US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव अब और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। बातचीत ठप होने और सीजफायर को लेकर अनिश्चितता के बीच हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो बड़े कार्गो जहाजों को रोककर जब्त कर लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
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ईरान की बड़ी कार्रवाई, दो जहाज जब्त | US Iran War
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने “उल्लंघन” के आरोप में दो जहाजों को रोका है। यह कार्रवाई सुबह के समय की गई। जिन जहाजों को जब्त किया गया है, उनकी पहचान MSC-FRANCESCA और EPAMINONDAS के रूप में हुई है।
Marine Traffic के शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, EPAMINONDAS जहाज दुबई के जबेल अली पोर्ट से भारत के गुजरात की ओर जा रहा था। इसका मतलब है कि इस घटना का असर सिर्फ अमेरिका-ईरान तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और अन्य देशों की सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी से मचा हड़कंप
इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में ही एक और गंभीर घटना सामने आई। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के मुताबिक, ईरान की IRGC की गनबोट ने एक लाइबेरिया फ्लैग वाले जहाज पर गोलीबारी की। बताया गया कि यह हमला बिना किसी चेतावनी के किया गया।
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ और न ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचा। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा फर्म वैनगार्ड टेक के अनुसार, जहाज को पहले यह बताया गया था कि उसे होर्मुज से गुजरने की अनुमति है।
ईरान और पश्चिमी रिपोर्ट्स में विरोधाभास
ईरान की सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि जहाज ने चेतावनी को नजरअंदाज किया, जिसके बाद कार्रवाई की गई। वहीं दूसरी ओर UKMTO का कहना है कि ईरानी गनबोट ने पहले कोई संपर्क करने की कोशिश नहीं की थी। इसी विरोधाभास ने मामले को और उलझा दिया है।
ईरानी मीडिया आउटलेट नूर न्यूज़ ने भी कहा कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने केवल चेतावनी के बाद ही गोलीबारी की, जबकि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स इससे अलग तस्वीर पेश कर रही हैं।
तेल सप्लाई और वैश्विक व्यापार पर खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य या सुरक्षा कार्रवाई सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ तेल की कीमतों में उछाल ला सकती हैं, बल्कि वैश्विक शिपिंग रूट्स को भी अस्थिर कर सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो इस रूट पर काफी निर्भर हैं, यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
अमेरिका-ईरान तनाव में नया मोड़
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत पहले ही ठप पड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर को आगे न बढ़ाने के फैसले के बाद तनाव और बढ़ गया है।
इससे पहले अमेरिका की ओर से भी ईरानी जहाजों पर कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। अमेरिकी सेना कथित तौर पर एक ईरानी कंटेनर जहाज को जब्त कर चुकी है और हिंद महासागर में एक ईरानी तेल टैंकर पर भी कार्रवाई की गई थी।
स्थिति और बिगड़ने की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह टकराव सिर्फ राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करेगा। होर्मुज में बढ़ती सैन्य गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि दोनों देश अब कूटनीति से ज्यादा दबाव की रणनीति अपना रहे हैं।





























