Hormuz Strait Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव ने एक नया मोड़ ले लिया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और होर्मुज की खाड़ी में हालात बिगड़ने के बाद अब अमेरिका ने अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि होर्मुज की खाड़ी में फंसे जहाजों को निकालने के लिए चलाया जा रहा “प्रोजेक्ट फ्रीडम” फिलहाल रोक दिया गया है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है और एक “अंतिम समझौते” के बेहद करीब दोनों देश पहुंच चुके हैं।
और पढ़ें: रूस पर वार से हिला दुनिया का संतुलन… समुद्र में हलचल तेज | US Russia geopolitical conflict
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ खत्म, अमेरिका का शांति की ओर कदम | Hormuz Strait Crisis
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अमेरिका ने अपने सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को खत्म करने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले की पुष्टि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका अब किसी नए युद्ध या बड़े सैन्य टकराव की स्थिति नहीं चाहता और शांति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर था।
ट्रंप का बयान और सोशल मीडिया संदेश
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों की अपील के बाद और अमेरिका की “सैन्य सफलता” को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत काफी सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और यह कदम सिर्फ यह देखने के लिए है कि क्या अंतिम समझौता संभव हो सकता है या नहीं।
नाकेबंदी जारी, तनाव अभी खत्म नहीं
हालांकि राहत की बात यह है कि सैन्य अभियान रोका गया है, लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया है कि होर्मुज की खाड़ी पर उसकी नाकेबंदी जारी रहेगी। यानी जहाजों की आवाजाही को लेकर प्रतिबंध अभी खत्म नहीं हुआ है। इससे साफ है कि अमेरिका का दबाव रणनीति के रूप में अभी भी कायम रहेगा, भले ही बातचीत की कोशिशें आगे बढ़ रही हों।
ट्रंप की सख्त चेतावनी और बयान
जब एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि ईरान को संघर्ष विराम तोड़ने पर क्या परिणाम भुगतने पड़ेंगे, तो उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा—“तुम्हें पता चल जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने छोटे हमलों की कोशिश की थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और उनके पास लड़ने के लिए संसाधन काफी कम रह गए हैं। ट्रंप ने यहां तक दावा किया कि अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान की नौसैनिक क्षमता काफी कमजोर हो गई है।
ईरानी जनता और विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी
ट्रंप ने ईरान की आंतरिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां लोग विरोध करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त सुरक्षा या हथियार नहीं हैं। उनके मुताबिक, अगर हिंसा बढ़ती है तो आम लोग सुरक्षित रूप से विरोध नहीं कर पाएंगे।
तेल बाजार पर असर: कीमतों में गिरावट
अमेरिका के इस फैसले का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिला है। अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) की कीमत में करीब 2.23 डॉलर यानी लगभग 2.18% की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 100.04 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव कम होने की उम्मीद ने बाजार को थोड़ी राहत दी है, हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है।
होर्मुज में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
होर्मुज की खाड़ी के पास अमेरिकी वायुसेना के F-16 लड़ाकू विमान लगातार गश्त कर रहे हैं। अमेरिका ने इस क्षेत्र में बड़ी सैन्य तैनाती कर रखी है, जिसका मकसद अपने सैनिकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है ताकि वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित न हो।
नाविकों की मौत और बढ़ता तनाव
इस पूरे संघर्ष के दौरान 10 नागरिक नाविकों की मौत की खबर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान की कुछ नौकाओं को भी नुकसान पहुंचाया है, जिससे तनाव और बढ़ा है।
UN की सख्त चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए ईरान को चेतावनी दी है। प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर ईरान जहाजों पर हमले, अवैध टोल वसूली और समुद्री माइंस से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करता, तो उस पर सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।




























