Bengal Politics News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की संभावित जीत के बाद राज्य में विकास और केंद्र की योजनाओं को लेकर एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से जिन योजनाओं पर ब्रेक लगा हुआ था, अब उनके फिर से लागू होने की संभावना तेज हो गई है। चुनाव प्रचार के दौरान भी यह मुद्दा लगातार चर्चा में रहा था और प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कई रैलियों में इसे प्रमुखता से उठाया था।
केंद्र की 7 बड़ी योजनाएं जो बदल सकती हैं तस्वीर| Bengal Politics News
अगर राज्य में नई सरकार बनती है, तो केंद्र की कई अहम योजनाओं को फिर से लागू करने की तैयारी तेज हो जाएगी। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और रोजगार से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
- आयुष्मान भारत योजना
यह देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना मानी जाती है, जिसके तहत गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। लेकिन पश्चिम बंगाल की मौजूदा सरकार ने इसे लागू करने से इनकार कर दिया था और इसकी जगह ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना शुरू की थी। अब इसके लागू होने की संभावना बढ़ गई है। - पीएम श्री स्कूल योजना
शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए पूरे देश में पीएम श्री स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में इस योजना को अब तक मंजूरी नहीं मिली थी। - पीएम मत्स्य संपदा योजना
मछुआरा समुदाय के लिए बनाई गई यह योजना राज्य में पूरी तरह लागू नहीं हो पाई। इसका फायदा बड़े पैमाने पर लोगों तक नहीं पहुंच सका। - पीएम आवास योजना
इस योजना को लेकर राज्य और केंद्र के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा है। कई बार फंड रोकने और अनियमितताओं के आरोप भी लगे, जिससे गरीबों के घर निर्माण पर असर पड़ा। - पीएम फसल बीमा योजना
किसानों की सुरक्षा के लिए बनाई गई इस योजना को राज्य में लागू नहीं किया गया था। अब नई राजनीतिक स्थिति में इसके लागू होने की उम्मीद है। - चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना
उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों के लिए यह योजना चलाई गई थी, लेकिन इसे राज्य सरकार की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। - पीएम विश्वकर्मा योजना
कारीगरों और शिल्पकारों के लिए बनी यह योजना भी राज्य में लागू नहीं हो सकी थी। अब इसके शुरू होने की संभावना मजबूत हो गई है।
विवाद और राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि
इन योजनाओं को लेकर लंबे समय से केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव चलता रहा है। विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने भी कई बार राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ योजनाओं के नाम बदलकर राज्य सरकार उन्हें अपने तरीके से चला रही है। उदाहरण के तौर पर, जल जीवन मिशन को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें इसे राज्य स्तर पर अलग नाम देने पर आपत्ति जताई गई थी।
फंड रोकने का मुद्दा बना बड़ा राजनीतिक हथियार
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने केंद्र सरकार पर कई योजनाओं के लिए फंड रोकने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तक में धन की कमी के कारण काम प्रभावित हुआ है। विशेषकर दिसंबर 2021 के बाद मनरेगा फंड के निलंबन ने राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा किया था।
आगे क्या उम्मीद की जा रही है?
राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि केंद्र और राज्य के बीच सहयोग बढ़ेगा और रुकी हुई योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा। इससे खासकर गरीब, किसान, मछुआरे और श्रमिक वर्ग को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।




























