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POCSO आरोपी बेटे को खुद थाने लेकर पहुंचे केंद्रीय मंत्री…. अब खुद पर उठ रहे बड़े सवाल| Bandi Bhagirath Pocso Case

Nandani | Nedrick News Telangana Published: 17 May 2026, 10:45 AM | Updated: 17 May 2026, 10:46 AM

Bandi Bhagirath Pocso Case: POCSO मामले में आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी साई भागीरथ ने आखिरकार शनिवार (16 मई 2026) को पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। भागीरथ तेलंगाना के साइबराबाद स्थित पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज एक POCSO केस में मुख्य आरोपी है। कई दिनों तक फरार रहने के बाद वह अपने पिता और वकीलों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचा, जहां उसे औपचारिक रूप से पुलिस के हवाले कर दिया गया।

हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के उस बयान को लेकर हो रही है, जिसमें उन्होंने खुद स्वीकार किया कि मामला दर्ज होने के बाद से उनका बेटा लगातार उनके साथ ही था। मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर एक आरोपी कई दिनों तक मंत्री के साथ था, तो पुलिस ने उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की।

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मंत्री बोले- कानूनी सलाह के कारण हुई देरी | Bandi Bhagirath Pocso Case

पुलिस स्टेशन के बाहर मीडिया से बात करते हुए बंदी संजय कुमार ने कहा कि जैसे ही उनके बेटे के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई, वह उसे पुलिस के सामने पेश करना चाहते थे। लेकिन वकीलों की सलाह पर उन्होंने पहले कानूनी प्रक्रिया को समझने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “हमने अपने वकीलों को पूरे मामले की जानकारी दी और उनके सामने सारे सबूत रखे। वकीलों का मानना था कि मामला खारिज हो सकता है और जमानत भी मिल जाएगी। इसी वजह से कुछ देरी हुई।”

मंत्री ने यह भी बताया कि शनिवार को भी वकीलों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि अदालत से राहत मिल सकती है, लेकिन उन्होंने यह सोचकर अपने बेटे को पुलिस के हवाले कर दिया कि अब और देरी करना ठीक नहीं होगा। इसके बाद वह अपने बेटे को लेकर खुद पुलिस स्टेशन पहुंचे और वकीलों की मौजूदगी में उसे पूछताछ के लिए पुलिस को सौंप दिया।

हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद बदला फैसला

सूत्रों के मुताबिक, तेलंगाना हाई कोर्ट ने भागीरथ को अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राजनीतिक दबाव और बढ़ते विवाद के बीच परिवार ने सरेंडर का फैसला लिया। बताया जा रहा है कि पुलिस ने तीन दिन पहले ही भागीरथ को नोटिस जारी किया था, लेकिन वह लगातार पुलिस की पहुंच से बाहर था। ऐसे में केंद्रीय मंत्री का यह स्वीकार करना कि उनका बेटा उनके साथ ही रह रहा था, अब एक अलग कानूनी बहस का विषय बन गया है।

विपक्ष ने उठाए बड़े सवाल

मामले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि अगर कोई आम व्यक्ति किसी आरोपी को छिपाता, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होती। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्रीय मंत्री के खिलाफ भी आरोपी को शरण देने के मामले में केस दर्ज किया जाएगा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए और इस मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं, पुलिस ने भागीरथ को गिरफ्तार कर लिया है और अब उसे अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है।

मामले ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

POCSO जैसे गंभीर कानून से जुड़े इस मामले ने तेलंगाना की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक तरफ विपक्ष सरकार और पुलिस पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा नेता इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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