TCS Nashik Case: महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक बड़ी BPO कंपनी (TCS BPO) से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने कॉरपोरेट दुनिया के माहौल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला सिर्फ ऑफिस के भीतर का कोई सामान्य विवाद नहीं है, बल्कि एक कर्मचारी के मुताबिक यह उसकी आस्था, सम्मान और निजी जिंदगी पर लगातार किया गया हमला है।
एक मीडिया इंटरव्यू में पीड़ित कर्मचारी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारी का कहना है कि उसे जबरन धार्मिक गतिविधियों में शामिल किया गया, उसकी मान्यताओं का मजाक उड़ाया गया और यहां तक कि उसकी निजी जिंदगी को भी अपमानित किया गया।
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2022 से शुरू हुआ मानसिक दबाव | TCS Nashik Case
पीड़ित के अनुसार, उसने साल 2022 में कंपनी जॉइन की थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही समय बाद उसके टीम लीडर तौसीफ अत्तारी और सहयोगी दानिश शेख का व्यवहार बदलने लगा। उसका आरोप है कि तौसीफ ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए उसे लगातार दबाव में रखा। उसे जरूरत से ज्यादा काम दिया जाता था, और कई बार टीम लीडर और अन्य साथियों का काम भी उसी पर डाल दिया जाता था। इससे वह शारीरिक और मानसिक रूप से थकने लगा।
धार्मिक पहचान बनी निशाना
कर्मचारी ने बताया कि वह एक आस्थावान हिंदू है और रामदास स्वामी का भक्त है। वह नियमित रूप से रुद्राक्ष की माला पहनता है। उसके मुताबिक, यही बात उसके कुछ सहकर्मियों को खटकने लगी। धीरे-धीरे ऑफिस के भीतर धार्मिक बहस का माहौल बनने लगा, जो बाद में उत्पीड़न का रूप ले गया।
पीड़ित का दावा है कि उसके देवी-देवताओं पर सवाल उठाए जाते थे, उनका मजाक उड़ाया जाता था और उसकी आस्था को गलत साबित करने की कोशिश की जाती थी। कई बार उससे ऐसे सवाल पूछे जाते थे, जिनका मकसद सिर्फ उसे नीचा दिखाना होता था।
जबरन धार्मिक गतिविधियों में शामिल कराने का आरोप
पीड़ित ने आरोप लगाया कि उस पर सिर्फ बातें करने तक ही दबाव नहीं डाला गया, बल्कि उसे जबरन धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए भी मजबूर किया गया। उसके अनुसार, साल 2023 में ईद के मौके पर उसे टीम लीडर के घर ले जाया गया। वहां उसकी इच्छा के खिलाफ उसे टोपी पहनाई गई और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं, उसकी तस्वीर लेकर कंपनी के आधिकारिक ग्रुप में शेयर कर दी गई, जिससे उसे मानसिक रूप से शर्मिंदा और कमजोर महसूस कराया जा सके।
खाने-पीने की आदतों पर भी दबाव
पीड़ित ने बताया कि वह शुद्ध शाकाहारी है, लेकिन उसे कई बार नॉन-वेज खाने के लिए मजबूर किया गया। उसके मुताबिक, रात की शिफ्ट के बाद उसे बाहर ले जाया जाता और दबाव बनाया जाता कि वह अपनी इच्छा के खिलाफ खाना खाए। जब वह मना करता, तो उसका मजाक उड़ाया जाता और उसकी सोच को गलत बताया जाता।
निजी जिंदगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू वह है, जब पीड़ित की निजी जिंदगी को लेकर टिप्पणी की गई। पीड़ित और उसकी पत्नी को शादी के कई साल बाद भी संतान नहीं हुई थी। इस बात को लेकर उसके सहकर्मियों ने कथित तौर पर मजाक उड़ाया। आरोप है कि एक टीम लीडर ने सार्वजनिक रूप से बेहद अपमानजनक टिप्पणी की, जिससे कर्मचारी बुरी तरह आहत हो गया। इसके बाद ऑफिस में विवाद बढ़ गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
झगड़ा और धमकी तक पहुंचा मामला
पीड़ित के मुताबिक, एक दिन स्थिति इतनी बिगड़ गई कि ऑफिस में हंगामा हो गया। उसने आरोप लगाया कि गुस्से में आकर टीम लीडर ने उस पर टेबल फैन फेंका और उसे जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद वह काफी डर गया और मानसिक रूप से टूटने लगा।
महिला कर्मचारियों पर भी अभद्र टिप्पणी के आरोप
पीड़ित ने यह भी दावा किया कि यह व्यवहार सिर्फ उसके साथ नहीं था। उसके अनुसार, कुछ लोग महिला कर्मचारियों के बारे में भी आपत्तिजनक बातें करते थे और उनके चरित्र पर सवाल उठाते थे। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
परिवार की मजबूरी का भी कथित फायदा उठाया गया
पीड़ित ने बताया कि जब उसके पिता को पैरालिसिस का अटैक आया, तब भी उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया। उसका कहना है कि इस मुश्किल समय में भी उसे यह कहा गया कि अगर वह धर्म परिवर्तन कर ले, तो उसके पिता ठीक हो सकते हैं। जब उसने इन बातों का विरोध किया, तो उसके खिलाफ कंपनी के उच्च अधिकारियों को शिकायतें भेजने की बात भी सामने आई।
चार साल तक चलता रहा उत्पीड़न
पीड़ित के अनुसार, यह पूरा सिलसिला करीब चार साल तक चला और 23 मार्च 2026 तक जारी रहा। उसका कहना है कि शुरुआत में दोस्ती का दिखावा किया गया, लेकिन धीरे-धीरे उसका फायदा उठाकर उसे मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की गई। उसने यह भी आरोप लगाया कि उस पर धार्मिक प्रतीकों को छोड़ने और अपनी पहचान बदलने का दबाव बनाया गया।
कानूनी कार्रवाई की राह
आखिरकार, लगातार हो रहे उत्पीड़न से परेशान होकर पीड़ित ने चुप्पी तोड़ी और संबंधित लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। अब यह मामला जांच के दायरे में है और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी।
कॉरपोरेट माहौल पर उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता, कर्मचारियों के अधिकार और मानसिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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