लेकिन आरोपी दोनों को लगातार पीटते रहे। घटना के बाद पीड़ित दंपत्ति ने घायल अवस्था में भोजपुर थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। सोशल मीडिया पर सीसीटीवी फुटेज वायरल होने और मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद गाजियाबाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें लगा दी हैं।
दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर ऑटो, टैक्सी की 2 दिनों तक हड़ताल (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद से जुड़ी यह चौथी खबर सीधे आपकी जेब और रोजाना के सफर पर असर डालने वाली है। भले ही चक्का जाम का फैसला देश की राजधानी दिल्ली में लिया गया हो, लेकिन इसका सबसे बड़ा खामियाजा गाजियाबाद और पूरे एनसीआर (NCR) के कामकाजी लोगों को भुगतना पड़ेगा।
सीएनजी की बढ़ती कीमतों और टैक्स के विरोध में दिल्ली-NCR के ऑटो, टैक्सी और ट्रांसपोर्टर्स तीन दिन की महाहड़ताल पर जा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि गाजियाबाद से दिल्ली रोजाना नौकरी और व्यापार के लिए जाने वाले लाखों लोग इस भारी अव्यवस्था के बीच मंजिल तक कैसे पहुंचेंगे?
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और विभिन्न चालक यूनियनों ने 21 मई से 23 मई 2026 तक तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया है। गाजियाबाद के आनंद विहार, कौशांबी, वैशाली और इंदिरापुरम जैसे इलाकों से दिल्ली आने-जाने वाले लोगों को इस दौरान ओला-उबर कैब और ऑटो की भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा।
कैब और ऑटो यूनियनों का कहना है कि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बावजूद पिछले 15 सालों से टैक्सी का किराया संशोधित नहीं किया गया है। हाल ही में सीएनजी के दाम 2 प्रति किलो बढ़ने से चालकों का बजट बिगड़ गया है। साथ ही दिल्ली सरकार द्वारा हाल ही में कमर्शियल वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) यानी पॉल्यूशन टैक्स को दोगुना बढ़ा दिया गया है, जिसका ट्रांसपोर्टर्स कड़ा विरोध कर रहे हैं। पर्यावरण नियमों के तहत दिल्ली-NCR में BS4 गाड़ियों के प्रवेश और संचालन पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों से ट्रक मालिक नाराज हैं।
जजों पर ही की अभद्र टिप्पणी
गाजियाबाद से जुड़ी यह पांचवीं खबर न्याय के मंदिर और कानून के रखवालों के सम्मान से जुड़ी है। जब आम जनता को डराने वाले दबंगों पर कार्रवाई होती है, तो भरोसा अदालत पर ही टिकता है, लेकिन क्या होगा जब खुद अदालत के जजों पर ही अभद्र टिप्पणियां की जाने लगें? गाजियाबाद के कविनगर में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां जजों पर अशोभनीय टिप्पणी प्रसारित करने वाले शख्स पर अवमानना की जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या सोशल मीडिया के दौर में अब लोगों के मन से न्यायपालिका और कानून का सम्मान भी खत्म होता जा रहा है?
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि गाजियाबाद के कविनगर थाने में कोर्ट के जजों पर अभद्र और अशोभनीय टिप्पणी प्रसारित करने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। उच्च न्यायालय (High Court) के आदेश और अवमानना (Contempt of Court) मामले की जांच के बाद पुलिस ने यह सख्त कानूनी कार्रवाई की है।
आरोपी ने न्यायिक प्रणाली और न्यायालय के माननीय जजों की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया या सार्वजनिक माध्यमों पर अभद्र और अपमानजनक टिप्पणियां प्रसारित की थीं। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने अवमानना (Contempt) के तहत जांच के आदेश दिए थे ।
स्थानीय स्तर पर जांच पूरी होने और आरोप सही पाए जाने के बाद कोर्ट के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि कविनगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ न्याय व्यवस्था को बदनाम करने, आईटी एक्ट (IT Act) और अन्य संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है।
Top 5 Ghaziabad News इस बात का साफ सबूत हैं कि समाज और व्यवस्था के स्तर पर कहीं न कहीं एक बड़ा बिखराव आ रहा है। जब संगीन अपराधों के आरोपी सरेआम जश्न मनाते हैं, जब रसूख और गुंडागर्दी के आगे खाकी का खौफ बौना साबित होने लगता है, और जब रिश्तों की मर्यादा ही खत्म हो जाती है, तो आम नागरिक का असुरक्षित महसूस करना लाजमी है।
चाहे वो सड़कों पर कानून को ठेंगा दिखाने वाले दबंग हों, या फिर न्यायपालिका के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले लोग अब वक्त आ गया है कि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर ऐसा सख्त रुख अख्तियार करे, जिससे कानून का इकबाल और जनता का भरोसा दोबारा कायम हो सके।





























