अधूरी शादी छोड़कर आए भाई जोगा सिंह, जब काम-वासना के जाल में फंसने से गुरु ने बचाया – Bhai Joga Singh

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 04 May 2026, 09:39 AM | Updated: 04 May 2026, 09:39 AM

Bhai Joga Singh: कहते है कि जिस तरह से हर एक सिख संगत की अपने गुरुओ के प्रति पूरी निष्ठा होती है, ठीक वैसे है सिख गुरुओ को भी अपने उन अनुयायियों से बेहद प्यार होता है जो धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने तक के लिए तैयार रहते है.. जो धर्म के लिए अपना घरबार परिवार भी भूल जाते है। लेकिन क्या हो जब गुरु साहिब का एक सबसे प्रिय अनुयायी धर्म की राह से भटक जाये.. तो क्या करेंगे ऐसे में गुरु साहिब.. क्या वो उस भक्त के रास्ते पर आने का इंतजार करेंगे..जी नहीं.. सिख गुरुओ ने सिखाया है कि सिख धर्म राह भटके बंदो को धर्म के मार्ग पर लाने का ही काम करता है.. फिर भला गुरु साहिब बीच मझधार में कैसे किसी संगत को छोड़ सकते है।

अपने इस लेख में हम आपको गुरु साहिब दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी औऱ उनके एक अनुयायी के बीच उस प्रागढ़ रिश्ते के साक्षी बनेंगे,. जब अपने भक्त रास्ते पर लाने के लिए दशवे गुरु चोरी छिपे एक वैश्य के कोठे तक पर जाने से पीछे नहीं हटे। आईये जानते है क्या है गुरुदावरा भाई जोगा सिंह की कहानी … जो कभी एक वैश्या का कोठा हुआ करता था और कौन थे गुरुसाहिब के वो भक्त.. जिनके लिए खुद गुरू साहिब को जाना पड़ा ऐसी  जगह।

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भाई जोगा सिंह की कहानी

ये कहानी शुरु होती है  1975 में नौवें गुरु गुरु तेग बहादुरी जी की शहीदी के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी ने दसवे गुरु के रूप में गद्दी संभाली थी..नन्हें से गुरु साहिब को देखने के लिए दूर दूर से सिख संगते आनंदपुर साहिब आने लगी थी.. इसी दौरान पेशावर से एक दंपत्तति अपने 4 से 5 साल के बच्चे के साथ आये है। गुरू साहिब का तेज देखकर वो बच्चा उनके चरण के पास ही रहता था। वहां आने वाले संगतों की सेवा में लगा रहता था.. तब गुरु साहिब ने बच्चे से उसका नाम पूछा… जिसपर बच्चे ने कहा कि उनका नाम जोगा सिंह है।

गुरु साहिब ने उनका नाम सुनकर सीधा पूछा की वो किसके जोगे है.. जिसपर छोटे से बच्चे ने बड़े प्यार से कहा कि वो गुरु साहिब का जोगी का है। गुरु साहिब ने बच्चे को अपने सानिध्य में रखने का फैसला किया.. उसके बाद वो अपने माता पिता के साथ पेशावर नहीं गए बल्कि गुरु साहिब के साथ ही रहे। वो दिन रात संतो की सेवा करते, गुरु साहिब की सेवा करते और गुरु साहिब के सानिध्य में वो बड़े होने लगे, और 1699 में उन्हें भी वैशाखी के दिन अमृत चखा कर अमृतधारी बनाया। लेकिन जब वो जवान हो गए तो उनके माता पिता अपने बेटे को लेने आये.. उन्होंने ये भी बताया कि उन्होंने अपने बेटे की शादी तय कर दी है.. जोगा सिंह शादी नहीं करना चाहते थे, लेकिन गुरु साहिब ने उन्हे कहा कि वो शादी करके वापिस आ जाये।

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आधी शादी में दी चिट्ठी

पेशावर में शादी की तैयारी चल रही थी, लेकिन गुरु साहिब ने अपने अनुयायी द्वारा एक चिट्ठी लिख कर भेजी और आदेश दिया कि दूसरा फेरा पूरा होने के बाद ही चिट्ठी देना.. जैसा कि आदेश था..दूसरा फेरा पड़ते ही शिष्य ने चिट्टी दे दी..शादी अधूरी थी, लेकिन चिट्ठी में साफ लिखा था कि वो जो भी कह रहे है उसे उसी वक्त छोड़ कर उनके पास आ जाये। किसी और काम के लिए उनके कदम नहीं बढ़ने चाहिए। भाई जोगा सिंह ने गुरु आज्ञा मानकर शादी को बीच में ही छोड़ कर जाने के लिए तैयार हो गए.. सबने बहुत समझाया कि दो और फेरा लेकर शादी पूरी करदें लेकिन उन्होंने अपनी दुल्हन को अपना कमरबंध देकर कहा कि बाकि के फेरे इसके साथ ले लेना।

जब घमंड ले भर बैठे जोगा सिंह

गुरु साहिब की आज्ञा मानकर शादी बीच में छोड़ कर जाने के कारण जोगा सिंह सोचने लगे थे कि क्या कोई और ऐसा कर सकता है.. शायद नहीं.. गुरु साहिब के सबसे बड़े भक्त वहीं है.. लेकिन रात के दौरान वो जहां रूके थे, वहीं गलियों में टहलते हुए जोगा सिंह जी की नजर एक वैश्या पर पड़ी और वो काम वासना में भर बैठे.. जब कि सिख धर्म के महापापों में ये भी एक पाप है कि आप अपनी पत्नी के अलावा किसी पराई स्त्री के लिए काम वासना नहीं रख सकते। बस फिर क्या था पवित्र मन भाई जोगा सिंह पाप के अधिकारी हो गए। उन्होंने खालसा का सबसे बड़ा नियम तोड़ दिया था

जब पहरेदार बने गुरु साहिब

कहते है कि वैश्या की खूबसूरतू देख कर भाई जोगा (Bhai Joga Singh) बिना कुछ सोचे समझे वैश्यालय की सीढ़िया चढ़ने लगे,, लेकिन तभी एक पहरेदार ने रोक दिया औऱ आदेश दिया कि अभी हमारा राजा वैश्यालय में गया है, जब वो लौटेगा तो तुम जाना। भाई जोगा सिंह उस वक्त तो चले गए लेकिन वो रात भर में कई बार आये लेकिन हर बार द्वारपाल ने उन्हे रोक दिया.. अंत में सुबह हो गई.. लेकिन पहरेदार वहीं था… पहरेदार ने जोगा सिंह का नाम लेकर पूछा कि तुम को गुरु गोबिंद सिह जी के शिष्य लगते हो फिर तुम धर्म से मार्ग से कैसे भटक गए। जोगा सिंह हैरान रह गए.. कि पहरेदार को उनका नाम कैसे पता चला। भाई जोगा सिंह को अपनी गलती की अहसास हुआ और मन में ग्वानि भर कर वापिस आ गए।

जोगा सिंह ने अपनी शादी आधी ही छोड़ दी

भाई जोगा सिंह (Bhai Joga Singh) आनंदपुर साहिब पहुंचे लेकिन गुरु साहिब से नजरे नहीं मिला पाये.. लेकिन गुरु साहिब ने खुद उन्हें अपने पास बुलाया और उनकी तारीफ करते हुए कहा कि गुरु की एक आज्ञा में भाई जोगा सिंह ने अपनी शादी आधी ही छोड़ दी.. लेकिन भाई जोगा सिंह ने केवल गुरु साहिब की लाल और फूली आंखो को देखा.. उनसे रहा नहीं गया और पूछा कि उनकी आंखे ऐसी क्यों है.. जैसे वो रात भर सोये नहीं है। जिस पर गुरु साहिब ने उन्हें कहा कि ये तुम्हारी रक्षा के लिए हुआ है.. क्योंकि वो गलत रास्ते पर न चले जाये इसलिए उन्होंने सारी रात वैश्या के घर के बाहर पहरेदारी की। गुरु साहिब ने कहा कि वो अपने प्रिय भक्त को नरक में कैसे जाने दे सकते थे। भाई जोगा सिंह ने अपनी गलती के लिए गुरु साहिब से माफी मांगी।

आज भी होशियारपुर के मोहल्ला शेखा में जिस जगह पर वैश्या का कोठा था.. वहां भाई जोगा को रोकने के लिए गुरु साहिब के पवित्र चरण पड़े थे, इसलिए इसे अब गुरुद्वारा भाई जोगा सिंह के नाम से जाना जाता है। ये गुरुद्लारा प्रतीक है एक गुरु की अपने शिष्य के प्रति निष्ठा.. जो सच्चे मन से गुरु सेवा करता है उसकी रक्षा खुद गुरु साहिब करते है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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